अक्सर सिनेमाई कहानियों में दो भाइयों की ऐसी जोड़ी देखने को मिलती है, जिसमें से एक वर्दी पहनकर कानून व्यवस्था संभालता है और दूसरा कलम की ताकत से प्रशासनिक तंत्र चलाता है। असल जिंदगी में ऐसा ही दुर्लभ और अनूठा संयोग इस समय उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में देखने को मिल रहा है। पंजाब के एक बेहद साधारण शिक्षक परिवार से निकले दो सगे भाई पड़ोसी जिलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें से बड़े भाई पुलिस महकमे के शीर्ष पद पर तैनात हैं तो छोटे भाई जिला प्रशासन की कमान संभाल रहे हैं।
सफेद कोट से खाकी और प्रशासनिक कुर्सी तक का सफर
यह प्रेरक कहानी पंजाब के औद्योगिक शहर लुधियाना के रहने वाले अमरजीत शर्मा के परिवार की है। अमरजीत शर्मा एक सरकारी स्कूल में पंजाबी भाषा के लेक्चरर के पद पर कार्यरत रहे हैं। वे इलाके में अपनी सादगी और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को मुफ्त मार्गदर्शन देने के लिए पहचाने जाते थे। घर की जिम्मेदारी उनकी पत्नी ने संभाली। परिवार का माहौल हमेशा से शिक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता देने वाला रहा।
दोनों भाइयों की शुरुआती स्कूली शिक्षा लुधियाना में ही पूरी हुई। उच्च शिक्षा के दौरान दोनों ने डॉक्टरी को अपने करियर के रूप में चुना। बड़े भाई ने डेंटल सर्जरी यानी बीडीएस की डिग्री हासिल की, जबकि छोटे भाई ने एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर की उपाधि प्राप्त की। हालांकि, मेडिकल क्षेत्र में सफल होने के बावजूद दोनों का मन जनसेवा के व्यापक दायरे में काम करने का था। इसी संकल्प के साथ दोनों ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की और सफलता हासिल की।
बड़े भाई अजय पाल शर्मा: डॉक्टर से एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कॉप तक
डॉक्टर अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। बीडीएस की डिग्री होने की वजह से पुलिस महकमे में उन्हें अक्सर 'डॉक्टर कॉप' के नाम से भी संबोधित किया जाता है। अपराध और अपराधियों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाने के लिए वे जाने जाते हैं। अपनी तेजतर्रार कार्यशैली और अभियानों की वजह से उनकी पहचान एक एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अधिकारी की बन चुकी है।
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद के संगठित आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करने में उनकी रणनीति काफी अहम मानी गई। उनकी प्रशासनिक दक्षता और कड़े फैसलों को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें बेहद संवेदनशील इलाकों में कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी थी। वर्तमान में वे प्रयागराज कमिश्नरेट में अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) के पद पर कार्यरत हैं।
छोटे भाई अमित पाल शर्मा: विकास और प्रबंधन में माहिर आईएएस
परिवार के छोटे बेटे डॉक्टर अमित पाल शर्मा 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। सिविल सेवा में आने के बाद उन्होंने विभिन्न जनपदों में अपनी प्रशासनिक प्रतिभा की छाप छोड़ी है। वे मेरठ के नगर आयुक्त, सोनभद्र के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) और गाजियाबाद में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रह चुके हैं।
प्रयागराज में आयोजित होने वाले महाकुंभ 2025 की तैयारियों के मद्देनजर उन्हें प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) का उपाध्यक्ष बनाया गया था। वहां उन्होंने बड़े पैमाने पर चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों और भीड़ प्रबंधन की योजनाओं को तय समय सीमा के भीतर पूरा कराकर अपनी मजबूत प्रशासनिक पकड़ साबित की। वर्तमान में वे कौशांबी जिले के जिलाधिकारी (डीएम) के रूप में तैनात हैं।
कौशांबी हादसे में साथ उतरे तो चर्चा में आई जोड़ी
प्रयागराज और कौशांबी दोनों जिलों की सीमाएं आपस में सटी हुई हैं। हाल ही में कौशांबी जनपद के एक गांव में स्थित पटाखा फैक्ट्री में बड़ा हादसा हुआ था। इस गंभीर घटना की सूचना मिलते ही राहत, बचाव और कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने के लिए दोनों भाई जमीनी स्तर पर एक साथ सक्रिय दिखाई दिए।
संकट के समय दोनों अधिकारियों का एक साथ तालमेल बिठाकर काम करने का दृश्य स्थानीय लोगों और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया। एक ही सामान्य परिवार से निकलकर देश की दो सबसे कठिन और प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित होना और फिर आसपास के जिलों में ही शीर्ष पदों की जिम्मेदारी संभालना प्रशासनिक इतिहास का एक बेहद खास उदाहरण बन गया है।



















