स्टार्टअप्स की दुनिया में एआई टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन वाई कॉम्बिनेटर के सीईओ गैरी टैन इसे एक अलग ही स्तर पर ले जा चुके हैं। वह अपने तकनीकी प्रयोगों और एआई एजेंट्स के साथ काम करने को लेकर इतने ज्यादा उत्साहित रहते हैं कि कभी-कभी रात भर सो भी नहीं पाते। इस अत्यधिक जुड़ाव को उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में 'साइबर साइकोसिस' का नाम दिया था। अब वाल्टर इसाकसन के पॉडकास्ट द बिल्डर्स के एक एपिसोड में उन्होंने खुलासा किया है कि इस डिजिटल जुनून के लिए वह कितना बड़ा वित्तीय बजट खर्च करते हैं।
गैरी टैन ने बातचीत के दौरान बताया कि वह एआई टोकन्स पर हर साल लगभग 100,000 डॉलर से लेकर 200,000 डॉलर तक खर्च कर देते हैं। भारतीय मुद्रा में देखा जाए तो यह रकम करोड़ों रुपये बैठती है। वह इन ऑटोनॉमस एजेंट्स का इस्तेमाल केवल साधारण सवालों के जवाब ढूंढने के लिए नहीं करते, बल्कि बड़े कोडिंग प्रोजेक्ट्स और रोजमर्रा के जटिल कामकाज को पूरा करने के लिए भी लगातार करते हैं। तकनीक के प्रति अपनी इसी समझ को दूसरों तक पहुंचाने के मकसद से उन्होंने क्लॉड कोड की 23 स्किल्स का एक पूरा सेट तैयार किया है, जिसे जीस्टैक नाम दिया गया है और इसे गिटहब पर सबके लिए मुफ्त में साझा किया गया है।
निजी जिंदगी और 20 साल के रिकॉर्ड्स तक एजेंट की पहुंच
अक्सर लोग एआई का इस्तेमाल सामान्य रिसर्च या इंटरव्यू की तैयारी के लिए करते हैं। गैरी टैन भी पॉडकास्ट की तैयारी और संभावित सवालों का अनुमान लगाने के लिए इसका सहारा लेते हैं, लेकिन उनकी निर्भरता इससे कहीं आगे की है। उनका एजेंट उनकी पूरी निजी जिंदगी और कामकाज को संभालने में मदद करता है। इस सिस्टम को उनके पूरे डेटाबेस का एक्सेस दिया गया है।
गैरी टैन के मुताबिक, उनके इस एआई सिस्टम ने उनके सभी ईमेल, ड्रॉपबॉक्स की फाइलें, एप्पल नोट्स और यहां तक कि पिछले 20 सालों के थेरेपी नोट्स तक पढ़ रखे हैं। उनका मानना है कि एक पर्सनल एआई एजेंट को हर समय साथ रहने वाले एक समझदार साथी की तरह होना चाहिए। यह एजेंट यूजर की पसंद, नापसंद और काम करने के तरीके को गहराई से समझता है। यह न सिर्फ सामने आने वाले कामों में हाथ बंटाता है बल्कि पहले से सोचकर यह भी सुझाव देता है कि आगे क्या कदम उठाया जाना चाहिए।
पारंपरिक सॉफ्टवेयर की तरह न देखें एजेंट्स को
शुरुआती ओपनक्लॉ अपनाने वाले और अब इसके पावर यूजर बन चुके गैरी टैन का मानना है कि लोगों को एआई एजेंट्स को पुराने सॉफ्टवेयर की नजर से देखना बंद करना चाहिए। उनके अनुसार कई डेवलपर्स और कंपनियां सुरक्षा और बार-बार एक जैसे नतीजे पाने की चिंता में इतना उलझ जाती हैं कि वे एआई की इंसानी समझ जैसी खूबियों का पूरा फायदा नहीं उठा पाती हैं।
इस विजन को वाई कॉम्बिनेटर के दैनिक कामकाज में भी लागू किया जा रहा है। वहां 'स्ट्रे लाइट' नाम का एक इंटरनल एआई एजेंट काम कर रहा है, जिसके पास अपना एक खास व्यक्तित्व और कंपनी का पूरा संस्थागत ज्ञान मौजूद है। इस सिस्टम में वाई कॉम्बिनेटर द्वारा आज तक फंड किए गए हर फाउंडर का संदर्भ, आने वाले सभी आवेदन और भेजे गए सभी ईमेल्स का पूरा डेटा दर्ज है, जिससे यह संस्थान के काम करने के तौर-तरीकों को नए सिरे से गढ़ रहा है।
लागत कम होना जरूरी, बिग टेक पर निर्भरता का डर
सिलिकॉन वैली के सबसे प्रमुख स्टार्टअप एक्सेलरेटर का नेतृत्व करने वाले गैरी टैन को पूरा भरोसा है कि आने वाले समय में पर्सनल एआई एजेंट्स हर आम इंसान की जिंदगी का हिस्सा बनेंगे। हालांकि, इसके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा भारी लागत का होना है। उन्होंने स्पष्ट स्वीकार किया कि टोकन्स पर सालाना लाखों डॉलर खर्च कर पाना एक ऐसा बड़ा विशेषाधिकार है जो हर किसी के पास नहीं हो सकता। जब तक कंप्यूट और टोकन के दाम काफी नीचे नहीं आते, तब तक यह तकनीक हर हाथ तक नहीं पहुंच सकती।
इसके साथ ही वह बिग टेक कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले मुफ्त एआई टूल्स को लेकर भी सतर्क करते हैं। सोशल मीडिया के दौर में मेटा जैसी दिग्गज कंपनियों के एल्गोरिदम ने लोगों के जीवन पर गहरा असर डाला है, जहां यूजर का उस एल्गोरिदम पर कोई नियंत्रण नहीं रहता। गैरी टैन का मानना है कि भविष्य ऐसा होना चाहिए जहां हर व्यक्ति का अपना एक निजी एआई हो, जिसे वह खुद अपनी शर्तों पर प्रोग्राम कर सके और पूरी तरह नियंत्रित कर सके, न कि कोई टेक कंपनी उसे अपनी मर्जी से चलाए।



















