छत्तीसगढ़ में एक पटवारी के डिप्टी कलेक्टर बनने तक के करीब 29 साल के सफर ने साबित कर दिया है कि धैर्य और मेहनत से मंजिल कभी दूर नहीं होती. बालोद जिले में तहसीलदार के तौर पर सेवाएं दे चुके आशुतोष शर्मा अब डिप्टी कलेक्टर बन गए हैं और उनकी कहानी संघर्ष और लगन की मिसाल बन गई है.
शहडोल से पखांजुर तक का सफर
आशुतोष शर्मा का पैतृक गांव मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में है. उनके पिता की नौकरी छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में लगी थी, जिसके चलते पूरा परिवार पखांजुर में जा बसा. आशुतोष की शुरुआती पढ़ाई पखांजुर और कांकेर में हुई. वे उस दौर में बीएससी प्रीवियस की पढ़ाई कर रहे थे, जब पटवारी पद के लिए उनका चयन हो गया.
21 साल की उम्र में मिली पहली सरकारी नौकरी
चयन के बाद आशुतोष ने बीएससी फाइनल ईयर पूरा किए बिना ही पटवारी प्रशिक्षण जॉइन कर लिया. प्रशिक्षण खत्म होने के महज पांच महीने बाद ही उन्हें नौकरी मिल गई. बीएससी फाइनल की पढ़ाई उन्होंने बाद में प्राइवेट तौर पर पूरी की. महज 21 साल की उम्र में सरकारी नौकरी हासिल करना उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी. कई लोगों ने उन्हें नौकरी छोड़कर आगे पढ़ाई करने की सलाह भी दी, लेकिन उस दौर में बेरोजगारी के हालात को देखते हुए उन्होंने नौकरी में बने रहना ही सही समझा. दिसंबर 1996 से जून 2015 तक वे पटवारी पद पर रहे. उनकी पहली पोस्टिंग भानुप्रतापपुर तहसील के दुर्गुकोंदल उप तहसील में हुई थी.
पीएससी में बार-बार असफलता, फिर आया टर्निंग पॉइंट
नौकरी के साथ-साथ आशुतोष लगातार पीएससी की तैयारी भी करते रहे. साल 1998 में उन्होंने पहली बार पीएससी परीक्षा दी थी. इसके बाद के सालों में वे कई बार प्रारंभिक परीक्षा तो पास कर लेते, लेकिन मुख्य परीक्षा में सफलता उनसे दूर ही रहती. नौकरी, परिवार और घर की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालना आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी. साल 2014 में राजस्व विभाग की एक सीमित विभागीय परीक्षा उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुई. यह मौका सिर्फ उन कर्मचारियों को मिलता था, जिन्होंने पांच साल की नौकरी और ग्रेजुएशन दोनों पूरे कर लिए हों. आशुतोष शर्मा इस परीक्षा में सफल रहे और नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नत हुए. इसके बाद उन्होंने माकड़ी, नारायणपुर, कोंडागांव, केशकाल और बालोद में अपनी सेवाएं दीं.
अब कबीरधाम में संभालेंगे नई जिम्मेदारी
अब आशुतोष शर्मा का प्रमोशन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो गया है और वे कबीरधाम जिले में अपनी नई जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. पटवारी से शुरू हुआ उनका यह सफर डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचने में करीब 29 साल का रहा. आशुतोष शर्मा युवाओं को संदेश देते हैं कि जिंदगी में कर्म और भाग्य दोनों का महत्व है. उनका मानना है कि मेहनत करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि सफलता चाहे देर से मिले, लेकिन मिलती जरूर है.













