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बोकारो के भरत महतो ने पारंपरिक धान छोड़ अपनाई बरबटी की आधुनिक खेती, मात्र 50 डिसमिल में कमाए सवा लाख रुपयेसक्सेस स्टोरी
20 जून 2026, 7:48 pm (46 दिन पहले)· 3

बोकारो के भरत महतो ने पारंपरिक धान छोड़ अपनाई बरबटी की आधुनिक खेती, मात्र 50 डिसमिल में कमाए सवा लाख रुपये

झारखंड के बोकारो जिले के एक किसान भरत महतो ने धान की खेती की जगह आधुनिक मचान विधि से बरबटी उगाकर अपनी लागत का तीन गुना मुनाफा कमाया है।

झारखंड के बोकारो जिले के रहने वाले भरत महतो ने पारंपरिक कृषि पद्धतियों से इतर कुछ नया करने का साहसिक फैसला लिया। पहले वह मुख्य रूप से धान की फसल पर निर्भर थे, लेकिन उसमें सीमित मुनाफा मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में उन्होंने सब्जियों की आधुनिक खेती करने का मन बनाया। इस बदलाव के लिए उन्होंने न केवल अपने गांव के अन्य प्रगतिशील किसानों से सलाह ली, बल्कि यूट्यूब जैसे डिजिटल मंच पर उपलब्ध आधुनिक कृषि तकनीकों के वीडियो देखकर भी नई जानकारियां जुटाईं। आज उनके इस फैसले ने उनकी तकदीर बदल दी है।

मुनाफे का गणित: 50 डिसमिल जमीन से बंपर कमाई

भरत महतो ने केवल 50 डिसमिल जमीन पर बरबटी की खेती शुरू की। इस खेती में उनका कुल खर्च महज 30 हजार रुपये के आसपास आया। उचित रखरखाव और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करने के बाद उन्हें अपनी इस छोटी सी जमीन से करीब 30 से 35 क्विंटल तक की बंपर पैदावार मिली। जब वे इस फसल को बेचने कसमार बाजार पहुंचे, तो वहां उन्हें औसतन 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम का शानदार भाव मिला। इस हिसाब से करीब 35 क्विंटल फसल बेचकर उन्होंने कुल 1 लाख 22 हजार 500 रुपये की कमाई की, जो उनकी कुल लागत का तीन गुना है।

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खेती की समय-सारणी और लगातार होने वाली आय

इस आधुनिक खेती के समय चक्र के बारे में बात करते हुए भरत महतो ने बताया कि उन्होंने मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में बरबटी के बीजों की बुवाई की थी। यह फसल बेहद कम समय यानी मात्र 50 से 60 दिनों के भीतर पूरी तरह से तैयार हो जाती है। बरबटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार फसल तैयार होने के बाद इसकी कई महीनों तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है। इससे किसानों को हर हफ्ते बाजार में अपनी उपज बेचकर नियमित रूप से नकदी मिलती रहती है, जिससे दैनिक खर्चों को चलाना आसान हो जाता है।

चुनौतियां और कीट प्रबंधन

हालांकि, हर आधुनिक खेती की तरह इसमें भी कुछ गंभीर चुनौतियां हैं। भरत महतो के अनुसार, इस फसल में सबसे बड़ी समस्या पत्तों पर कीट लगने की होती है। यदि समय पर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए वे जैविक घोल और रासायनिक कीटनाशकों का संतुलित छिड़काव करते हैं। समय रहते उचित प्रबंधन करने से फसल को पूरी तरह से सुरक्षित रखा जा सकता है और नुकसान से बचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

बरबटी की खेती में बुवाई का सही समय क्या था और फसल कितने दिनों में तैयार हुई?
बरबटी की बुवाई मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में की गई थी। यह फसल लगभग 50 से 60 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो गई।
भरत महतो को आधुनिक खेती करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
उन्हें अपने गांव के अन्य प्रगतिशील किसानों और यूट्यूब पर उपलब्ध आधुनिक कृषि के वीडियो से प्रेरणा मिली।
बरबटी की फसल में कौन सी मुख्य चुनौती आती है और इसका समाधान क्या है?
इस फसल में पत्तों पर कीट लगने की समस्या मुख्य चुनौती है। इसका समाधान समय पर कीटनाशकों और जैविक घोल का छिड़काव करके किया जा सकता है।
प्रति किलोग्राम बरबटी की औसत बाजार कीमत क्या रही?
कसमार बाजार में बरबटी की औसत कीमत लगभग 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
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