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बहराइच में बाढ़ से बर्बाद हुई खेती तो दंपत्ति ने खोला फास्ट फूड स्टॉल, अब बच्चों के अच्छे स्कूल में दाखिले की तैयारीसक्सेस स्टोरी
15 अक्तू॰ 2026, 9:51 am (15 दिन पहले)· 4

बहराइच में बाढ़ से बर्बाद हुई खेती तो दंपत्ति ने खोला फास्ट फूड स्टॉल, अब बच्चों के अच्छे स्कूल में दाखिले की तैयारी

गांव में लगातार आने वाली बाढ़ और तंगी से परेशान होकर बहराइच के रमाशंकर और उनकी पत्नी चांदनी ने शहर में फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया, जिसकी आमदनी से अब परिवार संवर रहा है।

गांव में हर साल आने वाले सैलाब ने जब आजीविका का एकमात्र सहारा छीन लिया, तब बहराइच के एक ग्रामीण परिवार ने परिस्थितियों के सामने सिर झुकाने से साफ इनकार कर दिया। खेती बर्बाद होने और तंगहाली के बावजूद रमाशंकर और उनकी जीवनसंगिनी चांदनी ने अपने हौसले के दम पर जिंदगी की नई शुरुआत की है। गांव की बेबसी को पीछे छोड़ यह दंपत्ति बहराइच शहर पहुंचा और अपनी रसोई की कला को ही आजीविका का जरिया बना लिया। आज दोनों मिलकर शहर में एक लोकप्रिय फास्ट फूड स्टॉल चला रहे हैं, जहां हर रोज ग्राहकों की कतारें लगती हैं।

फसलों पर कुदरत की मार और बढ़ती जिम्मेदारियां

रमाशंकर पहले अपने गांव में ही रहकर पारंपरिक खेती-किसानी करते थे। परिवार का गुजारा उसी जमीन से होता था, लेकिन हर साल आने वाला बाढ़ का पानी उनकी लहलहाती फसलों को बहा ले जाता था। महीनों की खून-पसीने की मेहनत चंद दिनों में जलमग्न हो जाती थी और हाथ में केवल कर्ज और मायूसी बचती थी। शादी के बाद जैसे-जैसे परिवार का दायरा बढ़ा और बच्चों की शिक्षा-दीक्षा की जरूरतें सामने आईं, वैसे-वैसे आर्थिक संकट गहराने लगा। खेती के भरोसे बच्चों का पालन-पोषण करना और उन्हें बुनियादी सुविधाएं दिलाना नामुमकिन सा लगने लगा था।

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गांव की बेबसी छोड़ शहर में नया रास्ता तलाशने की पहल

संकट के उस दौर में पत्नी चांदनी ने आगे बढ़कर परिवार को संभाला। गांव में बैठकर किस्मत या बाढ़ को कोसते रहने के बजाय उन्होंने शहर का रुख करने और खुद का कारोबार खड़ा करने की ठोस सलाह दी। चांदनी का स्पष्ट मानना था कि खाली हाथ बैठने से हालात नहीं बदलेंगे, बल्कि मेहनत करके ही संतानों को बेहतर कल दिया जा सकता है। पत्नी के इस भरोसे और मजबूत इरादे ने रमाशंकर को भी नया साहस दिया और दोनों ने अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शहर में उद्यम शुरू करने का फैसला कर लिया।

मेडिकल कॉलेज के पास जमाया जायके का ठिकाना

बहराइच शहर पहुंचकर इस दंपत्ति ने शर्मा होटल के सामने और मेडिकल कॉलेज के निकट अपने छोटे से फास्ट फूड स्टॉल की नींव रखी। दोनों ने मिलकर काम का बंटवारा किया और स्टॉल पर विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन परोसना शुरू किया। इनके मेन्यू में खास तंदूरी चाय, मुंबईया वड़ा पाव, गरमा-गरम मैगी, मोमोज, पारंपरिक फरा और बन-मक्खन शामिल हैं। भोजन की शुद्धता, साफ-सफाई और लजीज स्वाद के चलते बहुत कम समय में यह ठिकाना आसपास के लोगों और छात्रों की पहली पसंद बन गया। आज दोनों कंधे से कंधा मिलाकर सुबह से शाम तक स्टॉल संभालते हैं और ग्राहकों की भारी भीड़ उनके स्वाद की गवाही देती है।

महिला सशक्तिकरण का संदेश और बेहतर भविष्य की उम्मीद

घर की चौखट लांघकर कारोबार संभालने वाली चांदनी आज क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका कहना है कि कठिनाइयों से घिरी महिलाओं को कभी नाउम्मीद नहीं होना चाहिए, क्योंकि जब कोई पूरे मन से परिश्रम करने आगे आता है तो रास्ते अपने आप खुलते चले जाते हैं। वर्तमान में स्टॉल से होने वाली दैनिक कमाई से घर का सारा खर्च आराम से चल रहा है। आर्थिक स्थिरता आने के बाद अब यह दंपत्ति अपने बच्चों का दाखिला किसी प्रतिष्ठित और अच्छे स्कूल में कराने की पूरी तैयारी कर रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी को तंगी का सामना न करना पड़े।

सवाल-जवाब

रमाशंकर और चांदनी कहां के रहने वाले हैं?
यह दंपत्ति उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले का रहने वाला है।
उन्हें गांव छोड़कर शहर में स्टॉल क्यों शुरू करना पड़ा?
गांव में हर साल आने वाली बाढ़ से उनकी फसलें बर्बाद हो जाती थीं और आर्थिक तंगी के कारण बच्चों की पढ़ाई की चिंता बढ़ रही थी।
शहर जाकर कारोबार करने की सलाह किसने दी थी?
रमाशंकर की पत्नी चांदनी ने गांव में बैठकर हालात को कोसने के बजाय शहर जाकर मेहनत करने और अपना काम शुरू करने का सुझाव दिया था।
बहराइच शहर में उनका फास्ट फूड स्टॉल कहां स्थित है?
उनका स्टॉल बहराइच शहर में शर्मा होटल के सामने और मेडिकल कॉलेज के बगल में स्थित है।
उनके फास्ट फूड स्टॉल पर कौन-कौन से व्यंजन मिलते हैं?
उनके स्टॉल पर तंदूरी चाय, वड़ा पाव, स्वादिष्ट मैगी, मोमोज, फरा और बन-मक्खन जैसी चीजें तैयार की जाती हैं।
स्टॉल से होने वाली कमाई का उपयोग परिवार किस काम के लिए कर रहा है?
स्टॉल की कमाई से घर का दैनिक खर्च आसानी से चल रहा है और दंपत्ति अपने बच्चों का अच्छे स्कूल में दाखिला कराने की तैयारी कर रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·14 दिन पहले

बाढ़ के बाद इन लोगों ने हिम्मत नहीं हारी, यह बात बहुत अच्छी लगी। क्या इन्होंने शहर में दुकान लगाने के लिए कोई लोन लिया था?

Sophie Laurent@sophie-laurent·14 दिन पहले

मुश्किल वक्त में हार न मानकर जिस तरह इस दंपत्ति ने नई शुरुआत की, वह वाक़ये बहुत हिम्मत देने वाला है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

बिल्कुल सही कहा सोफ़ी जी, चांदनी और रमाशंकर की यह जिद सच में बहुत कुछ सिखाती है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·14 दिन पहले

बाढ़ के बाद भी हिम्मत नहीं हारी इन्होंने। बहराइच जाकर वड़ा पाव और चाय का स्टॉल चलाना आसान नहीं होता, पर चांदनी और रमाशंकर ने साबित कर दिया कि मेहनत से सब बदल सकता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·14 दिन पहले

पूजा, बिल्कुल! उनके मेन्यू में 'फरा' होना मुझे बहुत दिलचस्प लगा, आमतौर पर ऐसे स्टॉल पर ये सब नहीं मिलता।

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