असम में बाढ़ का कहर झेल रहे लोगों की स्थिति बेहद दर्दनाक बनी हुई है, जहां कई परिवार अपना सब कुछ गंवाकर पाई-पाई को मोहताज हो गए हैं. ऐसी कठिन घड़ी में सोनितपुर जिले के मजरौमारी गांव की रहने वाली 103 साल की कनकलता दास ने इंसानियत और करुणा का एक अद्भुत उदाहरण पेश किया है. जीवन भर एक-एक पैसा जोड़कर बनाई गई अपनी पूरी जमा पूंजी कनकलता दास ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए दान कर दी है. उनकी इस निस्वार्थ मदद की खबर सामने आते ही हर किसी की आंखें नम हो गई हैं और लोग उनके इस सेवा भाव को नमन कर रहे हैं.
बाढ़ पीड़ितों का दुख देखकर पसीजा दिल
असम के कई इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. विशेष रूप से शिवसागर जिले के अमगुड़ी गार्डन क्षेत्र में हालात काफी गंभीर हो गए, जहां पानी में कई घर पूरी तरह डूब गए. बाढ़ के पानी में लोगों की जीवनभर की कमाई, तैयार फसलें और घर-गृहस्थी का सामान बह गया. जब 103 वर्षीय कनकलता दास को अमगुड़ी गार्डन इलाके के बाढ़ पीड़ितों के संकट और उनकी लाचारी का पता चला, तो उनका दिल पसीज गया. बेघर और बेबस हुए परिवारों का दर्द उनसे देखा नहीं गया और उन्होंने अपनी क्षमता अनुसार आगे बढ़कर सहारा देने का संकल्प लिया.
जीवनभर की जमा पूंजी लेकर जिला कमिश्नर के पास पहुंचीं
बाढ़ प्रभावितों को सहारा देने की सोच के साथ कनकलता दास अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा लेकर खुद शिवसागर के जिला कमिश्नर के पास पहुंचीं. उन्होंने यह राशि बाढ़ राहत कार्य के लिए अधिकारियों को सौंप दी. इस वित्तीय सहायता की मदद से अमगुड़ी क्षेत्र के 77 प्रभावित परिवारों में से प्रत्येक को 2 हजार रुपये की नकद सहायता प्रदान की जा रही है. 103 वर्ष की आयु में इस प्रकार का कदम उठाने पर जिला कमिश्नर ने स्वयं उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और उनके प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया.
जिला कमिश्नर का भावुक संदेश और समाज पर असर
शिवसागर के जिला कमिश्नर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस महान कार्य की जानकारी साझा की. उन्होंने लिखा कि मानवता की मिसाल देखने के लिए कनकलता जी के जीवन को देखना चाहिए, क्योंकि करुणा और सेवा के सामने उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है. कनकलता दास के इस पावन दान की खबर जंगल की आग की तरह आसपास के क्षेत्रों में फैल गई. उनसे प्रेरणा लेकर पास के गांवों के निवासियों और कई सामाजिक संगठनों ने भी खुले दिल से राहत कोष में दान देना और प्रभावितों की मदद करना शुरू कर दिया है.
उम्र नहीं, दिल की करुणा मायने रखती है
अपने इस महान कदम पर बात करते हुए कनकलता दास ने कहा कि दूसरों की सेवा और सहायता करना उन्होंने हमेशा से अपना परम कर्तव्य माना है. बाढ़ से बेघर हुए लोगों और बिलखते परिवारों की तकलीफ सुनकर वे चुपचाप नहीं बैठ सकती थीं. उन्होंने साबित कर दिया कि यदि मन में सेवा और दया का भाव हो, तो बढ़ती उम्र कभी बाधा नहीं बन सकती. यद्यपि असम प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, कपड़े और रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रबंध कर रहा है, लेकिन 103 वर्ष की बुजुर्ग महिला का यह प्रयास पूरे प्रदेश में चर्चा और प्रेरणा का केंद्र बना हुआ है.



















