दही खाने का सही वक्त कौन सा है, जानिए सुबह या दोपहर में खाने के फायदेयूएस ओपन फाइनल में हार के बाद आर्यना सबालेंका ने तोड़ा रैकेट, कैमरामैन पर फूटा गुस्साराकेश कुमार का खास गार्डनिंग फॉर्मूला, 90% रेत में पौधे लगाएंगे तो कभी नहीं सड़ेंगी जड़ेंदौसा के बांदीकुई जंक्शन पर दर्दनाक हादसा, प्लेटफॉर्म पर गिरा लोहे का एंगल, हरियाणा के यात्री की मौतमिर्जापुर द मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर मचाया गदर, 9 दिनों में दुनिया भर में कमाए 245 करोड़ से ज्यादाझुंझुनूं में रोडवेज बस पर फ्लाइंग टीम का छापा, सादुलपुर-जयपुर रूट पर बिना टिकट मिले सात यात्री और कंडक्टर पर एफआईआरजोधपुर में बाबा की बीज पर उमड़ी आस्था की भारी भीड़, 108 ज्योतों के साथ हुई महाआरतीमुंबई-गोवा हाइवे पर उमड़ी भारी भीड़, गणेशोत्सव के मौके पर लगा लंबा जामशाहजहांपुर में हाईवोल्टेज तार की चपेट में आया मिट्टी से भरा डंपर, चालक ने कूदकर बचाई जानगणेश चतुर्थी पर ऐसे पहनें धोती स्टाइल साड़ी, 6 गज की आम साड़ी से मिलेगा परफेक्ट महाराष्ट्रीयन लुक
बिहार के देवमुनि: 50 की उम्र में रोज़ 10 किलोमीटर पैदल चलकर ₹500 की कमाई, बक्से में चनाचूर और कंधों पर पूरे परिवार का बोझसक्सेस स्टोरी
14 जून 2026, 6:53 am (91 दिन पहले)· 1

बिहार के देवमुनि: 50 की उम्र में रोज़ 10 किलोमीटर पैदल चलकर ₹500 की कमाई, बक्से में चनाचूर और कंधों पर पूरे परिवार का बोझ

जहानाबाद के हुलासगंज के रहने वाले करीब 50 साल के देवमुनि हर सुबह बक्से में 100 फाइल चनाचूर लेकर निकलते हैं और गली-गली घूमकर ₹10 के लिफाफे बेचते हैं, जिससे रोज़ाना करीब ₹500 की कमाई होती है।

बचपन की कुछ चीज़ें वक्त के साथ भले धुंधली पड़ जाएं, लेकिन सामने आते ही पुरानी यादें फिर ताज़ा हो जाती हैं। ऐसी ही एक चीज़ है चनाचूर — और बिहार के जहानाबाद ज़िले में एक शख़्स आज भी उसी पुराने, परंपरागत अंदाज़ में लोगों तक इसे पहुँचा रहा है। बक्से के भीतर कागज़ के बंद लिफाफों में चनाचूर भरकर वह सुबह-सुबह घर से निकल पड़ते हैं और गली, मोहल्ले से लेकर भीड़भाड़ वाली जगहों तक घूम-घूमकर बेचते हैं।

कौन हैं देवमुनि

यह काम करते हैं हुलासगंज प्रखंड के रहने वाले देवमुनि, जिनकी उम्र करीब 50 साल है। उनके परिवार में इससे पहले भी कई लोग इसी पेशे से जुड़े रहे हैं। हर दिन वह एक पेटी में 100 फाइल चनाचूर भरकर बाहर निकलते हैं। सुबह 8 बजे तक घर से रवाना हो जाते हैं और दोपहर तक बिक्री पूरी कर वापस लौटते हैं। एक लिफाफा चनाचूर की कीमत वह 10 रुपए रखते हैं।

ये भी पढ़ें

घर से दुकान तक, सबकुछ अपने हाथों से

देवमुनि का दिन सबसे पहले चनाचूर तैयार करने से शुरू होता है। इसे बनाने में परिवार के लोग भी उनका हाथ बँटाते हैं। माल तैयार होते ही वह उसे बक्से में पैक करते हैं और बेचने के लिए निकल पड़ते हैं। दिनभर की इसी बिक्री से जो आमदनी होती है, उसी से उनके घर का गुज़ारा चलता है। उन्हें देखकर लोगों को अपने बचपन के दिन याद आ जाते हैं।

खानदानी पेशा, जिसमें सिर्फ़ मेहनत की पूँजी है

देवमुनि TrendKia को बताते हैं कि परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण वह ज़्यादा पढ़ाई नहीं कर पाए। चनाचूर बेचना उनके परिवार की खानदानी परंपरा रही है — उनके पिता भी जीवनभर यही काम करते रहे, और अब वही ज़िम्मेदारी उनके कंधों पर है। यह पूरा काम शारीरिक मेहनत के दम पर ही चलता है। हर रोज़ चने से चनाचूर बनाते हैं, उसे बक्से में भरते हैं और बिक्री के लिए घर से बाहर निकल जाते हैं। रोज़ाना 100 फाइल लेकर निकलते हैं, जिनमें से करीब 50 बिक जाती हैं — और इतने से ही उनका खर्च निकल आता है। हालाँकि इसके लिए उन्हें बहुत लंबी दूरी पैदल नापनी पड़ती है।

हर दिन 10 किलोमीटर की पैदल यात्रा

देवमुनि बताते हैं कि हर दिन वह कम से कम 10 किलोमीटर पैदल चलते हैं, और इसी मेहनत से रोज़ाना करीब 500 रुपए तक की कमाई हो पाती है। यही आमदनी पूरे घर-परिवार को चलाती है। वह कहते हैं कि बच्चा भी कुछ नहीं कर सका, इसलिए घर की पूरी ज़िम्मेदारी अब भी उन्हीं को सँभालनी पड़ रही है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर भी थकने लगा है, फिर भी जब तक चल पा रहे हैं, तब तक वह इसी काम को आगे बढ़ाते रहना चाहते हैं।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR