दृढ़ इच्छाशक्ति और सही दिशा में की गई मेहनत के सामने आर्थिक साधन कभी बाधा नहीं बनते हैं। इस बात को बिहार के मोहम्मद अयान ने सच कर दिखाया है, जिन्होंने देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक नीट यूजी में ऑल इंडिया रैंक 2695 प्राप्त की है। मोहम्मद अयान एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं और उनके पिता पेशे से दर्जी हैं। अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार पर बोझ न बनने के उद्देश्य से अयान ने खुद बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसके बावजूद उन्होंने अपनी एकाग्रता भंग नहीं होने दी और खुद को पूरी तरह डॉक्टर बनने के सपने के प्रति समर्पित रखा।
आर्थिक चुनौतियों के बीच पढ़ाई के प्रति गहरा लगाव
मोहम्मद अयान के लिए पारिवारिक परिस्थितियां काफी कठिन थीं, लेकिन उन्होंने कभी अपनी आर्थिक स्थिति को हार की वजह नहीं बनने दिया। जब भी पढ़ाई के दौरान उनका मन उदास होता या वे दबाव महसूस करते, तो वे समाज के उन जरूरतमंद बच्चों के बारे में सोचते थे जिनके पास किताबें और पेन खरीदने तक के साधन नहीं हैं। उनका मानना था कि अगर उन्हें पढ़ने का अवसर मिला है, तो उसका पूरी तरह से सदुपयोग किया जाना चाहिए। इस सोच ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी लगातार आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य की ओर केंद्रित रहने का हौसला दिया।
कोरोना महामारी में ऑनलाइन संसाधनों का सही उपयोग
महंगी ऑफलाइन कोचिंग कक्षाओं में दाखिला लेना अयान के परिवार के लिए संभव नहीं था। कोरोना महामारी के दौरान जब डिजिटल पढ़ाई के विकल्प सामने आए, तो अयान ने किफायती ऑनलाइन प्लेटफॉर्म PW का सहारा लिया। कक्षा 11वीं से ही उन्होंने ऑनलाइन मोड के जरिए अपनी तैयारी शुरू कर दी थी। अयान का मानना है कि यदि कोई छात्र अनुशासित होकर नियमित रूप से पढ़ाई करे, तो किसी भी बड़े शहर में जाकर महंगी कोचिंग की जरूरत नहीं पड़ती। वे हर दिन ऑनलाइन लेक्चर देखते थे, रोजाना मिलने वाले असाइनमेंट्स और DPP समय पर पूरे करते थे और नियमित टेस्ट श्रृंखला में भाग लेकर खुद का मूल्यांकन करते थे।
सुबह छह बजे से देर रात तक का अनुशासित शेड्यूल
अयान की दैनिक दिनचर्या बेहद अनुशासित और कठिन थी। वे सुबह 6 बजे सोकर उठते थे और सबसे पहले फिजिक्स विषय की पढ़ाई करते थे। इसके बाद वे बायोलॉजी और केमिस्ट्री के जटिल विषयों को समय देते थे। दोपहर का समय वे नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने के लिए आरक्षित रखते थे, जबकि शाम को पढ़े गए विषयों का रिवीजन करते थे। रात 6 बजे से लेकर 11 बजे तक वे लगातार ऑनलाइन क्लासेस से जुड़ते थे। जब वे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने जाते थे, तो अपने अध्ययन के समय की भरपाई देर रात तक जागकर करते थे। इस व्यस्त रूटीन के कारण वे दिन में केवल 4 से 5 घंटे ही सो पाते थे। मानसिक तनाव को दूर रखने के लिए वे अक्सर अकेले टहलना पसंद करते थे।
तीन घंटे के मॉक टेस्ट को ढाई घंटे में हल करने की रणनीति
परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए मोहम्मद अयान ने एक विशेष रणनीति तैयार की थी। वे अभ्यास के दौरान 3 घंटे के मॉक टेस्ट को केवल 2.5 घंटे में पूरा करने का लक्ष्य रखते थे। इस अभ्यास से उन्हें वास्तविक परीक्षा के दौरान समय का सही प्रबंधन करने और दबाव को आसानी से झेलने में बड़ी मदद मिली। हर टेस्ट के खत्म होने के बाद वे अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण करते थे। उन्होंने अपनी कमजोरियों और भूलों को नोट करने के लिए एक अलग नोटबुक बनाई थी, जिसका वे हर 10 से 15 दिनों में नियमित रूप से रिवीजन करते थे।
नीट अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
सफलता पाने के बाद मोहम्मद अयान ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को महत्वपूर्ण सलाह दी है। उनका कहना है कि अभ्यर्थियों को कभी भी अपनी तुलना दूसरों के साथ नहीं करनी चाहिए। आज के डिजिटल युग में ऑनलाइन शिक्षा ने गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री को बहुत सुलभ और सस्ता बना दिया है। हालांकि, कोई भी तकनीक या ऑनलाइन संसाधन आपकी अपनी कड़ी मेहनत की जगह नहीं ले सकता। यदि कोई छात्र लगातार प्रयास करता रहे और अपनी कमियों से सीखता रहे, तो उसे सफलता हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता।


















