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आर्थिक तंगी से जूझ रही आजमगढ़ की एसएससी अभ्यर्थी मेनका प्रजापति की मदद को आगे आए डीएम रवींद्र कुमारसक्सेस स्टोरी
3 सित॰ 2026, 1:50 pm (56 दिन पहले)· 2

आर्थिक तंगी से जूझ रही आजमगढ़ की एसएससी अभ्यर्थी मेनका प्रजापति की मदद को आगे आए डीएम रवींद्र कुमार

पिता की मौत के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रही आजमगढ़ की छात्रा मेनका प्रजापति को डीएम रवींद्र कुमार की पहल पर 1 लाख रुपये की वित्तीय सहायता और मुफ्त रोडवेज बस पास प्रदान किया गया है।

आजमगढ़ जिले के बुढ़नपुर तहसील क्षेत्र स्थित कानपुर फतेह गांव की रहने वाली मेनका प्रजापति के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। वर्ष 2005 में पिता का साया उठ जाने के बाद से परिवार गहरे आर्थिक संकट का सामना कर रहा था। सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार की गरीबी दूर करने का सपना देखने वाली मेनका की पढ़ाई पैसों की कमी के कारण रुकने के कगार पर पहुंच गई थी। हालांकि, आजमगढ़ के जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने इस छात्रा की परेशानी को समझते हुए मदद का हाथ बढ़ाया है। प्रशासन की पहल से न केवल मेनका को 1 लाख रुपये का चेक सौंपा गया है, बल्कि उनकी रोजाना की कोचिंग यात्रा के लिए नि:शुल्क बस पास का भी प्रबंध किया गया है।

पिता के निधन के बाद शुरू हुआ संघर्षपूर्ण सफर

मेनका प्रजापति के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब वर्ष 2005 में उनके पिता की अचानक मृत्यु हो गई। पिता के जाने से घर की वित्तीय स्थिति पूरी तरह डगमगा गई और परिवार के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया। ऐसी कठिन परिस्थितियों में परिवार की गाड़ी चलाने के लिए मां सरिता देवी ने दूसरों के घरों में बर्तन धोने और सफाई का काम शुरू किया। वहीं, मेनका के भाई ने परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी संभालते हुए ठेला चलाना शुरू किया ताकि घर का चूल्हा जलता रहे।

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इस तमाम मुश्किलों के बीच मेनका प्रजापति ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने परिवार को इस बदहाली से निकालने का संकल्प लिया और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सरकारी नौकरी पाने का सपना संजोया। मेनका का मानना था कि एक स्थायी सरकारी नौकरी ही उनके परिवार को स्थायी आर्थिक सुरक्षा दे सकती है।

60 किलोमीटर की दूरी और कोचिंग की फीस बनी बड़ी बाधा

अपनी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के सिलसिले में मेनका को रोजाना अपने गांव कानपुर फतेह से आजमगढ़ शहर आना पड़ता था। गांव से शहर की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है। हर दिन इतनी लंबी दूरी तय करके कोचिंग आने-जाने का बस किराया और कोचिंग संस्थान की मासिक फीस उठाना मेनका के गरीब परिवार के लिए असंभव साबित हो रहा था। घर की आय इतनी सीमित थी कि दैनिक राशन और बुनियादी जरूरतों के बाद पढ़ाई के लिए अतिरिक्त पैसे बचाना नामुमकिन था।

जब पैसों के अभाव के कारण पढ़ाई पूरी तरह ठप होने की नौबत आ गई, तो मेनका ने हार मानने के बजाय सीधे प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने का फैसला किया। वह आजमगढ़ कलेक्ट्रेट पहुंचीं और जिलाधिकारी रवींद्र कुमार से मिलकर अपनी पारिवारिक परिस्थितियों और पढ़ाई में आ रही वित्तीय समस्याओं के बारे में विस्तार से बताया।

जिलाधिकारी की त्वरित पहल से मिली 1 लाख रुपये की राहत

जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने मेनका प्रजापति की पारिवारिक स्थिति की पूरी जानकारी ली और पढ़ाई के प्रति उनकी लगन को देखा। छात्रा की लगन और संघर्ष को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत सहायता पहुंचाने का निर्णय लिया। उन्होंने सबसे पहले छात्रा की रोजाना की यात्रा की समस्या को हल करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (रोडवेज) के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरएम) अजय सिंह से बात की। आपसी समन्वय बनाकर मेनका के लिए रोडवेज बस का नि:शुल्क पास तैयार करवाया गया, जिससे उनका हर दिन का यातायात खर्च समाप्त हो गया।

इसके साथ ही, कोचिंग फीस और अध्ययन सामग्री की व्यवस्था के लिए जिलाधिकारी की विशेष पहल पर एक समाजसेवी के सहयोग से 1,00,000 रुपये (एक लाख रुपये) की आर्थिक सहायता राशि जुटाई गई। कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित एक संक्षिप्त कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने मेनका प्रजापति और उनकी मां सरिता देवी को बुलाकर 1 लाख रुपये का चेक औपचारिक रूप से प्रदान किया।

मदद पाकर भावुक हुआ परिवार और नया संकल्प लिया

जिलाधिकारी कार्यालय से 1 लाख रुपये की आर्थिक मदद की सूचना मिलने पर मेनका और उनकी मां सरिता देवी बेहद भावुक हो गईं। चेक प्राप्त करते समय दोनों की आंखें नम हो गईं। मेनका ने बताया कि जब पहली बार उन्हें फोन पर इस सहायता की जानकारी मिली तो उन्हें एक पल के लिए अपनी किस्मत पर विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उनके जैसे गरीब परिवार के लिए यह मदद एक बहुत बड़ा संबल बनकर आई है।

मेनका ने जिलाधिकारी रवींद्र कुमार, समाजसेवी और रोडवेज विभाग के अधिकारियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अब यातायात और फीस की चिंता दूर हो जाने के बाद वह पूरी निष्ठा और मेहनत से एसएससी परीक्षा की तैयारी करेंगी। मेनका का कहना है कि वह परीक्षा में सफलता हासिल करके अपने परिवार को गरीबी के जाल से बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी।

सवाल-जवाब

मेनका प्रजापति कौन हैं?
मेनका प्रजापति उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के बुढ़नपुर तहसील अंतर्गत कानपुर फतेह गांव की रहने वाली एक गरीब मेधावी छात्रा हैं, जो एसएससी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।
जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने मेनका की क्या मदद की?
डीएम रवींद्र कुमार ने मेनका की पढ़ाई जारी रखने के लिए 1 लाख रुपये का चेक सौंपा और रोडवेज बसों से 60 किलोमीटर की दैनिक यात्रा के लिए नि:शुल्क बस पास बनवाया।
मेनका की पढ़ाई में क्या आर्थिक बाधा आ रही थी?
पिता के निधन के बाद बेहद खराब आर्थिक स्थिति के कारण गांव से आजमगढ़ शहर तक रोजाना कोचिंग आने-जाने का खर्च और कोचिंग फीस उठाना परिवार के लिए नामुमकिन हो रहा था।
मेनका का परिवार गुजारा करने के लिए क्या काम करता है?
वर्ष 2005 में पिता की मौत के बाद मेनका की मां सरिता देवी दूसरों के घरों में बर्तन धोने का काम करती हैं और उनका भाई ठेला चलाकर घर चलाता है।
मेनका का मुख्य सपना क्या है?
मेनका का सपना एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा पास करके सरकारी नौकरी हासिल करना है ताकि वह अपने परिवार को गरीबी के जाल से बाहर निकाल सकें।
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