श्रीलंका के खिलाफ गॉल में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान भारतीय टीम के स्टार खिलाड़ी रवींद्र जडेजा ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। मैच की पहली पारी में केशरा नुवांथा को आउट करते ही उन्होंने अपने टेस्ट करियर का 350वां विकेट झटका। इस खास सफलता के साथ ही उन्होंने भारतीय गेंदबाजी इतिहास के सबसे प्रतिष्ठित क्लब में अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारत के लिए टेस्ट फॉर्मेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड महान लेग स्पिनर अनिल कुंबले के नाम दर्ज है, जिन्होंने अपने शानदार करियर में कुल 619 शिकार किए थे।
भारत के सबसे सफल गेंदबाजों की सूची में शानदार एंट्री
अनिल कुंबले के बाद भारतीय टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट चटकाने वाले गेंदबाजों की फेहरिस्त में रविचंद्रन अश्विन का नाम आता है, जिन्होंने 537 विकेट हासिल किए हैं। उनके बाद पूर्व कप्तान कपिल देव के नाम 434 विकेट और हरभजन सिंह के नाम 417 विकेट दर्ज हैं। अब इस विशिष्ट सूची में 350 विकेट के आंकड़े के साथ रवींद्र जडेजा भी शामिल हो गए हैं। वह इस मुकाम तक पहुंचने वाले देश के पांचवें गेंदबाज बन चुके हैं। गेंदबाजी के मोर्चे पर यह उपलब्धि अपने आप में बेहद खास है, लेकिन इसका दायरा सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहता है।
दुनिया के चुनिंदा दिग्गजों की खास फेहरिस्त में शामिल
रवींद्र जडेजा की यह उपलब्धि इसलिए भी ज्यादा प्रभावशाली हो जाती है क्योंकि वह केवल गेंदबाजी के बलबूते इस मुकाम तक नहीं पहुंचे हैं। उनके टेस्ट करियर में 4000 से ज्यादा रन भी शामिल हैं। टेस्ट क्रिकेट के पूरे इतिहास में अब केवल चार ही ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 4000 से अधिक रन बनाने के साथ-साथ कम से कम 350 विकेट भी अपने नाम किए हैं। इस चुनिंदा सूची में कपिल देव (5248 रन और 434 विकेट), इयान बॉथम (5200 रन और 383 विकेट), डेनियल विटोरी (4531 रन और 362 विकेट) के साथ अब रवींद्र जडेजा (4095 रन और 351 विकेट) भी मजबूती से खड़े हैं। इस तरह उन्होंने दुनिया के महानतम ऑलराउंडर्स की इस खास कतार में अपना नाम दर्ज करा लिया है। इसके साथ ही, वह कपिल देव के बाद ऐसा कारनामा करने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं।
बाएं हाथ के स्पिनर्स के बीच दमदार रिकॉर्ड
केवल भारतीय गेंदबाजों की सूची में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजों के बीच भी रवींद्र जडेजा का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। टेस्ट इतिहास में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों की बात करें तो श्रीलंका के रंगना हेराथ 433 विकेट के साथ सबसे ऊपर विराजमान हैं। उनके ठीक बाद न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी का नंबर आता है जिनके नाम 362 विकेट हैं। अब 350 विकेट के आंकड़े को छूकर जडेजा इस वैश्विक सूची में तीसरे पायदान पर पहुंच गए हैं। उनके पीछे इंग्लैंड के डेरेक अंडरवुड के 297 विकेट और बांग्लादेश के तैजुल इस्लाम के 271 टेस्ट विकेट हैं। इस प्रकार उन्होंने खुद को बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाजी इतिहास के सबसे कामयाब खिलाड़ियों में शुमार कर लिया है।
शानदार स्ट्राइक रेट और निचले क्रम की बल्लेबाजी
रवींद्र जडेजा की गेंदबाजी का एक और बहुत मजबूत पहलू उनका स्ट्राइक रेट है। यदि कम से कम 125 टेस्ट विकेट लेने वाले बाएं हाथ के स्पिनरों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए, तो जडेजा का गेंदबाजी स्ट्राइक रेट 58.1 का है। इस मामले में उनके आगे केवल दक्षिण अफ्रीका के केशव महाराज हैं जिनका स्ट्राइक रेट 56.4 का है। इससे साफ जाहिर होता है कि जडेजा अपने लंबे करियर में सिर्फ रन रोकने वाले गेंदबाज की भूमिका तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने निरंतर अंतराल पर विकेट झटकने की अपनी अद्भुत क्षमता का भी खुलकर प्रदर्शन किया है।
4000 रन और 350 विकेट का डबल पूरा करना उनके संपूर्ण ऑलराउंड खेल की सबसे बड़ी पहचान है। जहां कपिल देव ने देश के लिए एक तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर की भूमिका निभाते हुए यह मुकाम हासिल किया था, वहीं जडेजा ने अपनी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी और उपयोगी बल्लेबाजी के दम पर इस शिखर को छुआ है। भारतीय टीम को जब भी निचले क्रम पर रनों की सख्त दरकार होती है, वह बल्ले से भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं। उन्होंने कई कठिन अवसरों पर लंबी पारियां खेलकर टीम को संकट से सुरक्षित बाहर निकाला है, जो उनके खेल को और अधिक मूल्यवान बनाता है।
लेफ्ट आर्म स्पिनर के रूप में ऐतिहासिक उपलब्धि
अपने 350वें टेस्ट शिकार के साथ ही जडेजा ने एक और अनोखा कारनामा कर दिखाया है। वह बतौर लेफ्ट आर्म स्पिनर भारत के लिए इस मुकाम तक पहुंचने वाले इतिहास के पहले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे पहले देश का कोई अन्य बाएं हाथ का स्पिनर 300 विकेट के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच पाया था। इस श्रेणी में उनके बाद दूसरे स्थान पर महान बिशन सिंह बेदी का नाम आता है जिन्होंने अपने करियर के दौरान 266 विकेट अपने नाम किए थे। इतने लंबे समय तक टेस्ट क्रिकेट के दोनों मुख्य विभागों में लगातार योगदान देना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान काम नहीं होता है।



















