बिहार के मधुबनी से दबोचा गया हमीरपुर हत्याकांड का दूसरा आरोपी, सिर्फ तीन हजार के विवाद में ली थी मिस्त्री की जाननूंह के मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज में सुलह की कोशिश बेअसर, आगामी परीक्षाओं के बीच लगातार जारी रहा विद्यार्थियों का आंदोलनअमिताभ बच्चन के क्विज शो में गूंजा पलामू टाइगर रिजर्व का नाम, जानिए 1932 की पहली बाघ गणना से जुड़ा इसका गौरवशाली इतिहासभरतपुर में गाय के गोबर और मिट्टी के दीयों से सजेगी दीपावली, महिलाओं ने शुरू किया पर्यावरण अनुकूल शिल्पजीकैश में पांच दिनों की लगातार तेजी के बाद 1,373 डॉलर की अहम रुकावट पर नजर, ईटीएफ प्रवाह और डेरिवेटिव्स बाजार से मिला सहाराप्राचीन भारतीय शास्त्रों को लेकर फैलाए गए कई भ्रम, योग गुरु रामदेव ने हरिद्वार में रखी अपनी बातदिवाली कारोबार बचाने के लिए दिल्ली के व्यापारियों ने राहुल गांधी के सामने रखी 20 मिनट की खुली चर्चा की शर्तविधान परिषद चुनाव में सबसे आगे रहकर भी क्यों हार जाते हैं प्रत्याशी, समझें वरीयता वोट और ट्रांसफर का पूरा गणितउत्तर प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: नोएडा में चार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स पार्क को मिली मंजूरीस्मार्टफोन पीएलआई से सरकारी खजाने में आए 3.25 लाख करोड़ रुपये, इंसेंटिव पर खर्च हुए सिर्फ 19 हजार करोड़
जापान में 59.03 मीटर दूर भाला फेंककर महेंद्र गुर्जर ने रचा इतिहास, दूदू के लाल ने जीता रजत पदकखेल
28 अक्तू॰ 2026, 11:32 am (1 घंटे पहले)· 2

जापान में 59.03 मीटर दूर भाला फेंककर महेंद्र गुर्जर ने रचा इतिहास, दूदू के लाल ने जीता रजत पदक

आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में जयपुर के पैरा एथलीट महेंद्र गुर्जर ने 59.03 मीटर के नए गेम्स रिकॉर्ड के साथ भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीता है.

जापान के शहर आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स के मंच पर भारत के पैरा एथलीटों का दबदबा देखने को मिला है. राजस्थान के जयपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले युवा खिलाड़ी महेंद्र गुर्जर ने पुरुषों की संयुक्त एफ42 भाला फेंक प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश के लिए रजत पदक अपने नाम किया. महेंद्र ने इस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में 59.03 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर एक नया गेम्स रिकॉर्ड भी स्थापित किया. खेत-खलिहानों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराने की इस उपलब्धि ने समूचे राजस्थान और खेल जगत को गौरवान्वित किया है.

नॉटविल में विश्व रिकॉर्ड बनाकर बटोरी थीं सुर्खियां

महेंद्र गुर्जर का नाम अंतरराष्ट्रीय भाला फेंक जगत में किसी पहचान का मोहताज नहीं है. इससे पहले भी वह वैश्विक स्तर पर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं. पिछले साल स्विट्जरलैंड के नॉटविल मैदान पर आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के दौरान महेंद्र ने पुरुषों के एफ42 वर्ग में 61.17 मीटर का विशाल थ्रो फेंककर नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया था.

ये भी पढ़ें

उस अंतरराष्ट्रीय मुकाबले की सबसे खास बात यह रही कि महेंद्र ने लगातार दो थ्रो में अपने ही प्रदर्शन को बेहतर किया. ऐसा करते हुए उन्होंने ब्राजील के मशहूर पैरा एथलीट रॉबर्टो फ्लोरियानी एडेनिलसन के 59.19 मीटर के पुराने विश्व रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया था. इस असाधारण उपलब्धि ने पूरी दुनिया के खेल विशेषज्ञों का ध्यान उनकी प्रतिभा की ओर खींचा था.

पोलियो की मार को बनाया अपनी सबसे बड़ी ताकत

महेंद्र की जिंदगी का यह सुनहरा मुकाम आसान रास्तों से होकर नहीं गुजरा है. उनका जन्म 12 अप्रैल 1998 को राजस्थान में जयपुर के समीप दूदू क्षेत्र में स्थित सखून गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था. उनके माता-पिता अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह खेती-किसानी पर निर्भर रहे हैं. बचपन के शुरुआती दौर में ही पोलियो की बीमारी के कारण उनका एक पैर गंभीर रूप से प्रभावित हो गया था.

शारीरिक बाधा और ग्रामीण परिवेश में सीमित सुविधाओं के बावजूद महेंद्र ने कभी निराशा को खुद पर हावी नहीं होने दिया. उन्होंने सखून गांव तथा आसपास के स्थानीय सरकारी स्कूलों से अपनी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा पूरी की. उन्होंने अपनी 12वीं कक्षा की पढ़ाई काफी अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण की और इसके बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के उद्देश्य से कॉलेज में दाखिला लिया. खेल के प्रति उनके समर्पण ने इसी दौर में आकार लेना शुरू किया.

कॉलेज के मैदान से पेशेवर भाला फेंक तक का सफर

कॉलेज के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ महेंद्र ने विभिन्न खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू की. इसी दौरान उनका झुकाव भाला फेंक यानी जेवलिन थ्रो की तरफ हुआ. उनके बड़े भाई अजयपाल ने महेंद्र के भीतर छिपी नैसर्गिक खेल प्रतिभा को समय रहते पहचाना. भाई के खेल भविष्य को संवारने के लिए अजयपाल ने उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण दिलाने का फैसला किया और कोच समरजीत सिंह मल्ली के मार्गदर्शन में भेजा.

कोच समरजीत सिंह मल्ली की देखरेख में महेंद्र ने जेवलिन थ्रो की आधुनिक तकनीक, शारीरिक संतुलन और ताकत बढ़ाने का कड़ा अभ्यास शुरू किया. गांव की कच्ची पगडंडियों और साधारण संसाधनों से जूझते हुए भी उन्होंने अभ्यास सत्रों में कभी नागा नहीं किया. धीरे-धीरे जिला और राज्य स्तरीय मुकाबलों में उनकी मेहनत रंग लाने लगी, जहां उन्होंने लगातार कई पदक जीतकर अपने आगामी करियर की मजबूत नींव रखी.

साल 2023 में राष्ट्रीय पटल पर स्वर्ण पदक जीतकर बनाई जगह

महेंद्र गुर्जर के करियर का निर्णायक मोड़ वर्ष 2023 में आया, जब उन्होंने नियमित अभ्यास को शानदार नतीजों में तब्दील किया. इस साल आयोजित राजस्थान राज्य पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उन्होंने एफ42 वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया. इसके तुरंत बाद नेशनल पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी उन्होंने अपने लाजवाब प्रदर्शन को दोहराते हुए एक और स्वर्ण पदक देश के शीर्ष स्तर पर जीता.

राष्ट्रीय स्तर पर मिली इन दोहरी कामयाबियों ने भारतीय चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया और उन्हें राष्ट्रीय टीम में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगे का प्रतिनिधित्व करने का सुअवसर मिला. इस भरोसे पर पूरी तरह खरा उतरते हुए महेंद्र ने पहले स्विट्जरलैंड और अब जापान के मैदान पर भारत की धाक जमाई है.

लॉस एंजिलिस 2028 पैरा ओलंपिक पर टिकी हैं निगाहें

एशियन पैरा गेम्स में शानदार प्रदर्शन करने के बाद महेंद्र गुर्जर अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपने बड़े भाई अजयपाल और अपने कोच समरजीत सिंह मल्ली को समर्पित करते हैं. खेल के कठिन कार्यक्रमों और लंबी यात्राओं से जब भी उन्हें फुर्सत मिलती है, वह अपने गांव सखून लौटकर माता-पिता के साथ समय बिताना पसंद करते हैं. उनकी सादगी, शांत स्वभाव और विनम्रता के चलते सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उन्हें सराहते हैं.

रजत पदक जीतने के बाद अब महेंद्र का पूरा ध्यान अपने सबसे बड़े सपने पर केंद्रित है. उनका अगला मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 में अमेरिका के लॉस एंजिलिस में आयोजित होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है. इस महाकुंभ का आधिकारिक कोटा हासिल करने के लिए वह आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों में जुट गए हैं.

सवाल-जवाब

महेंद्र गुर्जर ने एशियन पैरा गेम्स में कौन सा पदक जीता?
महेंद्र गुर्जर ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की एफ42 भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक जीता.
एशियन पैरा गेम्स में महेंद्र गुर्जर का थ्रो कितना लंबा था?
उन्होंने 59.03 मीटर दूर भाला फेंककर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए यह पदक हासिल किया.
महेंद्र गुर्जर का विश्व रिकॉर्ड क्या है?
महेंद्र ने स्विट्जरलैंड के नॉटविल में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में 61.17 मीटर भाला फेंककर विश्व रिकॉर्ड बनाया था.
महेंद्र गुर्जर किस राज्य और जिले के रहने वाले हैं?
वह राजस्थान में जयपुर जिले के दूदू क्षेत्र अंतर्गत सखून गांव के रहने वाले हैं.
महेंद्र गुर्जर के कोच का नाम क्या है?
महेंद्र गुर्जर कोच समरजीत सिंह मल्ली के मार्गदर्शन में भाला फेंक का नियमित प्रशिक्षण लेते हैं.
महेंद्र गुर्जर का अगला बड़ा खेल लक्ष्य क्या है?
उनका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028 में लॉस एंजिलिस में आयोजित होने वाले पैरा ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·17 मिनट पहले

दूदू के इस लड़के की कहानी ने मुझे अपने उस पुराने पत्रकारिता के दिनों की याद दिला दी जब मैं राजस्थान के एक छोटे से गाँव में गया था। वहाँ संसाधनों की कमी के बावजूद बच्चों में ऐसा ही गज़ब का जज़्बा देखा था।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·16 मिनट पहले

कार्लोस, आपकी बात सही है। क्या महेंद्र के भाई अजयपाल ने उन्हें खुद ट्रेनिंग दी थी या बाद में कोई पेशेवर कोच मिला?

Tanvi Desai@tanvi-desai·39 मिनट पहले

जब मैं पिछले साल ओलंपिक कवरेज के दौरान एथलीटों से मिली थी, तो उनकी संघर्ष कहानियाँ हमेशा रोंगटे खड़े कर देती हैं। महेंद्र ने पोलियो को हराकर जो मुकाम हासिल किया है, वह गजब है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

तनवी जी, सच कह रही हैं आप। पिछले साल जब मैं खेल गाँव गया था, तब ऐसे ही एक खिलाड़ी से मुलाकात हुई थी, जिसके संघर्ष ने मुझे हिला कर रख दिया था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp