बिहार की राजधानी पटना के अनीसाबाद इलाके से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो खेल के प्रति अटूट समर्पण और पिता के बेमिसाल सहयोग को दर्शाती है। महज पांच साल की उम्र में जहां बच्चे प्राथमिक तौर पर खेल-कूद और सामान्य स्कूली गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, वहीं आन्या नाम की यह छोटी बच्ची क्रिकेट की पिच पर अपने शानदार भविष्य की नींव रख रही है। सुबह की पहली किरण निकलने के साथ ही आन्या के हाथों में बल्ला आ जाता है और देर रात तक उसकी दिनचर्या क्रिकेट के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है। इस नन्ही उम्र में वह रोजाना लगभग 500 गेंदों का सामना करती हैं और छह से सात घंटे तक कड़ा अभ्यास करती हैं। बेटी के इस असाधारण लगन को पंख देने के लिए उनके पिता ने अपने ही घर की छत पर अभ्यास की पूरी दुनिया बसा दी है।
कठिन और अनुशासित दिनचर्या जो पेशेवर खिलाड़ियों जैसी है
पहली कक्षा में पढ़ने वाली आन्या की जीवनशैली किसी भी स्थापित और पेशेवर क्रिकेटर से कम नहीं है। वह सुबह उठते ही सबसे पहले अपनी छत पर जाकर शारीरिक फिटनेस और व्यायाम का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह तैयार होकर स्कूल जाती हैं। स्कूल से लौटने के बाद वह कुछ समय के लिए विश्राम करती हैं और फिर से हाथ में बल्ला थामकर अपनी बल्लेबाजी को सुधारने में जुट जाती हैं।
दोपहर के बाद करीब तीन बजे से लेकर चार बजे तक आन्या के पिता चंदन सिंह खुद उन्हें गेंदबाजी करते हैं और आन्या उनकी गेंदों पर शॉट खेलने का अभ्यास करती हैं। इसके तुरंत बाद वह पास ही स्थित एक क्रिकेट एकेडमी में जाकर पेशेवर प्रशिक्षण हासिल करती हैं। वहां से शाम को करीब साढ़े छह बजे घर लौटने के बाद भी उनका अभ्यास का दौर थमता नहीं है। रात सात बजे से लेकर नौ बजे तक वह एक बार फिर अपने घर की छत पर बनी पिच पर एक अनुभवी ट्रेनर की निगरानी में नियमित अभ्यास में जुट जाती हैं।
मां की मन्नत और जन्म से पहले तय हुआ सपना
आन्या के पिता चंदन सिंह को खुद बचपन से क्रिकेट का जबरदस्त जुनून रहा है। वे वर्ष 1997 से ही लगातार क्रिकेट के खेल को बेहद बारीकी से देखते और फॉलो करते आ रहे हैं। इस अनोखे सफर की शुरुआत आन्या के जन्म से पहले ही हो गई थी। जब चंदन सिंह की पत्नी गर्भवती थीं, तब एक मैच देखने के दौरान उनकी मां यानी आन्या की दादी ने एक इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर उनके घर बेटी का जन्म होता है, तो वे उसे एक उत्कृष्ट क्रिकेटर बनाएंगे। यही बात चंदन सिंह के दिल में गहराई से उतर गई और घर की पहली संतान के रूप में आन्या के जन्म के बाद उन्होंने उसके भीतर बचपन से ही इस खेल के प्रति रुचि जगानी शुरू कर दी।
आज इस मेहनत का नतीजा यह है कि आन्या खेल के उपकरणों को बहुत ही सहजता से संभालती हैं। उन्होंने केवल साढ़े तीन साल की उम्र में पहली बार क्रिकेट का बल्ला पकड़ा था। इतनी छोटी सी उम्र में वे पूरी सुरक्षा किट जिसमें पैड, हेलमेट और ग्लव्स शामिल हैं, पहनकर खेलती हैं। वे केवल साधारण गेंद ही नहीं, बल्कि ड्यूज बॉल, सिंथेटिक बॉल और टेनिस बॉल जैसी तीनों श्रेणियों की गेंदों का बखूबी सामना करती हैं।
तीन मंजिला छत पर बना अनोखा मिनी क्रिकेट स्टेडियम
चंदन सिंह ने सुनिश्चित किया कि उनकी बेटी के निरंतर अभ्यास के मार्ग में कोई भी बाधा न आए। इसके लिए उन्होंने अपने तीन मंजिला मकान की छत का पूरी तरह कायाकल्प कर दिया और उसे एक बेहतरीन इनडोर ट्रेनिंग सेंटर के रूप में तब्दील कर दिया। उन्होंने छत पर एक पक्की सीमेंट की पिच का निर्माण करवाया। गेंद नीचे गली या पड़ोसी के घरों में न जाए, इसके लिए चारों तरफ मजबूत नेटिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही, रात के समय रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था के लिए फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं।
चिलचिलाती गर्मी और धूप से सुरक्षा के लिए छत के ऊपरी हिस्से पर सोलर पैनल लगाए गए हैं। इसके साथ ही हवा के प्रवाह और ठंडक बनाए रखने के लिए स्प्रिंकलर सिस्टम और स्टैंड फैन भी स्थापित किए गए हैं। समय और जरूरत के अनुसार चंदन सिंह इस मिनी स्टेडियम में नई तकनीकों और सुविधाओं को जोड़ते रहते हैं। उनका लक्ष्य है कि कम से कम दस साल की उम्र तक पहुंचने तक आन्या बिना किसी बाहरी बाधा या आने-जाने की समस्या के घर पर ही अपनी बल्लेबाजी को निखार सकें।
आर्थिक सीमाएं और पिता का असीम त्याग
चंदन सिंह एक बहुत ही साधारण छोटी दुकान चलाते हैं, लेकिन अपनी सीमित वित्तीय स्थिति के बावजूद वे आन्या के सपनों के आड़े किसी भी चीज को नहीं आने देते। वे अपनी मासिक कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा आन्या की क्रिकेट किट, ट्रेनिंग फीस और उनके पौष्टिक आहार पर खर्च करते हैं। उन्होंने आन्या के स्कूल प्रशासन से भी पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि बच्ची पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव न बनाया जाए।
उनका मानना है कि शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इस समय आन्या का पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट पर केंद्रित रहना चाहिए। चंदन सिंह सुबह आन्या को जगाने से लेकर, उन्हें समय पर भोजन कराने, मालिश करने और उनकी संतुलित डाइट का पूरा चार्ट खुद संभालते हैं। वे गर्व से कहते हैं कि वे केवल आन्या के पिता नहीं हैं, बल्कि उनके पहले सपोर्ट स्टाफ और मैनेजर भी हैं।
स्मृति मंधाना को मानती हैं अपना आदर्श
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की धुआंधार बल्लेबाज स्मृति मंधाना आन्या की सबसे पसंदीदा खिलाड़ी हैं। आन्या लगातार उनकी बल्लेबाजी की फुटेज देखती हैं और उनके जैसा खेलने की कोशिश करती हैं। आन्या का सबसे प्रिय और पसंदीदा शॉट पुल शॉट है, जिसे वे बहुत ही खूबसूरती से खेलती हैं। उनका अंतिम लक्ष्य एक दिन भारतीय राष्ट्रीय टीम की नीली जर्सी पहनना और वैश्विक मंच पर अपने देश का नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज कराना है। आन्या की आंखों में तैरता यह आत्मविश्वास देखकर हर किसी को विश्वास हो जाता है कि एक दिन यह सपना हकीकत में जरूर बदलेगा।













