ग्लासगो में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की ट्रैक और फील्ड उम्मीदों को पहले ही दिन एक बड़ा झटका लगा है। देश के सबसे तेज धावक गुरिंदरवीर सिंह पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा के शुरुआती दौर की हीट्स से ही बाहर हो गए हैं। कुल 11 हीट्स में शिरकत कर रहे 73 एथलीटों के बीच गुरिंदरवीर कुल मिलाकर 28वें पायदान पर रहे, जबकि केवल शीर्ष 17 धावक ही अगले चरण के मुकाबलों में अपनी जगह पक्की कर सके। तय किए गए क्वालीफिकेशन समय 10.24 सेकंड से वह महज 0.15 सेकंड पीछे रह गए, जिससे उनके अभियान का अंत शुरुआती चरण में ही हो गया।
हीट 4 में दूसरा स्थान हासिल किया
अपने करियर के पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में शिरकत कर रहे 25 वर्षीय गुरिंदरवीर सिंह ने हीट 4 में बेहतरीन प्रयास करते हुए 10.39 सेकंड का समय दर्ज किया। इस हीट में उन्होंने जमैका के रोहन वॉटसन के ठीक पीछे दूसरा स्थान प्राप्त किया। रोहन वॉटसन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10.13 सेकंड में फिनिश लाइन पार की थी। हालांकि गुरिंदरवीर ने अपनी हीट के बाकी धावकों को पीछे छोड़ दिया था, लेकिन उनकी यह टाइमिंग कुल स्कोर में सेमीफाइनल में प्रवेश पाने के लिए नाकाफी साबित हुई। खेल प्राधिकरण के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर भी उनके संघर्ष और प्रतिबद्धता की सराहना की गई है।
शुरुआत अच्छी रही लेकिन गति धीमी पड़ी
लेन पांच से दौड़ते हुए गुरिंदरवीर ने शुरुआत काफी मजबूत की और मुकाबले के शुरुआती चरणों में जमैका के धावक के साथ कदम से कदम मिलाकर चले। रोहन वॉटसन, जिनका निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 9.91 सेकंड का है, ने अंतिम मीटरों में अपनी गति को और तेज करते हुए पहली पोजीशन हासिल की। यह पूरी स्पर्धा 1.9 मीटर प्रति सेकंड की वैध टेलविंड यानी हवा के अनुकूल रुख के बीच आयोजित की गई थी, जिसमें सभी एथलीटों को अपनी पूरी ताकत झोंकने का पूरा मौका मिला था।
हाल ही में बनाया था नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड
इस प्रतियोगिता से पहले गुरिंदरवीर से काफी उम्मीदें जुड़ी हुई थीं, क्योंकि उन्होंने हाल ही में अपने प्रदर्शन से सनसनी फैला दी थी। पंजाब के रहने वाले इस स्प्रिंटर ने इसी साल मई महीने में रांची में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान भारतीय स्प्रिंटिंग के इतिहास को नए सिरे से लिखा था। वहां उन्होंने 10.09 सेकंड का शानदार राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए 10.10 सेकंड के बैरियर को तोड़ने वाले देश के पहले पुरुष एथलीट बनने का गौरव हासिल किया था। उस ऐतिहासिक प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने सेमीफाइनल में 10.17 सेकंड का समय निकालकर अनिमेष कुजूर के 10.18 सेकंड के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा था और फिर फाइनल में अपनी गति को और बेहतर करते हुए इसे 10.09 सेकंड तक पहुंचा दिया था। इसी शानदार फॉर्म को देखते हुए इस बड़े मंच पर उनसे देश के लिए पदक जीतने की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन उनका यह डेब्यू अभियान मायूसी के साथ समाप्त हुआ।




















