कभी रोजगार की तलाश में परेशान रहने वाली उमरा आज खुद एक छोटी उद्यमी बन चुकी हैं। बहराइच के मोहल्ला नाजिरपुरा की रहने वाली उमरा ने न तो कोई बड़ी पूंजी लगाई और न ही घर से बाहर नौकरी ढूंढी। उन्होंने अपने मोबाइल और पति के भरोसे के दम पर घर की चारदीवारी के भीतर ही कमाई का रास्ता निकाल लिया। हेयर बैंड, क्लेचर और टियारा बनाकर वह अब इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन और स्थानीय बाजार में, दोनों जगह बिक्री कर रही हैं, और इसी मेहनत के दम पर उन्हें एक नई पहचान मिल रही है।
एक वीडियो से मिला बिजनेस का आइडिया
उमरा बताती हैं कि शुरुआत बेहद सामान्य तरीके से हुई। एक दिन वह घर पर बैठी यूं ही मोबाइल पर वीडियो देख रही थीं, तभी उनकी नजर एक ऐसे वीडियो पर पड़ी जिसमें हेयरबैंड और बालों में लगाने वाली दूसरी एक्सेसरीज बनाने की जानकारी दी गई थी। यहीं से उनके मन में सवाल उठा कि क्यों न यह हुनर खुद सीखकर घर से ही कारोबार शुरू किया जाए। TrendKia से बातचीत में उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और करीब 3 महीने तक लगातार वीडियो देख-देखकर क्लेचर, टियारा और हेयर बैंड जैसी चीजें बनाना सीखीं।
तीन से चार महीने में तैयार हुआ पूरा सेटअप
पूरा सेटअप खड़ा करने में उन्हें करीब 3 से 4 महीने लगे। उमरा बाजार से रॉ मैटेरियल खरीदकर लाती हैं और उसे अपने हाथों से तैयार प्रोडक्ट में बदल देती हैं। शुरुआत में सबसे बड़ी उलझन यही थी कि इन प्रोडक्ट को बेचा कैसे जाए। इसका हल निकालने के लिए उन्होंने अपनी बेटी के नाम से इंस्टाग्राम आईडी बनाई और एक ऑनलाइन साइट से भी जुड़ गईं। अब वह खुद वीडियो बनाकर पोस्ट करती हैं, जिस पर उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है।
हर रविवार बाजार में लगता है स्टॉल
ऑनलाइन बिक्री के साथ-साथ उमरा हर संडे अपने पति के साथ बहराइच शहर में स्टॉल भी लगाती हैं। यह स्टॉल शहर के मशहूर मेडिकल कॉलेज के पास स्थित चटोरी गली के नजदीक लगाया जाता है, जहां सीधे ग्राहकों तक उनके प्रोडक्ट पहुंचते हैं।
किफायती और टिकाऊ, इसलिए लोग कर रहे पसंद
उमरा का दावा है कि बाजार में बिकने वाले महंगे हैंडमेड हेयर बैंड्स के मुकाबले उनकी हेयर एक्सेसरीज ज्यादा टिकाऊ और किफायती हैं, और यही वजह है कि लोग इन्हें पसंद कर रहे हैं। इस पूरे सफर में उनके पति ने हर कदम पर साथ दिया है और लगातार आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया है। आज बहराइच की उमरा दूसरी महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बनकर उभर रही हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि महिलाओं को कभी हार नहीं माननी चाहिए और लगातार प्रयास करते रहना चाहिए, क्योंकि सफलता देर-सबेर जरूर मिलती है।













