ग्रामीण भारत में महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर कई चुनौतियां सामने आती रहती हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से स्वावलंबन की एक प्रेरणादायक तस्वीर उभरी है। जिले की मोहम्मदी तहसील के अंतर्गत आने वाले मियांपुर गांव में रहने वाली बंगाली समुदाय की महिलाएं अब घर के कामकाज और पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालते हुए अपनी आय का जरिया बना चुकी हैं। रोजगार की तलाश में बाहर जाने की मजबूरी के बिना ये महिलाएं अपने खाली समय का बेहतर इस्तेमाल बीड़ी निर्माण कार्य में कर रही हैं। इस पहल से न केवल उनके परिवारों को मजबूती मिल रही है, बल्कि गांव की महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
घरेलू जिम्मेदारियों के बीच घर पर ही काम मिलने का मिला विकल्प
मियांपुर गांव में कई बंगाली परिवारों की महिलाएं अपने घरेलू काम निपटाने के बाद बीड़ी तैयार करने का काम करती हैं। इस व्यवस्था के तहत बाहर से आने वाले आपूर्तिकर्ता महिलाओं को बीड़ी बनाने के लिए आवश्यक कच्चा माल सीधे उनके घरों तक पहुंचा देते हैं। इसके बाद महिलाएं अपनी सुविधा और उपलब्ध समय के अनुसार घर बैठकर बीड़ी तैयार करती हैं। काम पूरा होने पर तैयार बीड़ी संबंधित लोगों को सौंप दी जाती है और तैयार किए गए माल के आधार पर महिलाओं को भुगतान कर दिया जाता है।
स्थानीय निवासी दीपा, जो बंगाली समुदाय से ताल्लुक रखती हैं, बताती हैं कि पहले उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन नहीं था। घर की जिम्मेदारियों और बच्चों की देखभाल के कारण रोजाना काम की तलाश में बाहर जाना भी आसान नहीं था। ऐसे में घर बैठे बीड़ी बनाने का अवसर मिलने से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। अब वे अपने परिवार की वित्तीय जरूरतों में सीधे तौर पर सहयोग कर पा रही हैं।
1000 बीड़ी पर 180 रुपये की दर और उत्पादन क्षमता
काम के हिसाब से मिलने वाले पारिश्रमिक का ब्यौरा देते हुए दीपा ने बताया कि 1000 बीड़ी तैयार करने पर करीब 180 रुपये का भुगतान किया जाता है। चूंकि सामग्री घर पर ही मिल जाती है, इसलिए महिलाओं को किसी दुकान या कारखाने में जाकर काम करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे घर के दूसरे जरूरी कामों, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की देखभाल के साथ खाली बचे समय का उपयोग कमाई के लिए कर रही हैं।
कार्य कुशलता के संबंध में दीपा का कहना है कि एक घंटे की मेहनत में लगभग 200 बीड़ी आसानी से तैयार की जा सकती हैं। इस तरह गांव की महिलाएं अपनी व्यक्तिगत क्षमता और दिनभर में उपलब्ध समय के अनुसार बीड़ी बनाकर प्रतिदिन अपनी आय अर्जित कर लेती हैं। काम का समय पूरी तरह लचीला होने के कारण यह जरिया उनके लिए बहुत सुविधाजनक साबित हो रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की नई दिशा
मियांपुर की महिलाओं के लिए यह काम केवल दैनिक आमदनी का साधन भर नहीं है, बल्कि यह उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बन गया है। पहले जहां महिलाएं केवल चारदीवारी तक सीमित थीं और वित्तीय जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहती थीं, वहीं अब वे अपनी मेहनत और कौशल के दम पर परिवार के बजट में योगदान दे रही हैं।
गांव की महिलाओं का मानना है कि यदि ग्रामीण इलाकों में इसी तरह के अन्य कुटीर और घर आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं, तो बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं अपनी आमदनी बढ़ा सकती हैं। इससे न केवल महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक स्तर सुधरेगा, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को भी संबल मिलेगा।



















