कभी-कभी एक छोटा सा आइडिया और उस पर डटे रहने का जुनून किस्मत का पूरा रुख बदल देता है। राजस्थान के कोटा के रहने वाले युवा उद्यमी चिदात्मन जैन की कहानी इसी बात की मिसाल है। महज 30 हजार रुपये की पूंजी से उन्होंने जो छोटा सा स्टार्टअप शुरू किया था, वह आज 2 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। उनका बनाया 'मस्का' (माska जैसी नहीं, बल्कि) ब्रांड न सिर्फ बाजार में जगह बना चुका है, बल्कि 21 स्थानीय महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार देकर कई परिवारों की जिंदगी संवार रहा है।
इस पूरी कहानी की शुरुआत मुंबई से हुई। चिदात्मन जब वहां रह रहे थे, तब उनका रुझान हेल्थ और न्यूट्रिशन की तरफ बढ़ने लगा। देश में फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर बढ़ती जागरूकता को उन्होंने नजदीक से महसूस किया और पीनट बटर के बाजार को गहराई से समझना शुरू किया। बाजार में मौजूद बड़े-बड़े ब्रांड्स के प्रोडक्ट खंगालने पर उन्हें एक बात साफ नजर आई, कि ज्यादातर कंपनियां अपने पीनट बटर में पाम ऑयल का जमकर इस्तेमाल करती हैं। उनके मन में सवाल उठा, कि जब कोई इंसान सेहत के लिए पीनट बटर खरीद रहा है, तो उसे शुद्ध, प्राकृतिक और बेहतर क्वालिटी वाला हेल्दी विकल्प क्यों न मिले।
रिसर्च और 30 हजार की पूंजी से रखी बुनियाद
यहीं से एक नए बिजनेस का बीज पड़ा। चिदात्मन ने कई महीनों तक ग्राउंड लेवल पर लगातार मार्केट रिसर्च की और ग्राहकों की असल जरूरतों को समझा। इसके बाद उन्होंने बिना पाम ऑयल वाला पूरी तरह शुद्ध पीनट बटर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। अपनी पुरानी सेविंग्स में से सिर्फ 30 हजार रुपये निकालकर उन्होंने कोटा में एक छोटी सी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई और प्रोडक्शन शुरू कर दिया। शुरुआती दिन आसान नहीं थे। पहले साल कंपनी का कुल रेवेन्यू सिर्फ ढाई लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और प्रोडक्ट की क्वालिटी पर अपना फोकस बनाए रखा।
दूसरे साल ही 2 करोड़ की छलांग
लगातार मेहनत और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे का असर दूसरे ही साल दिखने लगा, जब कंपनी का टर्नओवर सीधे 2 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आज 'मस्का' ब्रांड के तहत सिर्फ पीनट बटर ही नहीं, बल्कि आलमंड बटर, चॉकलेट बटर और कई तरह के हेल्दी स्प्रेड्स भी तैयार हो रहे हैं। इन सभी प्रोडक्ट्स में प्रीमियम रोस्टेड मूंगफली, सेंधा नमक और चीनी की जगह ऑर्गेनिक गुड़ जैसी नेचुरल सामग्री इस्तेमाल की जाती है, ताकि स्वाद के साथ शरीर को पूरा पोषण भी मिलता रहे।
स्थानीय किसानों और महिलाओं को सीधा फायदा
चिदात्मन बताते हैं कि राजस्थान के हाड़ौती इलाके में अच्छी क्वालिटी की मूंगफली भरपूर मात्रा में पैदा होती है। उनका मानना है कि वैल्यू एडिशन यानी मूल्य संवर्धन के जरिए स्थानीय किसानों की उपज को बेहतर बाजार दिलाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने स्थानीय संसाधनों को आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से जोड़कर एक मजबूत बिजनेस मॉडल खड़ा किया।
आज उनकी यूनिट में 21 महिलाएं पूरी लगन से काम कर रही हैं और आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। चिदात्मन कहते हैं कि किसी भी क्षेत्र में कामयाबी पाने के लिए सबसे पहले उस काम में गहरी दिलचस्पी पैदा करना जरूरी है। जब यही दिलचस्पी जुनून में बदल जाती है और उसमें कड़ी मेहनत जुड़ जाती है, तो सफलता खुद रास्ता बना लेती है। 30 हजार रुपये से शुरू हुई यह कहानी 2 करोड़ के मुकाम पर पहुंचकर साबित करती है, कि बड़ा कारोबार खड़ा करने के लिए बड़ी पूंजी नहीं, बल्कि एक बड़ा विजन सबसे ज्यादा मायने रखता है।













