इंदौर की रहने वाली स्मृति पालीवाल ने पर्यावरण संरक्षण और स्वरोजगार की दिशा में एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र में कार्यरत स्मृति ने एक सुरक्षित कॉरपोरेट करियर को अलविदा कहकर गाय के गोबर से सजावटी और उपयोगी वस्तुएं बनाने का फैसला किया। इस नए काम को शुरू करने से पहले वे हर महीने 60 हजार रुपये का वेतन कमा रही थीं, लेकिन उन्होंने पारंपरिक संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और प्रकृति को बचाने के उद्देश्य से इस अनोखे व्यवसाय की नींव रखी। आज उनके बनाए हस्तनिर्मित उत्पाद ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से ग्राहकों द्वारा खूब पसंद किए जा रहे हैं।
गोबर से तैयार हो रही हैं कलात्मक वस्तुएं
स्मृति पालीवाल अपने इस उद्यम के जरिए गाय के गोबर से कई तरह की दैनिक और सजावटी चीजें तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों में पारंपरिक पूजा के दीपक, सुगंधित धूपबत्ती, घर के मुख्य द्वार पर सजने वाले तोरण और खूबसूरत फोटो फ्रेम प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी वस्तुओं को तैयार करने में किसी भी तरह के हानिकारक रसायनों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। यह पूरी प्रक्रिया शून्य अपशिष्ट के सिद्धांत पर काम करती है, क्योंकि यदि कोई उत्पाद टूट जाता है या पुराना हो जाता है, तो उसे आसानी से गमलों या बगीचों में जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
महिला कारीगरों को मिला रोजगार का जरिया
इस अनूठी पहल ने न सिर्फ गाय के गोबर के पारंपरिक महत्व को आधुनिक रूप में स्थापित किया है, बल्कि स्थानीय महिलाओं के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोले हैं। स्मृति अपने उद्यम में महिला कारीगरों की मदद लेती हैं और उन्हें इन कलाकृतियों के निर्माण कार्य से जोड़ती हैं। इस कदम से स्थानीय पृष्ठभूमि की महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल रही है। घर के काम के साथ-साथ वे इस रचनात्मक काम से जुड़कर सम्मानजनक आय अर्जित कर रही हैं, जिससे इलाके में महिला सशक्तिकरण को सीधा बढ़ावा मिल रहा है।
शुरुआती झिझक के बाद बढ़ा लोगों का भरोसा
किसी भी लीक से हटकर शुरू किए गए काम की तरह स्मृति के सामने भी शुरुआत में कई चुनौतियां आईं। शुरुआती दौर में लोग गाय के गोबर से बने सजावटी सामान को अपनाने में हिचकिचाते थे और इससे दूरी बनाए रखते थे। लोगों को यह समझाना काफी मुश्किल था कि गोबर से बेहद आकर्षक, मजबूत और टिकाऊ उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। स्मृति और उनकी टीम ने लगातार प्रयास करते हुए उपभोक्ताओं को गोबर के वैज्ञानिक, पारंपरिक और पर्यावरणीय फायदों के बारे में जागरूक किया। जब लोगों ने इन उत्पादों की बेहतरीन फिनिशिंग और उपयोगिता देखी, तो उनकी सोच बदली और अब स्थानीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।
नए उद्यमियों को दे रही हैं स्टार्टअप का प्रशिक्षण
अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के साथ-साथ स्मृति पालीवाल अन्य लोगों को भी इस दिशा में आगे आने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे इच्छुक लोगों को ऐसे ईको फ्रेंडली उद्यम शुरू करने के लिए बाकायदा ट्रेनिंग भी मुहैया कराती हैं। उनका उद्देश्य ऐसे नवाचारों को व्यापक स्तर पर फैलाना है ताकि केमिकल और प्लास्टिक आधारित सजावटी उत्पादों का विकल्प तैयार हो सके और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद मिले।



















