आईची-नागोया में आयोजित पैरा एशियाई खेलों के तीसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल के दम पर पदक तालिका में इजाफा किया. तीरंदाजी की महिला युगल स्पर्धा में भारत की शीर्ष तीरंदाज शीतल देवी और उनकी जोड़ीदार पायल नाग ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए देश के लिए रजत पदक जीता. इस खिताबी मुकाबले में भारतीय जोड़ी को चीन की जू ज़ुएक़िंग और झाओ जिंग की मजबूत जोड़ी से कड़े मुकाबले के बाद 141-150 के अंतर से हार झेलनी पड़ी, जिसके चलते उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा.
फाइनल मुकाबले में चीनी जोड़ी का दबदबा
स्वर्ण पदक के लिए हुए इस मुकाबले में चीनी खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही अपनी बढ़त बनाए रखी. विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर काबिज शीतल देवी ने अपने अचूक निशानेबाजी कौशल का परिचय देते हुए चार बार 10 अंक अर्जित किए. दूसरी ओर उनकी साथी पायल नाग लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आईं. पायल ने अपने शुरुआती तीरों पर आठ और नौ अंक जुटाए, जबकि अपने अंतिम तीर पर वह केवल सात अंक ही हासिल कर सकीं. इस अंतर के कारण भारतीय जोड़ी स्वर्ण पदक की दौड़ में पिछड़ गई.
शीतल देवी के लिए इस प्रतियोगिता में यह लगातार दूसरा रजत पदक है. पिछले एशियाई पैरा खेलों के दौरान उन्होंने सरिता देवी के साथ मिलकर इस युगल स्पर्धा में दूसरा स्थान हासिल किया था. युगल में रजत जीतने के बाद अब शीतल से एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक की उम्मीदें बंधी हुई हैं.
खिलाड़ियों का प्रेरक संघर्ष और कांस्य पदक का मुकाबला
जम्मू और कश्मीर के किश्तवार जिले में स्थित लॉइधर गांव की निवासी शीतल देवी का जन्म फोकोमेलिया नामक एक दुर्लभ विकार के साथ हुआ था, जिसके कारण उनके दोनों हाथ नहीं हैं. वहीं उनकी जोड़ीदार पायल नाग जब मात्र आठ वर्ष की थीं, तब वह 11,000 वोल्ट की हाई-टेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गई थीं, जिसके चलते उनके हाथ और पैर काटने पड़े थे. इन गंभीर शारीरिक चुनौतियों के बावजूद दोनों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार मुकाम हासिल किया है.
इसी बीच पुरुषों के युगल तीरंदाजी स्पर्धा में भारत के तोमन कुमार और श्याम सुंदर स्वामी कांस्य पदक हासिल करने से बेहद मामूली अंतर से चूक गए. तीसरे स्थान के लिए हुए इस बेहद रोमांचक मैच में भारतीय जोड़ी को चीन के ऐ शिनलियांग और झांग यिचेंग के हाथों 153-154 से केवल एक अंक के अंतर से पराजय का सामना करना पड़ा.
ऊंची कूद में प्रवीण कुमार का कीर्तिमान और बंटी को रजत
एथलेटिक्स ट्रैक पर पुरुषों की ऊंची कूद टी44/64 स्पर्धा में भारत का दबदबा देखने को मिला. भारतीय एथलीट प्रवीण कुमार ने 2.05 मीटर की शानदार छलांग लगाते हुए नया रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया. इसी मुकाबले में भारत के बंटी ने 1.92 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता. उज्बेकिस्तान के तेमुरबेक गियाज़ोव 1.86 मीटर की कूद के साथ कांस्य पदक जीतने में सफल रहे.
विश्व पैरा एथलेटिक्स नियमों के तहत टी44 और टी64 वर्ग के एथलीटों को एक ही स्पर्धा में शामिल किया जाता है ताकि पर्याप्त प्रतिस्पर्धी मिल सकें और मुकाबला निष्पक्ष रहे. टी64 श्रेणी उन एथलीटों के लिए होती है जो कृत्रिम निचले अंगों की मदद से मैदान में उतरते हैं, जबकि टी44 वर्ग में वे खिलाड़ी शामिल होते हैं जिनके निचले अंगों में शारीरिक अक्षमता होती है लेकिन वे किसी कृत्रिम अंग का उपयोग नहीं करते हैं.






















