भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की अकूत दौलत के आगे बाकी 9 देश मिलकर भी पिछड़े, वित्तीय आंकड़ों में दुनिया भर के बोर्ड्स का निकला दमनागौर कृषि मंडी ने रचा नया कीर्तिमान, राजस्व में 84.29 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्जत्रिपुरा में बुनियादी ढांचे और परिवहन नेटवर्क की निगरानी के लिए बनेगा एकीकृत डिजिटल मंचजमशेदपुर की सड़कों पर सफाई का अनोखा संदेश लेकर घूमती 17 साल पुरानी करिज्मापांवटा साहिब में डंपर और कार की जोरदार भिड़ंत में 3 की जान गई, कुल्लू में पलटी बसझड़ते और पतले बालों से हैं परेशान, तो महंगे प्रोडक्ट्स के बजाय अपनाएं 5 पारंपरिक देसी हर्ब्सपूर्वी नौसेना कमान की जासूसी में नाविक प्रदीप मुखर्जी गिरफ्तार, पाकिस्तानी महिला हैंडलर को भेजीं खुफिया जानकारियांकर्नाटक के बेलगावी में 198 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश के मामले में भाजपा नेता डॉ. रवि पाटिल को मिली अदालत से अग्रिम राहतबुंदेलखंड की सूखी धरती पर प्राकृतिक खेती से बदली तस्वीर, चित्रकूट के पांच किसानों ने दिखाया लाखों की कमाई का रास्ताहैदराबाद के निकट पहाड़ी पर बसा हजार साल पुराना शिवालय, चट्टान के झरोखे से दिखते हैं पाताल शिवलिंग
घर पर केमिकल मुक्त गुलाब जल बनाकर झिलाही की राधा देवी बदल रहीं अपनी किस्मतसक्सेस स्टोरी
4 जुल॰ 2026, 1:16 pm (92 दिन पहले)· 4

घर पर केमिकल मुक्त गुलाब जल बनाकर झिलाही की राधा देवी बदल रहीं अपनी किस्मत

गोंडा जिले के झिलाही गांव की राधा देवी प्रजापति घर पर बिना केमिकल के शुद्ध गुलाब जल बना रही हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है और गांव की करीब 5 से 6 महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विकासखंड मनकापुर के झिलाही गांव की राधा देवी प्रजापति ने अपने घर की रसोई को ही एक छोटे उद्योग में बदल दिया है। वह बिना किसी रासायनिक पदार्थ के शुद्ध और प्राकृतिक गुलाब जल तैयार कर रही हैं और इसी वजह से उनके उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है।

फूल चुनने से लेकर अर्क निकालने तक का तरीका

राधा देवी बताती हैं कि गुलाब जल बनाने की शुरुआत ताजे और खुशबूदार गुलाब के फूल चुनने से होती है। चुने गए फूलों को साफ पानी से बार-बार धोया जाता है, जिससे उन पर जमी धूल और अन्य गंदगी पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से फूलों का अर्क निकाला जाता है। यही अर्क आगे चलकर शुद्ध गुलाब जल के रूप में तैयार होता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के केमिकल या कृत्रिम पदार्थ को शामिल नहीं किया जाता, जिससे उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक बना रहता है।

ये भी पढ़ें

पैकिंग और सफाई पर खास जोर

अर्क तैयार होने के बाद गुलाब जल को साफ बोतलों में भरकर पैक किया जाता है। राधा देवी के मुताबिक पूरे काम के दौरान सफाई और गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है, ताकि जो ग्राहक तक पहुंचे वह पूरी तरह शुद्ध हो। उनका कहना है कि यही भरोसा है जिसके दम पर लोग बार-बार उनसे गुलाब जल खरीदते हैं।

चेहरे की देखभाल से लेकर पूजा-पाठ तक इस्तेमाल

राधा देवी के अनुसार उनका गुलाब जल चेहरे की देखभाल, त्वचा को ताजगी देने और आंखों को ठंडक पहुंचाने के काम आता है। इसके अलावा पूजा-पाठ में भी इसका इस्तेमाल खूब होता है। प्राकृतिक होने की वजह से लोग इसे केमिकल वाले गुलाब जल के मुकाबले ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सिर्फ आसपास के गांव ही नहीं, बल्कि दूसरे इलाकों से भी लोग अब उनका उत्पाद मंगवा रहे हैं।

छोटी शुरुआत, अब बड़ी योजना

राधा देवी बताती हैं कि उन्होंने यह काम बहुत छोटे स्तर से शुरू किया था। समय के साथ जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ा, उनका काम भी आगे बढ़ता गया। अब वह उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपना गुलाब जल पहुंचाया जा सके। फिलहाल उनके साथ करीब 5 से 6 महिलाएं इस काम में जुड़ी हैं और साथ मिलकर काम कर रही हैं।

गांव की महिलाओं के लिए मिसाल

राधा देवी का मानना है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण और थोड़ी मदद मिल जाए, तो वे भी घर बैठे छोटा उद्योग शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी यह पहल आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी बताती है कि मेहनत और अच्छी गुणवत्ता के दम पर गांव से भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।

सवाल-जवाब

राधा देवी प्रजापति कौन हैं?
वह उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मनकापुर के झिलाही गांव की रहने वाली महिला हैं, जो घर पर प्राकृतिक गुलाब जल बनाती हैं।
वह गुलाब जल कैसे बनाती हैं?
ताजे गुलाब के फूल चुनकर उन्हें साफ पानी से धोया जाता है, फिर पारंपरिक तरीके से उनका अर्क निकालकर गुलाब जल तैयार किया जाता है।
क्या इसमें कोई केमिकल इस्तेमाल होता है?
नहीं, पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के रासायनिक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
इस गुलाब जल का इस्तेमाल किन कामों में होता है?
इसका इस्तेमाल चेहरे की देखभाल, त्वचा को ताजगी देने, आंखों को ठंडक पहुंचाने और पूजा-पाठ में किया जाता है।
राधा देवी के साथ कितनी महिलाएं काम करती हैं?
फिलहाल उनके साथ करीब 5 से 6 महिलाएं काम कर रही हैं।
उनका उत्पाद कहां-कहां बिक रहा है?
आसपास के गांवों के अलावा दूसरे क्षेत्रों से भी लोग उनका गुलाब जल मंगवा रहे हैं।
राधा देवी की आगे क्या योजना है?
वह उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं ताकि ज्यादा लोगों तक अपना उत्पाद पहुंचा सकें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp