अंतरराष्ट्रीय हॉकी जगत में एक बार फिर जर्मनी का परचम लहराया है। बेल्जियम के वावरे में खेले गए FIH पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप के फाइनल मैच में जर्मनी ने स्पेन को 1-0 के अंतर से शिकस्त दी। इस खिताबी जीत के साथ ही जर्मन टीम ने इतिहास रचते हुए अपने नाम चौथी बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी कर ली है। इस शानदार प्रदर्शन के बल पर अब जर्मनी ने टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा खिताब जीतने के मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। फाइनल जैसे दबाव वाले मैच में अपनी एक गोल की बढ़त को अंत तक सुरक्षित रखना किसी भी टीम के लिए बेहद कठिन होता है, लेकिन जर्मन खिलाड़ियों ने अपनी अटूट रक्षा पंक्ति के दम पर इस चुनौती को बखूबी पार कर दिखाया।
कांटे की टक्कर और रोमांचक पहला हाफ
बेल्जियम के वावरे शहर के मैदान पर उतरी दोनों टीमों के बीच खिताबी मुकाबला बेहद संघर्षपूर्ण और रोमांचक रहा। मैच की शुरुआत से ही दोनों पक्षों के खिलाड़ियों ने मैदान पर जबरदस्त आक्रामकता दिखाई। पहले हाफ के दौरान दोनों टीमों ने एक-दूसरे के डिफेंस को भेदने के कई प्रयास किए और कई शानदार मौके भी बनाए, लेकिन शुरुआती 30 मिनटों तक कोई भी टीम गोल करने में सफल नहीं हो सकी। शुरुआती 15 मिनट के खेल में ही दोनों फाइनलिस्ट टीमों को एक-एक पेनल्टी कॉर्नर हासिल करने का अवसर मिला, मगर दोनों ही मौकों पर फॉरवर्ड लाइन और ड्रैगफ्लिकर गोल में तब्दील करने से चूक गए। मैदान पर दर्शकों को दोनों तरफ से बेहतरीन स्टिक वर्क और मजबूत डिफेंस देखने को मिला।
माइकल स्ट्रुथॉफ का निर्णायक गोल
मुकाबले के तीसरे क्वार्टर में स्पेनिश टीम ने जर्मनी के ऊपर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई और लगातार हमले जारी रखे। इस दौरान स्पेन ने जर्मन गोलपोस्ट पर कुल 10 हमले किए, लेकिन हर बार जर्मन डिफेंस दीवार बनकर सामने आया और उनके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। आखिरकार मैच का एकमात्र और सबसे बड़ा निर्णायक गोल 44वें मिनट में आया, जिसे माइकल स्ट्रुथॉफ ने अपने नाम किया। जर्मन टीम ने मैदान के दोनों फ्लैंक से आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना पेश करते हुए एक शानदार आक्रामक मूव तैयार किया। दाईं ओर से आए सटीक पास को माइकल ने बिना कोई गलती किए सीधे गोलपोस्ट में पहुंचा दिया और अपनी टीम को 1-0 की अमूल्य बढ़त दिला दी। इसके बाद स्पेन ने मैच में वापसी के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। मुकाबले के अंतिम क्षणों में स्पेन ने अपने गोलकीपर को भी मैदान से बाहर बुलाकर एक अतिरिक्त आक्रामक खिलाड़ी के साथ मैदान पर उतरने का जुझारू फैसला किया, लेकिन जर्मनी की मुस्तैद रक्षा पंक्ति ने अंत तक कोई सेंध नहीं लगने दी।
पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी और स्पेन का अधूरा सपना
इस खिताबी जीत के साथ ही जर्मनी की पुरुष हॉकी टीम ने FIH वर्ल्ड कप के इतिहास में सर्वाधिक बार चैंपियन बनने के मामले में पाकिस्तान की बराबरी कर ली है। जर्मनी ने इससे पहले साल 2002 में कुआलालंपुर, साल 2006 में मोनशेनग्लाडबाख और साल 2023 में भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप की ट्रॉफियां अपने नाम की थीं। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने ऐतिहासिक रूप से 1971, 1978, 1982 और 1994 में चार बार इस प्रतिष्ठित खिताब को जीता था। इस बीच, स्पेन की टीम काफी लंबे अंतराल के बाद वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंची थी। स्पेन ने इससे पहले आखिरी बार 1998 में वर्ल्ड कप का खिताबी मुकाबला खेला था। यह उनके इतिहास का कुल तीसरा फाइनल था, लेकिन पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने का उनका यह सपना एक बार फिर अधूरा ही रह गया। अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने इस मुकाबले को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की है।
फाइनल तक का रोमांचक सफर और अन्य मुकाबले
स्पेन ने खिताबी मुकाबले में प्रवेश करने के लिए सेमीफाइनल मैच में सह-मेजबान नीदरलैंड्स को 4-3 के करीबी अंतर से पराजित किया था। वहीं दूसरी तरफ, जर्मनी ने वावरे में खेले गए अपने सेमीफाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना को 2-1 से मात देकर फाइनल की टिकट पक्की की थी। इसके अलावा टूर्नामेंट के ब्रॉन्ज मेडल मैच में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को एक रोमांचक संघर्ष में 2-1 से हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। इससे पहले महिला हॉकी वर्ल्ड कप में भी अर्जेंटीना की टीम ने 29 अगस्त को खिताबी जीत दर्ज करते हुए तीन बार की चैंपियन नीदरलैंड्स के लंबे दबदबे का अंत किया था। इस बार के वर्ल्ड कप में भारतीय महिला टीम ने भी अपने खेल का शानदार प्रदर्शन किया। खेल जगत की अन्य महत्वपूर्ण खबरों में स्मृति मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सूजी बेट्स को पीछे छोड़ते हुए एक बड़ा मुकाम हासिल किया है, जबकि तेज गेंदबाज कगिसो रबाada चोट के कारण ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी ODI सीरीज से बाहर हो गए हैं।



















