शारीरिक बाधाएं और जीवन की कठिन परिस्थितियां अक्सर इंसान के कदम रोक देती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो वही चुनौतियां सफलता का नया मार्ग खोल देती हैं। राजस्थान के उदयपुर शहर से ताल्लुक रखने वाले मूक-बधिर निशानेबाज सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने अपनी अटूट लगन, नियमित अभ्यास और गहरे आत्मविश्वास के दम पर ऐसा ही एक कीर्तिमान स्थापित किया है। उत्तराखंड के देहरादून शहर में आयोजित जसपाल राणा मेमोरियल कप प्रतियोगिता में सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने निशानेबाजी का उत्कृष्ट प्रदर्शन पेश करते हुए 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल की डेफ मेन इंडिविजुअल श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी इस ऐतिहासिक जीत से न केवल मेवाड़ क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है, बल्कि पूरे राजस्थान राज्य का नाम राष्ट्रीय खेल पटल पर गर्व से ऊंचा हुआ है। सुरेंद्र सिंह देवड़ा का यह प्रदर्शन उन तमाम खिलाड़ियों के लिए एक सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है जो कठिन हालातों से जूझते हुए अपनी मंजिल हासिल करने का प्रयास करते हैं।
संवाद की बाधाओं को पछाड़कर बनाई निशानेबाजी में पहचान
सुरेंद्र सिंह देवड़ा के लिए निशानेबाजी के शीर्ष स्तर तक पहुंचने का यह सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा है। बचपन से ही वे बोलने और सुनने की क्षमता से वंचित थे, जिसकी वजह से आम लोगों की तरह संवाद स्थापित करना उनके लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती बना रहा। खेल प्रशिक्षण की शुरुआत के दौरान कोच द्वारा दी जाने वाली तकनीकी हिदायतों और बारीकियों को समझना आसान काम नहीं था। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर की बड़ी प्रतियोगिताओं के दौरान रहने वाले मानसिक दबाव को संभालना और शांत मन से लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना उनके धैर्य की कड़ी परीक्षा लेता था। इसके बावजूद सुरेंद्र ने अपनी शारीरिक सीमा को कभी अपने सपनों के बीच आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने अपनी खामोशी को अपनी कमजोरी बनने देने के बजाय उसे अपनी एकाग्रता की सबसे बड़ी शक्ति में तब्दील कर दिया। अभ्यास के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल सटीक निशाने और पिस्टल की तकनीक को बेहतर बनाने पर ही टिका रहता था।
क्लब स्तर से राष्ट्रीय पटल तक का सफर और कोच का योगदान
निशानेबाजी के खेल में अपनी शुरुआती ट्रेनिंग के लिए सुरेंद्र सिंह देवड़ा सबसे पहले बीएन शूटिंग क्लब से जुड़े थे। वहां बुनियादी बारीकियां सीखने और अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद उन्होंने मेवाड़ राइफल शूटिंग क्लब का रुख किया। इस क्लब में जुड़ने के बाद नियमित अभ्यास की प्रणाली और अनुशासित दिनचर्या ने उनके खेल के स्तर को एक नई ऊंचाई प्रदान की। पिछले लगभग 4 से 5 वर्षों के निरंतर कड़े परिश्रम, त्याग और खेल के प्रति संपूर्ण समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया। सुरेंद्र की इस छुपी हुई प्रतिभा को पहचानने और उसे सही दिशा में तराशने में अंतरराष्ट्रीय राइफल एवं पिस्टल कोच डॉ. जितेंद्र सिंह चुंडावत का विशेष योगदान रहा है। डॉ. जितेंद्र सिंह चुंडावत के कुशल मार्गदर्शन और सुरेंद्र की दिन-रात की कड़ी मेहनत के तालमेल ने ही सफलता की इस मजबूत बुनियाद को तैयार किया, जिसका सुखद परिणाम देहरादून में आयोजित राष्ट्रीय कप में स्वर्ण पदक के रूप में देखने को मिला है।
देहरादून प्रतियोगिता में कड़ी चुनौती और प्रेरणादायक जीत
देहरादून की धरती पर आयोजित इस प्रतिष्ठित जसपाल राणा मेमोरियल कप में देश के अलग-अलग राज्यों से आए बेहतरीन मूक-बधिर निशानेबाजों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में मुकाबला बेहद सख्त था और हर एक अंक के लिए खिलाड़ियों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। इस दबाव भरे माहौल में सुरेंद्र सिंह देवड़ा ने गजब के मानसिक संतुलन और सटीकता का परिचय देते हुए 25 मीटर स्पोर्ट्स पिस्टल स्पर्धा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया और स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमाया। सुरेंद्र की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत ट्रॉफी या पदक हासिल करने तक सीमित नहीं है। यह जीत उन सभी दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है जो सीमित सुविधाओं और सामाजिक बाधाओं के बीच अपने खेल के सपनों को साकार करने के लिए दिन-रात कोशिश कर रहे हैं। सुरेंद्र का यह प्रदर्शन साबित करता है कि अगर मन में पक्का इरादा हो तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।
पांच राष्ट्रीय पदकों का शानदार ट्रैक रिकॉर्ड और पिछली उपलब्धियां
सुरेंद्र सिंह देवड़ा के खेल करियर के ग्राफ पर नजर डालें तो उनकी सफलता की यह यात्रा एक दिन का परिणाम नहीं है, बल्कि यह लगातार बढ़ते शानदार प्रदर्शन का हिस्सा है। हाल ही में देहरादून के जसपाल राणा मेमोरियल कप में स्वर्ण पदक जीतने से ठीक पहले उन्होंने वर्ष 2026 में राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित 24वीं राजस्थान स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में भाग लिया था, जहां उन्होंने अपने शानदार खेल के बल पर रजत पदक जीता था। उससे एक साल पहले, वर्ष 2025 में गुजरात के अहमदाबाद शहर में आयोजित ऑल इंडिया जी.वी. मावलंकर शूटिंग प्रतियोगिता में भी उन्होंने अपनी सटीक निशानेबाजी के जरिए रजत पदक पर कब्जा जमाया था। वहीं वर्ष 2024 में गोवा राज्य में आयोजित इंडिया ओपन राइफल एवं पिस्टल प्रतियोगिता के दौरान सुरेंद्र ने अपनी श्रेणी में असाधारण खेल दिखाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इन तमाम सफलताओं को मिलाकर सुरेंद्र सिंह देवड़ा अब तक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में कुल 5 पदक अपने नाम कर चुके हैं, जिनमें 2 स्वर्ण पदक और 3 रजत पदक शामिल हैं। यह लगातार बना हुआ रिकॉर्ड उनके कड़े अनुशासन और खेल के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को उजागर करता है।
युवाओं और खिलाड़ियों के लिए मजबूत संदेश
सुरेंद्र सिंह देवड़ा की यह बड़ी उपलब्धि स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि किसी भी खेल या क्षेत्र में जीत केवल शारीरिक योग्यताओं पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके लिए मजबूत इरादों, आत्मबल और लगातार पसीना बहाने की जरूरत होती है। उन्होंने साबित कर दिया कि खामोशी को यदि अपनी ताकत बना लिया जाए तो लक्ष्यों को हासिल करना आसान हो जाता है। आज वे देश के उन तमाम युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं जो किसी भी तरह की कमी या असफलता के कारण खुद को दूसरों से कमजोर आंकने लगते हैं। सुरेंद्र का यह खेल सफर यह संदेश देता है कि जब इरादे साफ हों, लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए, तो दुनिया की कोई भी चुनौती किसी खिलाड़ी को सफलता के शिखर तक पहुंचने से रोक नहीं सकती।



















