राजस्थान के बीकानेर शहर की रहने वाली हिमांशी जैन ने पारंपरिक गृह उद्योग की सोच को बदलते हुए एक नया मुकाम हासिल किया है। उन्होंने घरों में साबुन तैयार करने की पुरानी पद्धतियों में आधुनिक प्रयोग शामिल करके एक सफल ब्यूटी ब्रांड खड़ा कर दिया है। हिमांशी अपने इस उद्यम में ऊंटनी, गाय और बकरी के दूध का उपयोग करती हैं। इसके साथ ही वे रसोई में रोजाना काम आने वाली हल्दी, कॉफी, ताजे फल और सब्जियों जैसी पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्रियों से विभिन्न किस्म के स्किनकेयर साबुन तैयार कर रही हैं। उनके इस उत्पाद की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण प्रक्रिया है, जिसमें साबुन को पूरी तरह इस्तेमाल के लायक बनने में करीब डेढ़ महीने की अवधि लगती है।
रेगिस्तानी ऊंटनी के दूध से बना अनोखा ब्यूटी प्रोडक्ट
हिमांशी जैन के स्टार्टअप की सबसे मुख्य पहचान ऊंटनी के दूध से बनने वाले साबुन हैं। वे पिछले पांच वर्षों से ऊंटनी के दूध का इस्तेमाल करके ब्यूटी प्रॉडक्ट्स तैयार कर रही हैं। थार रेगिस्तान की खास पहचान माने जाने वाले ऊंट के दूध को उन्होंने त्वचा की देखभाल के लिए एक नवाचार के रूप में इस्तेमाल किया है। ऊंटनी के दूध के अतिरिक्त वे गाय और बकरी के दूध से भी अलग-अलग प्रकार के साबुन बनाती हैं। त्वचा को गहराई से पोषण देने के लिए इन साबुनों में मुख्य रूप से नारियल का तेल, जैतून का तेल और अरंडी का तेल मिलाया जाता है। अलग-अलग प्राकृतिक सामग्रियों के मिश्रण के आधार पर हर एक साबुन की अपनी खास उपयोगिता और विशेषता होती है।
रसोई के मसालों और ताजे फलों का बेहतरीन संगम
अपने प्रॉडक्ट्स में लगातार नए प्रयोग करते हुए हिमांशी प्राकृतिक चीजों के मेल पर विशेष ध्यान देती हैं। वे अपनी निर्माण सामग्री में रसोई की पारंपरिक चीजों जैसे हल्दी और कॉफी को शामिल करती हैं। इसके अलावा ताजे फलों के जूस, विशेषकर आम और पाइनएपल के साथ-साथ विभिन्न सब्जियों के अर्क का भी उपयोग किया जाता है। प्राकृतिक दूध, ताजे फल-सब्जियों और आयुर्वेदिक तेलों का यह अनोखा मेल अब उनके ब्रांड की असली ताकत बन चुका है। शुरुआत में हिमांशी ने इस काम को केवल अपने निजी शौक के तौर पर शुरू किया था, लेकिन जब लोगों ने उनके बनाए साबुनों को इस्तेमाल करना शुरू किया और इसके सकारात्मक परिणाम देखे, तो बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ने लगी। बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने इसे एक बड़े व्यावसायिक मॉडल में बदल दिया।
धैर्यपूर्ण निर्माण प्रक्रिया और 45 दिनों का इंतजार
हिमांशी बताती हैं कि प्राकृतिक और हर्बल साबुन बनाने का काम बेहद धैर्य और बारीकी की मांग करता है। शुरुआती चरण में कच्ची सामग्रियों को मिलाने, उनका सटीक मिश्रण तैयार करने और उन्हें सांचों में ढालने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। हालांकि, सांचे में ढलने के तुरंत बाद यह साबुन इस्तेमाल के योग्य नहीं होता। इसे प्राकृतिक रूप से सख्त होने, रासायनिक संतुलन बनाने और पूरी तरह उपयोग योग्य बनने में लगभग डेढ़ महीने का समय लगता है। निर्माण में लगने वाले लंबे समय की वजह से हिमांशी बाजार की मांग का पहले से अनुमान लगाकर अग्रिम ऑर्डर मॉडल के आधार पर ही काम करती हैं।
100 रुपये से शुरुआत होकर देश भर में पहुंची मांग
इन प्राकृतिक हर्बल साबुनों की शुरुआती कीमत 100 रुपये रखी गई है, जिससे यह आम ग्राहकों की पहुंच में आसानी से आ सके। शुरुआती दौर में स्थानीय स्तर पर बीकानेर में बिकने वाले ये साबुन अब देश के कोने-कोने में पसंद किए जा रहे हैं। वर्तमान में इनके साबुनों की सप्लाई कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे भारत में की जा रही है। हिमांशी अपने इन खास ब्यूटी साबुनों का प्रदर्शन देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित होने वाली प्रमुख राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी कर चुकी हैं, जहां इन्हें ग्राहकों की ओर से बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।



















