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महज 50 डिसमिल खेत से 1.30 लाख की बंपर कमाई, बोकारो के किसान ने मचान विधि से उगाई बरबटीसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 1

महज 50 डिसमिल खेत से 1.30 लाख की बंपर कमाई, बोकारो के किसान ने मचान विधि से उगाई बरबटी

झारखंड के पेटरवार प्रखंड निवासी किसान संतोष कुमार महतो ने मचान विधि का उपयोग कर मात्र 50 डिसमिल जमीन पर बरबटी की खेती की। इस स्मार्ट तरीके से उन्होंने कम समय में 1.30 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाकर एक बेहतरीन मिसाल कायम की है।

झारखंड के बोकारो जिले में एक किसान ने यह साबित कर दिया है कि खेती में मुनाफा कमाने के लिए बहुत बड़े रकबे की जरूरत नहीं होती, बल्कि सही तकनीक और स्मार्ट योजना अधिक मायने रखती है। पेटरवार प्रखंड के सरैयाटांड़ गांव के रहने वाले संतोष कुमार महतो ने महज 50 डिसमिल जमीन पर बरबटी (लोबिया) की खेती कर बेहतरीन सफलता हासिल की है। पारंपरिक तरीकों से अलग हटकर उन्होंने मचान विधि का इस्तेमाल किया, जिसकी बदौलत उन्होंने कम लागत में बंपर पैदावार प्राप्त की है। उनका यह प्रयास छोटे किसानों के लिए एक नजीर बन गया है, जो सीमित संसाधनों के बीच अपनी आय बढ़ाने के तरीके खोज रहे हैं।

वैज्ञानिक तरीके से खेती की शुरुआत

संतोष कुमार महतो पेशे से एक पूर्णकालिक किसान हैं। खेती-किसानी का हुनर उन्हें अपने पूर्वजों से विरासत में मिला है। अपने पिता और दादा को खेतों में काम करते देखकर उन्होंने भी इसी क्षेत्र में अपना करियर बनाने का फैसला किया। जमीन का आकार छोटा होने के कारण उन्होंने ऐसी फसल का चुनाव किया जो कम जगह में अधिक उत्पादन दे सके। इसके लिए उन्होंने बरबटी को चुना और मचान विधि (ट्रेलिस सिस्टम) अपनाई। इस विधि में पौधों को जमीन पर फैलने के बजाय बांस और तार के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है। इससे फसल को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, और फलियां मिट्टी के संपर्क में आकर खराब नहीं होतीं।

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बुवाई से लेकर लगातार आमदनी का चक्र

संतोष ने मई के महीने में अपने खेत में बरबटी के बीजों की बुवाई की थी। इस फसल की सबसे बड़ी खासियत इसका तेजी से विकसित होना है। बुवाई के बाद महज 45 से 60 दिनों के भीतर यह फसल पूरी तरह से तैयार हो जाती है। एक बार फलियां आनी शुरू हो जाएं, तो लगातार दो महीने तक इनकी तुड़ाई की जा सकती है। यह निरंतर चक्र किसान को हर दिन या हर दूसरे दिन बाजार में अपनी उपज बेचने का मौका देता है, जिससे परिवार के पास नकदी का प्रवाह बना रहता है। यह नियमित आमदनी छोटे किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में बहुत मददगार साबित होती है।

लागत, पैदावार और मुनाफे का शानदार गणित

इस पूरी प्रक्रिया का अर्थशास्त्र बेहद उत्साहजनक है। संतोष के अनुसार, 50 डिसमिल जमीन पर मचान बनाने, बीज खरीदने, खाद और सिंचाई सहित पूरी खेती में लगभग 20 हजार रुपये की कुल लागत आती है। अगर फसल की सही तरीके से देखभाल की जाए, तो इतने छोटे से हिस्से से 60 से 70 क्विंटल तक बरबटी का उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है। स्थानीय बाजारों में बरबटी की मांग हमेशा बनी रहती है और औसतन 25 से 30 रुपये प्रति किलो का भाव आसानी से मिल जाता है। इस उत्पादन और बाजार मूल्य के आधार पर कुल बिक्री लगभग 1.50 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। शुरुआती 20 हजार रुपये की लागत को निकाल देने के बाद भी किसान को 1.30 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है।

कीटों से बचाव और उचित फसल प्रबंधन

इतने शानदार मुनाफे के बावजूद, बरबटी की खेती में कुछ चुनौतियां भी हैं। संतोष महतो बताते हैं कि इस फसल में कीटों का हमला सबसे आम और गंभीर समस्या है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो ये कीट पूरी फसल को बर्बाद कर सकते हैं। उन्होंने सलाह दी है कि कीटों से बचाव के लिए समय-समय पर खेतों का निरीक्षण करना चाहिए और उचित कृषि रसायनों या दवाओं का छिड़काव बेहद जरूरी है। सही फसल प्रबंधन और समय पर की गई रोकथाम ही इस बंपर पैदावार और मुनाफे की असली कुंजी है।

सवाल-जवाब

संतोष कुमार महतो किस जिले के रहने वाले हैं?
वह झारखंड के बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड स्थित सरैयाटांड़ गांव के निवासी हैं।
उन्होंने बरबटी उगाने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया?
उन्होंने मचान विधि (ट्रेलिस सिस्टम) का इस्तेमाल किया, जिसमें पौधों को बांस और तार के सहारे ऊपर चढ़ाया जाता है।
बरबटी की फसल तैयार होने में कितना समय लगता है?
बुवाई के बाद बरबटी की फसल लगभग 45 से 60 दिनों में पूरी तरह से तैयार हो जाती है।
50 डिसमिल जमीन से उन्हें कितना मुनाफा हुआ?
करीब 20 हजार रुपये की लागत निकालकर उन्होंने अपनी फसल से 1.30 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।
बरबटी की खेती में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
इस फसल में कीटों का हमला सबसे बड़ी समस्या है, जिससे बचने के लिए खेतों का निरीक्षण और समय पर दवाओं का छिड़काव जरूरी है।
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