अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ब्रिटिश पाउंड पर चौतरफा दबाव देखा गया, जिससे पाउंड स्टर्लिंग अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 1.3200 के स्तर से नीचे फिसलकर 26 जून के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के पास कारोबार करता रहा। वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग और ऊर्जा कीमतों की वजह से महंगाई को लेकर दोबारा गहराती चिंताओं ने डॉलर इंडेक्स को मार्च 2025 के बाद के अपने उच्चतम दायरे में टिकाए रखा है। इसके परिणामस्वरूप जीबीपी/यूएसडी जोड़ी लगातार तीसरे सप्ताह हल्की गिरावट दर्ज करने की ओर अग्रसर दिख रही है, जबकि वैश्विक मुद्रा कारोबारी निकट भविष्य की दिशा तय करने के लिए आगामी अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार रिपोर्ट पर नजरें टिकाए हुए हैं।
अमेरिकी रोजगार डेटा और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति का प्रभाव
मुद्रा बाजार के सहभागियों के लिए अमेरिकी मासिक गैर-कृषि पेरोल यानी एनएफपी आंकड़े बेहद अहम मोड़ पर आ रहे हैं। यह रिपोर्ट फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर रुख के संबंध में महत्वपूर्ण संकेत उपलब्ध कराएगी। हाल के दिनों में बाजार की धारणा में तेजी से बदलाव आया है; केवल एक सप्ताह पहले तक निवेशक अक्टूबर महीने में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को सबसे संभावित परिणाम मान रहे थे। हालांकि, अपेक्षाकृत नरम मुद्रास्फीति आंकड़ों और फेड नीति निर्माताओं की सतर्क टिप्पणियों के बाद दरों में किसी भी बदलाव पर विराम यानी ठहराव प्रमुख परिदृश्य बन गया है। इसके बावजूद, वैश्विक कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के चलते महंगाई भड़कने का खतरा बना हुआ है, जिसने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स में रात भर आई हल्की गिरावट को रोकते हुए डॉलर इंडेक्स को डेढ़ साल के शिखर के पास मजबूत बनाए रखा है।
तकनीकी स्तर और जीबीपी/यूएसडी का कारोबारी रुख
तकनीकी चार्ट पर जीबीपी/यूएसडी का अल्पकालिक रुझान मंदी का बना हुआ है। 1.3200 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के टूटने के बाद अब नजरें जून महीने में बने वर्ष के सबसे निचले स्तर यानी 1.3140 के क्षेत्र पर टिकी हैं। यदि बिकवाली का दबाव बना रहता है और यह स्तर टूटता है, तो अगला पड़ाव 1.3100 का गोल आंकड़ा होगा, जो पिछले एक महीने से जारी डाउनट्रेंड को और गहरा कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि पाउंड में कोई तकनीकी सुधार या उछाल आता है, तो उसे 1.3300 के स्तर के पास कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा। किसी भी ठोस तेजी के लिए इस बाधा के पार टिकाऊ मजबूती आवश्यक होगी, जिसके बाद ही जोड़ी 1.3448 पर स्थित तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज की ओर बढ़ने की कोशिश कर सकती है।
लाइव तकनीकी आंकड़ों के अनुसार, जीबीपी/यूएसडी का मौजूदा भाव 1.32 के स्तर पर है, जो पिछले बंद 1.33 के मुकाबले 0.61 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। इसका 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय आरएसआई 29 पर पहुंचकर ओवरसोल्ड स्थिति का संकेत दे रहा है, जबकि एमएसीडी -0.01 पर मंदी की स्थिति दर्शा रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज में ईएमए 20 1.33 पर, ईएमए 50 1.34 पर और ईएमए 200 1.34 पर हैं, जिसमें ईएमए 50 के ईएमए 200 से नीचे जाने के साथ डेथ क्रॉस की स्थिति बनी हुई है। वहीं 50-दिवसीय एसएमए 1.35 और 200-दिवसीय एसएमए 1.34 पर हैं। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 1.31 से 1.36 के बीच फैले हैं, जबकि 14-दिवसीय एडीएक्स 33 के स्तर के साथ एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की पुष्टि कर रहा है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 0 और सिग्नल लाइन 11 पर है, जबकि 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर दर्ज किया गया है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतियां और पाउंड स्टर्लिंग के बुनियादी कारक
ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा मानी जाती है, जिसका इतिहास वर्ष 886 ईस्वी से जुड़ा है और यह यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक मुद्रा है। वर्ष 2022 के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में यह चौथी सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्रा है, जिसकी कुल लेनदेन में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी है और रोजाना औसतन 630 अरब डॉलर का कारोबार होता है। इसके प्रमुख व्यापारिक जोड़ों में जीबीपी/यूएसडी शामिल है जिसे केबल के नाम से जाना जाता है और यह कुल मुद्रा विनिमय का 11 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा जीबीपी/जेपीवाई जिसे ड्रैगन कहा जाता है 3 प्रतिशत और यूरो/जीबीपी 2 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है। पाउंड स्टर्लिंग को बैंक ऑफ इंग्लैंड जारी करता है।
पाउंड स्टर्लिंग के मूल्य को तय करने वाला सबसे बड़ा कारक बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा निर्धारित मौद्रिक नीति है। बैंक ऑफ इंग्लैंड अपने फैसले मूल्य स्थिरता के प्राथमिक लक्ष्य के आधार पर करता है, जिसका मकसद लगभग 2 प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर हासिल करना है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केंद्रीय बैंक का मुख्य हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है। जब मुद्रास्फीति अत्यधिक ऊंची हो जाती है, तो बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों में वृद्धि करके इसे नियंत्रित करने का प्रयास करता है, जिससे आम लोगों और व्यवसायों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर पाउंड के लिए सकारात्मक साबित होती हैं क्योंकि वैश्विक निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए यूनाइटेड किंगडम में पूंजी लगाना पसंद करते हैं। इसके विपरीत, जब महंगाई काफी नीचे गिर जाती है तो यह आर्थिक मंदी का संकेत होता है, और ऐसे हालात में बैंक ऑफ इंग्लैंड ब्याज दरों को घटाकर कर्ज सस्ता करता है ताकि व्यवसाय निवेश बढ़ा सकें।
आर्थिक संकेतक और व्यापार संतुलन की भूमिका
यूनाइटेड किंगडम की अर्थव्यवस्था का स्वास्थ्य मापने के लिए जारी होने वाले विभिन्न आंकड़े पाउंड की दिशा निर्धारित करते हैं। इनमें सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज पीएमआई, और रोजगार संबंधी आंकड़े प्रमुख हैं। जब आर्थिक आंकड़े मजबूत आते हैं, तो यह न केवल विदेशी निवेश को आकर्षित करता है बल्कि बैंक ऑफ इंग्लैंड को ब्याज दरें बढ़ाने के लिए भी प्रेरित कर सकता है, जिससे पाउंड को सीधा समर्थन मिलता है। कमजोर आर्थिक आंकड़ों की स्थिति में पाउंड में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, यूनाइटेड किंगडम की घरेलू राजकोषीय चिंताएं भी वर्तमान में पाउंड की कमजोरी का एक प्रमुख कारण बनी हुई हैं।
एक अन्य महत्वपूर्ण डेटा ट्रेड बैलेंस यानी व्यापार संतुलन है। यह संकेतक किसी निश्चित अवधि के दौरान किसी देश द्वारा अपने निर्यात से की गई कमाई और आयात पर किए गए खर्च के बीच के अंतर को मापता है। यदि कोई देश ऐसी वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करता है जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है, तो विदेशी खरीदारों की मांग के चलते उसकी मुद्रा स्वाभाविक रूप से मजबूत होती है। इसलिए सकारात्मक शुद्ध व्यापार संतुलन मुद्रा को सहारा देता है, जबकि नकारात्मक संतुलन मुद्रा पर दबाव डालता है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और सोने पर असर
अमेरिकी डॉलर के मजबूत रुख का असर केवल पाउंड तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रमुख संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले डॉलर की जोड़ी यानी एयूडी/यूएसडी भी शुक्रवार को 0.6900 के स्तर के ठीक ऊपर कारोबार करते हुए जुलाई की शुरुआत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर के आसपास संघर्ष करती रही। सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को भू-राजनीतिक तनावों और तेल से उपजी महंगाई की चिंताओं से बल मिल रहा है, जिसने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कमजोर किया है।
उधर यूएसडी/जेपीवाई 158.00 के करीब समेकित होता दिखा, जो इसके साप्ताहिक दायरे का ऊपरी छोर है। टोक्यो में उम्मीद से अधिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आंकड़े आने से बैंक ऑफ जापान द्वारा आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों को बल मिला है, लेकिन डॉलर की सामान्य मजबूती जोड़ी को समर्थन दे रही है। हालांकि, जापानी अधिकारियों द्वारा संभावित बाजार हस्तक्षेप का डर इस जोड़ी की तेज बढ़त को सीमित कर रहा है। इसके साथ ही, सोना भी एक सीमित दायरे में नीचे की ओर खिसकता नजर आया, क्योंकि बिना ब्याज वाली इस धातु पर अमेरिकी डॉलर के डेढ़ साल के उच्चतम स्तर और अमेरिका-ईरान के बीच बने गतिरोध के कारण बने दबाव का सीधा असर पड़ रहा है।
















