उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विकासखंड मनकापुर के झिलाही गांव की राधा देवी प्रजापति ने अपने घर की रसोई को ही एक छोटे उद्योग में बदल दिया है। वह बिना किसी रासायनिक पदार्थ के शुद्ध और प्राकृतिक गुलाब जल तैयार कर रही हैं और इसी वजह से उनके उत्पाद की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है।
फूल चुनने से लेकर अर्क निकालने तक का तरीका
राधा देवी बताती हैं कि गुलाब जल बनाने की शुरुआत ताजे और खुशबूदार गुलाब के फूल चुनने से होती है। चुने गए फूलों को साफ पानी से बार-बार धोया जाता है, जिससे उन पर जमी धूल और अन्य गंदगी पूरी तरह निकल जाए। इसके बाद पारंपरिक और प्राकृतिक तरीके से फूलों का अर्क निकाला जाता है। यही अर्क आगे चलकर शुद्ध गुलाब जल के रूप में तैयार होता है। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी तरह के केमिकल या कृत्रिम पदार्थ को शामिल नहीं किया जाता, जिससे उत्पाद पूरी तरह प्राकृतिक बना रहता है।
पैकिंग और सफाई पर खास जोर
अर्क तैयार होने के बाद गुलाब जल को साफ बोतलों में भरकर पैक किया जाता है। राधा देवी के मुताबिक पूरे काम के दौरान सफाई और गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा जाता है, ताकि जो ग्राहक तक पहुंचे वह पूरी तरह शुद्ध हो। उनका कहना है कि यही भरोसा है जिसके दम पर लोग बार-बार उनसे गुलाब जल खरीदते हैं।
चेहरे की देखभाल से लेकर पूजा-पाठ तक इस्तेमाल
राधा देवी के अनुसार उनका गुलाब जल चेहरे की देखभाल, त्वचा को ताजगी देने और आंखों को ठंडक पहुंचाने के काम आता है। इसके अलावा पूजा-पाठ में भी इसका इस्तेमाल खूब होता है। प्राकृतिक होने की वजह से लोग इसे केमिकल वाले गुलाब जल के मुकाबले ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सिर्फ आसपास के गांव ही नहीं, बल्कि दूसरे इलाकों से भी लोग अब उनका उत्पाद मंगवा रहे हैं।
छोटी शुरुआत, अब बड़ी योजना
राधा देवी बताती हैं कि उन्होंने यह काम बहुत छोटे स्तर से शुरू किया था। समय के साथ जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ा, उनका काम भी आगे बढ़ता गया। अब वह उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक अपना गुलाब जल पहुंचाया जा सके। फिलहाल उनके साथ करीब 5 से 6 महिलाएं इस काम में जुड़ी हैं और साथ मिलकर काम कर रही हैं।
गांव की महिलाओं के लिए मिसाल
राधा देवी का मानना है कि अगर ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण और थोड़ी मदद मिल जाए, तो वे भी घर बैठे छोटा उद्योग शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनकी यह पहल आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी बताती है कि मेहनत और अच्छी गुणवत्ता के दम पर गांव से भी सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है।













