देश में खेल उपकरणों की राजधानी के रूप में विख्यात मेरठ अपनी औद्योगिक पहचान को एक नया विस्तार दे रहा है। पारंपरिक रूप से कश्मीरी विलो और इंग्लिश विलो की लकड़ी से तैयार होने वाले क्रिकेट बैट और गेंदों की आपूर्ति देश-विदेश में करने वाले इस शहर में अब प्लास्टिक के बल्लों का उत्पादन भी तेजी से बढ़ रहा है। खेल की दुनिया में शुरुआती अभ्यास और स्थानीय स्तर पर क्रिकेट का शौक रखने वाले युवाओं के बीच इन बल्लों का आकर्षण काफी गहरा हुआ है, जिसके चलते शहर के औद्योगिक क्षेत्रों में कई नई निर्माण इकाइयां स्थापित हो चुकी हैं।
विभिन्न किस्मों और भारी गेंदों के अनुकूल विकल्प
सूरजकुंड स्पोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज कुमार सिंघल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि मेरठ खेल उद्योग में अपनी विशिष्ट पहचान दशकों से बनाए हुए है। दुनिया भर में यहां की लकड़ी से बने बल्लों की भारी मांग रहती है, लेकिन मौजूदा दौर में प्लास्टिक के बल्लों के प्रति भी युवाओं और उभरते खिलाड़ियों में खासा रुझान देखा जा रहा है। बाजार में प्लास्टिक के बैट की कई वैरायटी उतारी गई हैं। इन बल्लों की बनावट इस तरह तैयार की गई है कि खिलाड़ी इनके जरिए सामान्य गेंदों के साथ-साथ भारी गेंदों से भी आसानी से अभ्यास कर सकते हैं।
किफायती दाम और बाजार में बढ़ती मौजूदगी
कीमत के लिहाज से यह उत्पाद हर वर्ग की पहुंच में है। प्लास्टिक के इन बल्लों की शुरुआती कीमत मात्र 60 रुपये से शुरू होती है, जबकि बेहतर गुणवत्ता और मजबूत बनावट वाले विकल्प 700 रुपये तक की कीमत में आसानी से उपलब्ध हैं। पहले की तुलना में अब मेरठ के खेल बाजारों में थोक और फुटकर स्तर पर ऐसे बैट रखने वाली दुकानों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि, यह साफ किया गया है कि ये बल्ले मुख्य रूप से बुनियादी अभ्यास, शुरुआती सीखने के चरण और शौक के लिए बेहतरीन विकल्प हैं, जबकि पेशेवर प्रतियोगिताओं में खेलने के लिए खिलाड़ी आज भी पारंपरिक लकड़ी के बल्लों का ही इस्तेमाल करते हैं।
स्कूलों की मांग और चीनी उत्पादों का विकल्प
शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के लिए विभिन्न स्कूलों में इन बल्लों की मांग बहुत बड़े पैमाने पर रहती है। पहले के समय में भारतीय बाजारों में प्लास्टिक के बल्लों की ज्यादातर आपूर्ति चीन से की जाती थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में आए बदलावों के बाद स्थानीय स्तर पर निर्मित खेल सामग्री को प्राथमिकता मिलने लगी है। इसी का परिणाम है कि मेरठ की औद्योगिक इकाइयों में तैयार होने वाले प्लास्टिक बैट की मांग देश भर में काफी तेज हो गई है।
आधुनिक तकनीक और संतुलित वजन का संयोजन
मेरठ के परतापुर और उद्योग पुरम जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े स्तर पर ऐसी इकाइयां स्थापित हैं जहां इन बल्लों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण प्रक्रिया पूरी तरह आधुनिक मशीनों पर आधारित है। फैक्ट्री में प्लास्टिक के विशेष दानों को उन्नत मशीनों में डाला जाता है, जहां से वे सटीक क्रिकेट बैट के आकार में ढलकर बाहर आते हैं। निर्माण के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि प्रत्येक बल्ले का वजन संतुलित रहे, जिससे बच्चों और युवाओं को अभ्यास करते समय लकड़ी के बल्ले जैसा स्वाभाविक अनुभव मिल सके।



















