शारीरिक बाधाएं कभी भी मजबूत इरादों और प्रतिभा की राह नहीं रोक सकतीं। राजस्थान के युवा खिलाड़ी यश ने इस बात को बॉलिंग लेन पर सच कर दिखाया है। यश भले ही बोल नहीं सकते, लेकिन जब वे बॉलिंग लेन पर उतरते हैं, तो उनकी तकनीक और स्ट्राइक खुद उनकी प्रतिभा की गवाही देती है। अपनी निरंतर साधना और समर्पण के बल पर उन्होंने पहले घरेलू स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित की और फिर वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर प्रदेश का गौरव बढ़ाया। उनकी यह यात्रा साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कोई भी कमजोरी इंसान को आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।
नेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में तीन पदकों पर कब्जा
यश के खेल जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव उस समय आया, जब उन्होंने 20 से 24 अप्रैल तक आयोजित नेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में भाग लिया। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने अपने बेहतरीन खेल कौशल, सटीक संतुलन और तकनीकी पकड़ का शानदार प्रदर्शन किया। पूरे टूर्नामेंट के दौरान वे विपक्षी खिलाड़ियों के लिए कड़ी चुनौती पेश करते रहे। यश ने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में कुल तीन पदक अपनी झोली में डाले, जिसमें एक स्वर्ण पदक भी शामिल था। इस शानदार जीत ने न केवल उनके खेल को नई पहचान दी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया।
चीन के अंतरराष्ट्रीय मंच पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व
राष्ट्रीय स्तर पर एक गोल्ड समेत तीन पदक जीतने का प्रतिफल यश को जल्द ही मिला, जब उनके बेहतरीन रिकॉर्ड को देखते हुए उनका चयन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए किया गया। इसके बाद चीन में 4 से 9 सितंबर तक आयोजित इंटरनेशनल बॉलिंग चैंपियनशिप में यश ने हिस्सा लिया। वे राजस्थान से इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहले खिलाड़ी बने। देश की सीमाओं से बाहर जाकर विदेशी धरती पर प्रतिस्पर्धा करना उनके खेल सफर की एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही। नेशनल चैंपियनशिप से लेकर चीन की बॉलिंग लेन तक का यह सफर यश के कड़े अभ्यास और अटूट लगन का सीधा परिणाम था।
कोच लोकेन्द्र सिंह राठौड़ का अहम मार्गदर्शन
यश की इस शानदार सफलता में उनके कोच लोकेन्द्र सिंह राठौड़ की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। लोकेन्द्र सिंह राठौड़ जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में स्थित ट्राइटन मॉल में गेमर गेमिंग जोन का संचालन करते हैं। उन्होंने यश की अंतर्निहित क्षमता को पहचाना और उन्हें खेल के तकनीकी दांव-पेच सिखाए। कोच राठौड़ की देखरेख में यश ने बॉलिंग गेम की बारीक तकनीकों को आत्मसात किया और हर दिन घंटों पसीना बहाया। कोच के सटीक मार्गदर्शन और यश की अथक मेहनत के तालमेल ने ही उन्हें एक सामान्य अभ्यासकर्ता से राष्ट्रीय चैंपियन और फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रतिस्पर्धी बना दिया।
चुनौतियों से जूझते युवाओं के लिए नई प्रेरणा
यश की यह उपलब्धि केवल पदकों की गिनती या विदेश में खेले गए टूर्नामेंट तक सीमित नहीं है। उनका सफर उन सभी बच्चों और परिवारों के लिए एक सशक्त संदेश है, जो किसी भी शारीरिक कमी को अपने सपनों की सीमा मान लेते हैं। यश ने अपनी मूक स्थिति को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि खेल को अपनी भावनाओं और आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम बना लिया। बॉलिंग लेन पर गेंद फेंकते समय उनका बढ़ता आत्मविश्वास यह दर्शाता है कि मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है। आज वे राजस्थान के उन चुनिंदा खिलाड़ियों की कतार में खड़े हैं, जिन्होंने अभावों को पीछे छोड़कर अपनी मेहनत से नई पहचान बनाई है।



















