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हिमालय की 14835 फीट ऊंची सरफाज चोटी पर फहराया तिरंगा, राजस्थान के अर्जुन सिंह राठौड़ ने रचा इतिहाससक्सेस स्टोरी
20 अग॰ 2026, 3:48 pm (1 घंटे पहले)· 2

हिमालय की 14835 फीट ऊंची सरफाज चोटी पर फहराया तिरंगा, राजस्थान के अर्जुन सिंह राठौड़ ने रचा इतिहास

राजस्थान के पाली जिले के अर्जुन सिंह राठौड़ ने हिमाचल प्रदेश के कसौल से शुरू हुए 40 किलोमीटर लंबे चुनौतीपूर्ण ट्रेक को पार कर 14,835 फीट ऊंची सरफाज चोटी पर तिरंगा फहराया।

राजस्थान के पाली जिले में स्थित बाली उपखंड के बेड़ा गांव निवासी अर्जुन सिंह राठौड़ ने हिमालय की कठिन और अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित सरफाज चोटी के शिखर पर भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया है। समुद्र तल से लगभग 14,835 फीट की विशाल ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज लहराकर उन्होंने न केवल पाली जिले बल्कि पूरे राजस्थान राज्य का नाम देश भर में गौरवान्वित किया है। अत्यधिक विपरीत परिस्थितियों और जमा देने वाली ठंड के बीच हासिल की गई यह सफलता अर्जुन सिंह के अदम्य साहस, मजबूत मनोबल और अटूट दृढ़ संकल्प की मिसाल बन गई है। इस उपलब्धि के बाद उनके गृह गांव बेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में जश्न का माहौल बना हुआ है।

कसौल से शुरू हुआ 40 किलोमीटर का चुनौतीपूर्ण ट्रेक

इस साहसिक पर्वतारोहण यात्रा के विवरण साझा करते हुए अर्जुन सिंह राठौड़ ने बताया कि इस पूरे अभियान का मुख्य आधार केंद्र हिमाचल प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटक कस्बा कसौल था। कसौल से शुरू होकर सरफाज चोटी के सर्वोच्च बिंदु तक पहुंचने वाला यह कठिन ट्रेकिंग मार्ग लगभग 40 किलोमीटर लंबा है। इस पर्वतीय अंचल के रास्ते अत्यंत संकरे, अत्यधिक ढलानदार और खतरनाक मोड़ से भरे हुए हैं, जहां कदम-कदम पर पर्वतारोहियों को गंभीर प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

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इस कठिन एवं जोखिम भरे पर्वतीय अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करने में अर्जुन सिंह राठौड़ और उनकी समर्पित पर्वतारोही टीम को कुल 5 दिन और 4 रातों का समय लगा। कसौल से अपनी यात्रा शुरू करने के बाद टीम ने लगातार ऊंचाई की ओर कदम बढ़ाए और पर्वतारोहण के तय मानकों का पालन करते हुए कठिन पड़ावों को पार किया।

भीषण ठंड और घटते ऑक्सीजन स्तर के बीच अटूट हौसला

हिमालय की सरफाज चोटी की ओर बढ़ते हुए पर्वतारोहियों को प्रकृति की कठिन कसौटियों से गुजरना पड़ा। यात्रा के दौरान टीम को हाड़ कंपाने वाली माइनस तापमान की भीषण ठंड, ऊंचाई बढ़ने के साथ घटते ऑक्सीजन स्तर, अचानक बदलते प्रतिकूल मौसम और ढलानदार बर्फ से ढके रास्तों का सामना करना पड़ा। ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में काफी कठिनाई हो रही थी, लेकिन टीम के सदस्यों ने अपना धैर्य बनाए रखा।

मौसम के पल-पल बदलते मिजाज और बर्फीले रास्तों पर फिसलने के खतरे के बावजूद अर्जुन सिंह और उनके साथियों का मनोबल बिल्कुल भी कमजोर नहीं पड़ा। टीम ने आपसी समन्वय और उच्च रणनीतिक सोच का परिचय देते हुए हर प्राकृतिक बाधा को पार किया और बिना रुके लगातार अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर अग्रसर रहे।

सरफाज चोटी के शिखर पर लहराया राष्ट्रीय ध्वज

अत्यधिक शारीरिक थकान, कठिन चढ़ाई और लगातार परिश्रम के बाद आखिरकार वह ऐतिहासिक समय आया, जब अर्जुन सिंह राठौड़ अपनी टीम के साथ सरफाज चोटी के 14,835 फीट ऊंचे शिखर पर कदम रखने में सफल हुए। शिखर पर पहुंचते ही पूरी टीम का उत्साह चरम पर पहुंच गया। सभी सदस्यों ने अत्यंत गर्व और सम्मान के साथ वहां भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और पूरे हिमालयी क्षेत्र में भारत माता के जयकारे लगाए।

ऊंचे बर्फीले पहाड़ों के बीच लहराता हुआ तिरंगा पूरी टीम के लिए एक अत्यंत भावुक, अमूल्य और जीवन भर याद रहने वाला गौरवपूर्ण क्षण साबित हुआ। इस सफलता के साथ ही अर्जुन सिंह का यह पर्वतारोहण अभियान देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

बेड़ा गांव और बाली उपखंड में खुशी की लहर

सरफाज चोटी पर तिरंगा फहराने की सूचना जैसे ही राजस्थान के पाली जिले के बेड़ा गांव पहुंची, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने एक-दूसरे को बधाइयां देकर अर्जुन सिंह की इस शानदार उपलब्धि का जश्न मनाया। बाली उपखंड के विभिन्न जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और स्थानीय निवासियों ने अर्जुन सिंह राठौड़ को उनकी इस अदम्य साहसिक सफलता पर शुभकामनाएं दी हैं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

सवाल-जवाब

अर्जुन सिंह राठौड़ किस स्थान के निवासी हैं?
अर्जुन सिंह राठौड़ राजस्थान के पाली जिले के बाली उपखंड अंतर्गत स्थित बेड़ा गांव के निवासी हैं।
सरफाज चोटी की ऊंचाई कितनी है और अभियान की शुरुआत कहां से हुई?
सरफाज चोटी समुद्र तल से लगभग 14,835 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। इस साहसिक यात्रा की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध कसौल कस्बे से हुई थी।
सरफाज चोटी का ट्रेकिंग मार्ग कितना लंबा था और इसे पूरा करने में कितना समय लगा?
यह ट्रेकिंग मार्ग लगभग 40 किलोमीटर लंबा है। अर्जुन सिंह और उनकी टीम ने इस दुर्गम चढ़ाई को 5 दिन और 4 रातों में सफलतापूर्वक पूरा किया।
पर्वतारोहण यात्रा के दौरान टीम को किन मुख्य चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
यात्रा के दौरान टीम को हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड, ऑक्सीजन की घटती मात्रा, अचानक बदलते मौसम, संकरे घुमावदार रास्तों और ढलानदार बर्फीले मार्गों का सामना करना पड़ा।
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