उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी समेत तराई क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को भी अपनी अतिरिक्त आमदनी का मजबूत जरिया बना रहे हैं। इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बेहद कम जगह में शुरू किया जा सकता है और शहद के अलावा मोम तथा अन्य उत्पादों के जरिए भी बढ़िया कमाई की जा सकती है। हालांकि, साल का यह समय यानी बरसात का सीजन इन पालकों के लिए काफी चुनौतियों से भरा रहता है, जिसके दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है।
बरसात के दिनों में क्या आती हैं समस्याएं
बारिश के मौसम में मौसम की बेरुखी के चलते मधुमक्खियां लंबे समय तक अपने छत्तों से बाहर नहीं निकल पाती हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें प्राकृतिक रूप से पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता है। इसके साथ ही छत्ते के भीतर अत्यधिक नमी बने रहने की वजह से फफूंद, हानिकारक कीट और कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। यदि समय रहते इन छत्तों की गहन जांच और उचित देखभाल न की जाए, तो कमजोर कॉलोनियों में मधुमक्खियों की संख्या बहुत तेजी से घटने लगती है और अंततः शहद का कुल उत्पादन भी प्रभावित होता है।
बक्सा रखने की सही जगह और प्रबंधन
मानसून शुरू होने से ठीक पहले मधुमक्खी के बक्सों के लिए सही स्थान का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। छत्तों को हमेशा ऐसी ऊंची और सूखी जगह पर ही स्थापित करना चाहिए जहां बारिश का पानी किसी भी स्थिति में जमा न हो सके। जमीन पर सीधे बॉक्स रखने से जमीन की नमी नीचे से अंदर तक पहुंच सकती है, इसलिए बक्से को हमेशा किसी स्टैंड या मजबूत ईंटों के सहारे कुछ ऊंचाई पर रखना बहुत जरूरी होता है।
साफ-सफाई और जल निकासी का ध्यान
मानसून के दौरान मधुमक्खी पालन स्थल के आसपास साफ-सफाई रखना बेहद आवश्यक है। छत्तों के आसपास उगने वाली घास, झाड़ियों और कचरे को समय-समय पर साफ करते रहना चाहिए, ताकि सांप, छिपकली, चींटी और अन्य कीट-पतंगों का खतरा आसपास न फटके। यदि बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बन जाए, तो तुरंत पानी की निकासी की उचित व्यवस्था करें। छत्तों को ऊंची और सूखी जगह पर रखने के साथ ही इनके प्रवेश द्वार को इतना खुला रखना चाहिए कि मधुमक्खियों का आना-जाना बिना किसी बाधा के आसानी से हो सके।
शहद निकालते समय रखें विशेष सावधानी
बरसात के दिनों में शहद निष्कर्षण का काम करते वक्त भी काफी सावधानी की आवश्यकता होती है। वातावरण में नमी अधिक होने की वजह से शहद की मूल गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए शहद निकालने से पहले छत्ते की स्थिति और मौसम के मिजाज को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए। केवल पूरी तरह तैयार और उचित रूप से सील किए गए शहद के फ्रेम को ही निकालना बेहतर माना जाता है। बहुत अधिक नमी वाले शहद को बिना सही प्रक्रिया के स्टोर करने पर उसकी भंडारण क्षमता और गुणवत्ता दोनों खराब हो जाते हैं।
रात के समय बक्से की व्यवस्था और रानी मधुमक्खी की निगरानी
मधुमक्खी के बक्से को उचित स्थान पर रात के समय इस प्रकार व्यवस्थित करना चाहिए कि प्रत्येक बॉक्स के बीच लगभग 5 फीट की दूरी बनी रहे। इसके बाद मधुमक्खियों के प्रवेश द्वार को खोल देना चाहिए ताकि वे अपना कार्य सुचारू रूप से शुरू कर सकें। इसके अलावा समय-समय पर बक्से को खोलकर रानी मधुमक्खी का निरीक्षण करते रहना चाहिए और किसी भी तरह की कमी महसूस होने पर मधुमक्खियों की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि मधुमक्खी पालन वाली जगह के आसपास फूलों वाली फसलों की खेती की जाए, तो इससे मधुमक्खियों को भी भरपूर फायदा पहुंचता है।
जिला उद्यान अधिकारी की सलाह
जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने इस बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि बारिश का यह पूरा सीजन मधुमक्खियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है। इस समयावधि में आसपास फूलों की उपलब्धता में भारी कमी आ जाती है, जिसकी वजह से मधुमक्खियों को पर्याप्त मात्रा में परागकण और भोजन नहीं मिल पाता है। भोजन की यह कमी सीधे तौर पर मधुमक्खियों की दैनिक गतिविधियों को प्रभावित करती है और वे कमजोर होकर पूरी तरह निष्क्रिय हो सकती हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो मधुमक्खियों की मौत होने का खतरा भी बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यही कारण है कि बरसात के दिनों में सभी मधुमक्खी पालकों को अपनी कॉलोनी के भोजन और स्वास्थ्य की देखभाल पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।


















