इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता रिवियन से 2025 में अलग होकर स्वतंत्र इकाई बने माइक्रोमोबिलिटी स्टार्टअप ऑल्सो ने अफ्रीका में अपनी योजनाओं को समेट लिया है। कंपनी ने केन्या में चल रहे इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पायलट प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद इसे बंद करने का फैसला किया। इस कदम का मुख्य कारण संसाधनों को अपने प्रमुख कंज्यूमर उत्पादों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक साइकिल और छोटे स्वायत्त वाहनों के विकास पर केंद्रित करना है।
शेल फाउंडेशन का अनुदान और अफ्रीकी बाजार का दायरा
केन्या में संचालित इस पायलट पहल को ब्रिटिश तेल एवं गैस कंपनी शेल पीएलसी द्वारा स्थापित स्वतंत्र धर्मार्थ संस्था शेल फाउंडेशन से अनुदान प्राप्त हुआ था। फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट के एक पूर्व विवरण के अनुसार, इस साझेदारी का प्राथमिक लक्ष्य मॉड्यूलर बैटरी तकनीक और विकेंद्रीकृत चार्जिंग बुनियादी ढांचे के जरिए अफ्रीका के ईवी बाजार में वैश्विक वाहन निर्माताओं के प्रवेश के जोखिम को कम करना था। इस योजना के तहत अफ्रीकी चालकों की जरूरतों के अनुसार एक विशेष इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल तैयार करने और इस मॉडल को पूरे पूर्वी अफ्रीका में विस्तारित करने का लक्ष्य रखा गया था।
फाउंडेशन के अनुसार, इस अध्ययन का उद्देश्य चालकों की आय में वृद्धि की संभावना, परिचालन दक्षता और व्यावसायिक व्यवहार्यता से जुड़े ठोस आंकड़े जुटाना था। हालांकि, ऑल्सो के साथ हुए गैर-प्रकटीकरण समझौते का हवाला देते हुए इस प्रोजेक्ट से जुड़े विस्तृत आंकड़े साझा नहीं किए गए और बाद में इस परियोजना का ब्योरा वेबसाइट से हटा दिया गया। ऑल्सो ने स्पष्ट किया कि एक अनाम साझेदार के साथ शुरुआती चरण का काम पूरा करने के बाद कंपनी ने अपने मूल रोडमैप पर लौटने का निर्णय लिया, जबकि मिला हुआ अनुदान परियोजना के आगे के विकास में सहयोग के लिए जारी रहेगा।
अफ्रीका में दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का बढ़ता तंत्र
अफ्रीकी महाद्वीप में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, अफ्रीकी मोबिलिटी कंपनी स्पाइरो सात देशों में 1,30,000 से अधिक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें संचालित कर रही है और उसके पास 2,500 से ज्यादा बैटरी-स्वैपिंग स्टेशन मौजूद हैं। इस विशाल बाजार और बढ़ती संभावनाओं के कारण चीनी मोबिलिटी कंपनियां और वैश्विक निवेशक इस क्षेत्र में भारी संसाधन लगा रहे हैं। इसके बावजूद ऑल्सो ने इस तेजी से बढ़ते बाजार से हटने का रणनीतिक विकल्प चुना।
ऑटोनॉमस तकनीक और डोरडैश साझेदारी को तरजीह
कंपनी के अधिकारी यू के अनुसार, अन्य तकनीकी प्राथमिकताओं ने केन्या परियोजना की जगह ले ली। कंपनी का ध्यान इस समय छोटे ऑटोनॉमस डिलीवरी वाहनों के विकास पर है, जिसे वह डोरडैश के साथ साझेदारी के तहत तैयार कर रही है।
यू का मानना है कि बड़े यात्री वाहनों की तुलना में विशेष रूप से निर्मित छोटे डिलीवरी वाहनों में स्वायत्त तकनीक के पहले और व्यापक स्तर पर लागू होने की प्रबल संभावना है। इसी तात्कालिकता और तकनीकी गति को देखते हुए कंपनी ने अपने निकट भविष्य के सभी प्रयासों को ऑटोनॉमी पर केंद्रित करना आवश्यक समझा। इसके अलावा, कंपनी भविष्य में अमेज़न जैसी कंपनियों को चार पहिया मॉडल सहित वाणिज्यिक कार्गो साइकिल बेचने की भी तैयारी कर रही है, जो उसके लिए अधिक राजस्व के अवसर लेकर आ सकते हैं।
सप्लाई चेन की बाधाएं और टीएम-बी डिलीवरी में देरी
अफ्रीका प्रोजेक्ट से हटना ऑल्सो के लिए एक चुनौतीपूर्ण पहले वर्ष के बीच हुआ है। कंपनी को अपने पहले उपभोक्ता उत्पाद, प्रीमियम ई-बाइक टीएम-बी की डिलीवरी में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी गंभीर दिक्कतों के कारण बार-बार देरी का सामना करना पड़ा। इस स्थिति ने उन ग्राहकों को निराश किया जिन्होंने पहले से बुकिंग करा रखी थी। साल 2026 के अधिकांश हिस्से में कंपनी की ओर से समय पर स्पष्ट सूचना न मिलने के कारण भी असंतोष बढ़ा, जिसे प्रबंधन ने अपनी संवाद संबंधी चूक स्वीकार किया है।
यू ने स्वीकार किया कि गर्मियों के दौरान बुकिंग कराने वाले ग्राहकों को समय पर अपडेट देने में प्रबंधन से कमी रही। टीएम-बी की जटिलता को देखते हुए यू ने इसे पहियों पर चलता कंप्यूटर बताया। बाइक में हो रही देरी किसी एक कारण से नहीं थी, बल्कि लगभग हर हफ्ते नई परिचालन बाधाएं खड़ी हो रही थीं। एक समय कंपनी को एआई डेटा सेंटरों के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रिंटेड सर्किट बोर्ड के कच्चे माल के लिए बाजार में मुकाबला करना पड़ा। इसके अतिरिक्त विभिन्न सरकारी एजेंसियों से प्रमाणपत्र और अनुपालन प्रक्रियाएं पूरी करने में भी काफी समय बीता।
अक्टूबर में डिलीवरी की शुरुआत और आगे की चुनौतियां
लगातार बाधाओं को सुलझाते हुए कंपनी ने अक्टूबर की शुरुआत में पहली खेप ग्राहकों तक पहुंचाना शुरू किया। प्रारंभिक खरीदारों की ओर से कुछ शुरुआती तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं, जिनमें डिलीवरी के दौरान हुई क्षति और बैटरी की खपत से जुड़ी शिकायतें शामिल हैं। हालांकि, कंपनी ने अपने संवाद में सुधार किया है, जिससे ग्राहकों के साथ विश्वास बहाल करने में मदद मिल रही है। नए तकनीकी उत्पादों की शुरुआती कमियों को दूर करना और अपने तय रोडमैप पर आगे बढ़ना अब ऑल्सो की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।


















