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जमुई की सुषमा हर रोज घुटनों के बल डेढ़ किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंचती है, सपना है पुलिस अफसर बनने कासक्सेस स्टोरी
4 जुल॰ 2026, 9:09 pm (45 दिन पहले)· 2

जमुई की सुषमा हर रोज घुटनों के बल डेढ़ किलोमीटर चलकर स्कूल पहुंचती है, सपना है पुलिस अफसर बनने का

बिहार के जमुई जिले की दस साल की सुषमा कुमारी जन्म से ही पैरों से दिव्यांग है, फिर भी हर दिन डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर स्कूल जाती है और बड़ी होकर पुलिस अफसर बनना चाहती है।

बिहार के जमुई जिले के एक छोटे से गांव खुटौना में रहने वाली दस साल की सुषमा कुमारी की कहानी हौसले की मिसाल है। जन्म से ही उसके दोनों पैर टखने से नीचे पूरी तरह मुड़े हुए हैं, खड़ी होते ही पैर कांपने लगते हैं और सड़क पर चलना उसके लिए हर दिन एक कठिन इम्तिहान बन जाता है। इसके बावजूद वह रोज करीब डेढ़ किलोमीटर का सफर तय कर उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुटौना पहुंचती है, जहां वह कक्षा चार में पढ़ती है।

सुषमा अकेली नहीं है जो इस मुश्किल से जूझ रही है। उसकी बड़ी बहन भी दोनों पैरों से दिव्यांग है और वह भी इसी स्कूल में पढ़ चुकी है। इतना ही नहीं, सुषमा की मां सुन नहीं सकतीं। यानी पूरे परिवार को अलग-अलग तरह की शारीरिक चुनौतियों से रोज जूझना पड़ता है, फिर भी सुषमा ने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा।

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मुड़े हुए पैरों के साथ हर कदम मुश्किल

सुषमा के टखने से नीचे का हिस्सा पूरी तरह मुड़ा हुआ है, जिस वजह से वह चप्पल तक नहीं पहन सकती। सामान्य सड़क पर चलने पर गिट्टियां और कंकड़ उसके पैरों में चुभ जाते हैं, जिससे चलना और मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से वह सड़क की बजाय खेतों के रास्ते से स्कूल जाना पसंद करती है, क्योंकि वहां मिट्टी की नरम सतह मिल जाती है और स्कूल की दूरी भी कुछ कम हो जाती है।

बारिश में लगभग नामुमकिन हो जाता है सफर

बारिश का मौसम सुषमा के लिए सबसे बड़ी चुनौती लेकर आता है। कच्ची सड़कें और खेतों की पगडंडियां कीचड़ से भर जाती हैं। ऐसे मौसम में सामान्य व्यक्ति के लिए भी चलना मुश्किल हो जाता है, लेकिन सुषमा के लिए यह लगभग असंभव जैसा हो जाता है। सुषमा की दादी सिया देवी बताती हैं कि वह कीचड़ भरे रास्ते पर कई बार गिर चुकी है, जिस वजह से बारिश के दिनों में कई बार वह स्कूल ही नहीं जा पाती।

बड़ी होकर पुलिस अफसर बनना है सपना

अपनी सारी दिक्कतों के बीच भी सुषमा का सपना साफ है। उसने बताया, मैं पढ़-लिखकर पुलिस बनना चाहती हूं। उसने आगे कहा कि ऐसा पैर होने के कारण उसे चलने-फिरने में बहुत परेशानी होती है, सड़क पर गिट्टियां चुभती हैं तो दिक्कत और बढ़ जाती है, और बारिश में रास्ते में कीचड़ हो जाने पर स्कूल जाना बंद हो जाता है। स्कूल के प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा प्रतिदिन स्कूल आती है। उन्होंने कहा कि उसे परेशानी होती है, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर हर रोज स्कूल पहुंचती है। उन्होंने यह भी बताया कि सुषमा की एक बड़ी बहन भी दिव्यांग है, जो पहले इसी स्कूल में पढ़ती थी।

अब तक नहीं मिली कोई सरकारी मदद

सुषमा के परिवार ने बताया कि आज तक उसे ऐसी कोई सरकारी सहायता नहीं मिल सकी, जिससे उसका स्कूल आना-जाना आसान हो सके। उसे अब तक एक ट्राई साइकिल तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। परिवार के लोगों का कहना है कि अगर उसके पास ट्राई साइकिल होती, तो उसका रोज का सफर काफी आसान हो जाता और बारिश के दिनों में भी उसकी पढ़ाई कम प्रभावित होती। सुषमा की यह कहानी अब कई और लोगों को भी प्रेरणा दे रही है।

सवाल-जवाब

सुषमा कौन है और वह कहां रहती है?
सुषमा कुमारी बिहार के जमुई जिले के गांव खुटौना की रहने वाली दस साल की छात्रा है, जो उत्क्रमित मध्य विद्यालय खुटौना की कक्षा चार में पढ़ती है।
सुषमा को चलने में क्या दिक्कत है?
सुषमा के दोनों पैर जन्म से ही टखने से नीचे पूरी तरह मुड़े हुए हैं, जिस वजह से वह चप्पल तक नहीं पहन सकती और खड़ी होने पर पैर कांपने लगते हैं।
सुषमा रोज स्कूल कैसे पहुंचती है?
वह घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्कूल तक सड़क की बजाय खेतों के रास्ते से जाती है, क्योंकि वहां मिट्टी की सतह उसके पैरों के लिए ज्यादा आसान होती है।
बारिश के मौसम में सुषमा को क्या समस्या होती है?
बारिश में कच्ची सड़कें और पगडंडियां कीचड़ से भर जाती हैं, जिससे उसका चलना लगभग असंभव हो जाता है और कई बार वह स्कूल नहीं जा पाती।
सुषमा का सपना क्या है?
सुषमा पढ़-लिखकर पुलिस अफसर बनना चाहती है।
क्या सुषमा को सरकार से कोई मदद मिली है?
नहीं, परिवार के मुताबिक आज तक सुषमा को कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है और उसे अब तक एक ट्राई साइकिल तक नहीं दी गई है।
स्कूल के प्रधानाचार्य ने सुषमा के बारे में क्या कहा?
प्रधानाचार्य राहुल कुमार ने बताया कि सुषमा को परेशानी होती है, लेकिन वह उसे नजरअंदाज कर हर रोज स्कूल आती है।
सुषमा के परिवार में और कौन दिव्यांग है?
सुषमा की बड़ी बहन भी दोनों पैरों से दिव्यांग है और वह भी पहले इसी स्कूल में पढ़ती थी, वहीं उसकी मां सुन नहीं सकती हैं।
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