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गोंडा में ननकऊ गोस्वामी का अनोखा मचान मॉडल: करेले और यूकेलिप्टस से 2 बीघा में दोहरा मुनाफासक्सेस स्टोरी
13 अग॰ 2026, 1:22 pm (77 दिन पहले)· 0

गोंडा में ननकऊ गोस्वामी का अनोखा मचान मॉडल: करेले और यूकेलिप्टस से 2 बीघा में दोहरा मुनाफा

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में प्रगतिशील किसान ननकऊ गोस्वामी ने करेले की खेती और यूकेलिप्टस की बागवानी को एक साथ मिलाकर 2 बीघा जमीन से नियमित नकदी और दीर्घकालिक कमाई का मॉडल पेश किया है।

कृषि क्षेत्र में लगातार बढ़ते खर्च और अनिश्चित पैदावार के बीच फसलों का सही चुनाव किसानों के लिए बेहद मददगार साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले स्थित विकासखंड इटियाथोक के एक प्रगतिशील किसान ननकऊ गोस्वामी ने इसी सोच के साथ एक अनोखा मॉडल तैयार किया है। पारंपरिक तरीके से अलग हटकर उन्होंने अपने खेत में एक साथ दो तरह की फसलों को उगाने का प्रयोग किया है। वह अपने दो बीघा खेत में करेले की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं और साथ ही खेत की मेड़ों तथा खाली पड़ी जमीनों पर यूकेलिप्टस के पौधे भी रोप रहे हैं। यह दोहरा कृषि मॉडल दैनिक नकदी प्रवाह के साथ-साथ लंबी अवधि की वित्तीय सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।

मचान विधि से करेले की उन्नत खेती और लागत का गणित

एक ही खेत में अलग-अलग प्रकृति वाली फसलें उगाने की योजना बनाते समय ननकऊ गोस्वामी ने स्थान और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर विशेष ध्यान दिया। आमतौर पर किसान करेले की बेल को जमीन पर ही फैलने देते हैं, जिससे पौधे ज्यादा जगह घेरते हैं और गुणवत्ता प्रभावित होने का जोखिम रहता है। इस चुनौती से निपटने के लिए उन्होंने खेत में बांस और तारों का मजबूत मचान तैयार किया। इस मचान प्रणाली के सहारे करेले की बेलें ऊपर की ओर बढ़ती हैं। इससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, तुड़ाई आसान होती है तथा जमीन का एक-एक इंच हिस्सा बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो पाता है।

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लागत और मुनाफे के आंकड़ों पर नजर डालें तो ननकऊ गोस्वामी ने लगभग दो बीघा जमीन पर करेले की फसल उगाई है। इस पूरी खेती को तैयार करने में उनकी कुल लागत 40 से 50 हजार रुपये के बीच आई है। करेला कम समय में तैयार होने वाली सब्जी की फसल है। एक बार तुड़ाई शुरू होने के बाद किसान को कई दिनों तक लगातार बाजार में उपज बेचने का अवसर मिलता है। उन्हें उम्मीद है कि महज 2 से 3 महीने के भीतर इस फसल से लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक की शानदार कमाई हो जाएगी। स्थानीय मंडियों में करेले की स्थिर मांग के कारण यह अल्पकालिक निवेश तेजी से नकद आय में बदल जाता है।

यूकेलिप्टस से भविष्य की बड़ी वित्तीय सुरक्षा

करेले की अल्पकालिक सब्जी फसल से जहां हर हफ्ते नकद आमदनी हो रही है, वहीं ननकऊ गोस्वामी ने दीर्घकालिक वित्तीय लाभ के लिए खेत की सीमाओं और खाली हिस्सों का उपयोग किया है। उन्होंने इन खाली जगहों पर यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए हैं। यूकेलिप्टस के पौधे तुरंत कमाई नहीं देते, लेकिन कुछ वर्षों में जब ये पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाएंगे, तो इन्हें बेचकर एकमुश्त बड़ा धन प्राप्त किया जा सकता है। इस तरह एक ही भूखंड से एक तरफ करेले की खेती दैनिक और मासिक खर्चों को संभालती है, जबकि यूकेलिप्टस के पेड़ भविष्य की बड़ी जरूरतों के लिए एक तरह की फिक्स्ड डिपॉजिट की भांति काम करते हैं।

अन्य किसानों के लिए सीख और जरूरी सावधानियां

गोंडा के इस प्रगतिशील किसान का यह प्रयोग आसपास के क्षेत्र के अन्य कृषकों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है। उनका स्पष्ट मानना है कि अगर थोड़ी समझदारी, सही दूरी और व्यवस्थित योजना अपनाई जाए, तो किसान अपनी सीमित भूमि से भी दोगुनी कमाई कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया है कि यूकेलिप्टस जैसी व्यावसायिक प्रजातियों का रोपण करने से पहले कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। किसानों को अपने खेत की मिट्टी की स्थिति, दो पौधों या फसलों के बीच की दूरी, सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता का सही आकलन करना चाहिए और इस संबंध में स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

ननकऊ गोस्वामी उत्तर प्रदेश के किस जिले से हैं?
ननकऊ गोस्वामी उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड इटियाथोक के एक प्रगतिशील किसान हैं।
करेले और यूकेलिप्टस का दोहरा कृषि मॉडल क्या है?
इस मॉडल में किसान अपने 2 बीघा खेत में मचान बनाकर करेले की अल्पकालिक सब्जी की खेती करते हैं और खेत की मेड़ों व खाली जगहों पर यूकेलिप्टस के पौधे रोपते हैं।
करेले की खेती के लिए मचान बनाने का क्या लाभ है?
मचान पर बेल फैलने से पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती है, उपज की तुड़ाई आसान हो जाती है तथा जमीन का अधिकतम और बेहतर उपयोग होता है।
2 बीघा में करेले की खेती की लागत और कमाई कितनी है?
ननकऊ गोस्वामी के अनुसार करेले की खेती में लगभग 40 से 50 हजार रुपये की लागत आई है और 2 से 3 महीने में 1 से 1.5 लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है।
यूकेलिप्टस लगाने से पहले किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
यूकेलिप्टस लगाने से पहले खेत की स्थिति, पौधों के बीच की दूरी, पानी की उपलब्धता की जांच करनी चाहिए और कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
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