त्योहारी सीजन में घरों को सजाने और रोशन करने के लिए पारंपारिक मोमबत्तियों की मांग हमेशा रहती है, लेकिन बाजार में आमतौर पर एक ही ढर्रे के डिजाइन देखने को मिलते हैं। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले के फूलपुर इलाके की निवासी अदिति मौर्य ने इसी पारंपरिक उत्पाद को एक बिल्कुल नया और कलात्मक रूप देने का फैसला किया। उन्होंने सामान्य सफेद या सादी मोमबत्तियों के बजाय फूलों और पशु-पक्षियों के सुंदर आकारों वाली सजावटी मोमबत्तियां बनाकर अपने उद्यम की नींव रखी है।
प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में आयोजित दिवाली शिल्प मेले में उनका स्टॉल खरीदारों के बीच आकर्षण का बड़ा केंद्र बना। यहां आने वाले लोग मोमबत्तियों के अनोखे सांचों और उनकी फिनिशिंग को देखकर रुकने पर मजबूर हो रहे हैं। अदिति ने रोजमर्रा के एक सामान्य उत्पाद में अपनी कलात्मक सोच जोड़कर यह साबित किया है कि पारंपरिक वस्तुओं को भी समकालीन बाजार के अनुकूल बनाया जा सकता है।
साबुन के डिजाइनों से मिली नई सोच की प्रेरणा
अदिति मौर्य के मन में इस स्टार्टअप की योजना किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि अपनी निजी समझ और बाजार की स्थिति को देखकर आई। उन्होंने महसूस किया कि बाजार में ज्यादातर मोमबत्तियां बेलनाकार या सामान्य सांचों में ही बेची जाती हैं। उनमें कोई खास नयापन या दृश्य आकर्षण नहीं होता था। ऐसे में उनके दिमाग में विचार आया कि अगर मोमबत्तियों में थोड़ी कारीगरी और विविधता जोड़ी जाए, तो वे सिर्फ रोशनी का जरिया न रहकर बेहतरीन सजावटी सामान भी बन सकती हैं।
उन्हें इस तरह के प्रयोग की मुख्य प्रेरणा बाजार में बिकने वाले अलग-अलग फैंसी डिजाइनों के साबुनों से मिली। तरह-तरह के सांचों में तैयार होने वाले साबुनों को देखकर अदिति ने सोचा कि यही तकनीक मोमबत्ती निर्माण में भी अपनाई जा सकती है। इसके बाद उन्होंने मोमबत्तियों को फूलों और अन्य खूबसूरत आकारों में ढालने के लिए सांचे और आवश्यक सामग्री जुटाना शुरू किया।
फूलों से लेकर कार्टून आकृतियों तक 25 से अधिक वैरायटी
शुरुआती प्रयोगों के बाद अदिति ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो का तेजी से विस्तार किया। वर्तमान में उनके संग्रह में 25 से अधिक अलग-अलग वैरायटी की मोमबत्तियां शामिल हैं। इनमें प्रकृति से प्रेरित डिजाइनों में कमल, गुलाब और सूरजमुखी जैसे सुंदर फूलों के आकार प्रमुख हैं। इसके अलावा युवाओं और बच्चों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पांडा, उल्लू, बुलबुले और टेडी बियर जैसे आधुनिक सांचों में भी मोमबत्तियां तैयार की हैं।
इन मोमबत्तियों की खासियत केवल रोशनी देना नहीं है, बल्कि इनका उपयोग इंटीरियर डेकोरेशन और आकर्षक उपहार के तौर पर भी किया जा सकता है। जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी विशेष पारिवारिक उत्सव पर इन्हें तोहफे के रूप में दिया जा रहा है। अलग-अलग खुशबुओं वाली सेंटेड कैंडल्स की रेंज होने के कारण जलाने पर ये कमरे को सुगंधित भी कर देती हैं।
सोया वैक्स का उपयोग और किफायती मूल्य निर्धारण
उत्पाद की गुणवत्ता मजबूत बनाए रखने के लिए अदिति साधारण पैराफिन की जगह सोया वैक्स का इस्तेमाल करती हैं। सोया वैक्स को एक प्रीमियम वैक्स माना जाता है, जिससे तैयार मोमबत्तियां धीमी गति से जलती हैं और लंबे समय तक रोशनी देती हैं। गुणवत्ता के साथ-साथ उन्होंने अपनी मूल्य सूची को भी ग्राहकों की पहुंच के भीतर रखा है ताकि हर वर्ग के लोग इन्हें खरीद सकें।
उनके स्टॉल पर छोटे फूलों के आकार वाली मोमबत्तियों की शुरुआती कीमत 60 रुपये रखी गई है, जबकि कुछ अन्य सामान्य डिजाइनों के दाम 80 रुपये हैं। गुलाब के बारीक आकार वाली मोमबत्ती 200 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं उनके संग्रह में मौजूद खास प्रीमियम डिजाइनों की कीमत 300 रुपये तक तय की गई है। इस तरह अलग-अलग बजट वाले खरीदारों के लिए विभिन्न विकल्प मौजूद हैं।
20 हजार के शुरुआती बजट से ऑनलाइन और ऑफलाइन विस्तार
अदिति मौर्य ने जब इस काम को शुरू करने की रूपरेखा बनाई थी, तब उन्होंने प्राथमिक निवेश के तौर पर करीब 20 हजार रुपये का बजट निर्धारित किया था। हालांकि, काम आगे बढ़ने, नए मोल्ड्स खरीदने और डिजाइनों की वैरायटी बढ़ाने के चलते कुल पूंजी निवेश बढ़कर अब लगभग 50 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। इस पूरे उद्यम को शुरू हुए अभी केवल तीन से चार महीने का समय बीता है, लेकिन इतने कम समय में ही उनके उत्पादों को अच्छी मांग मिलने लगी है।
वर्तमान में उनके उत्पाद विभिन्न माध्यमों से टियर-2 और टियर-3 शहरों के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। बड़े टियर-1 शहरों में उपभोक्ता उनकी मोमबत्तियों को ऑनलाइन माध्यम से ऑर्डर कर रहे हैं। हालांकि उनका यह काम अभी अंतरराष्ट्रीय स्तर या विदेशों तक नहीं पहुंचा है, लेकिन वह चरणबद्ध तरीके से अपने दायरे को बढ़ाते हुए देश के हर कोने तक उत्पाद पहुंचाने के प्रयास में जुटी हैं। फूलपुर से शुरू हुआ यह रचनात्मक प्रयास दिखाता है कि नवाचार के दम पर पारंपरिक काम को भी नई दिशा दी जा सकती है।



















