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कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमालसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 1

कबाड़ से बनी अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल जो पीछे भी चलती है, पूर्णिया के 55 वर्षीय मिस्त्री का कमाल

बिहार के पूर्णिया में रहने वाले 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री पवन कुमार भगत ने एक अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल बनाई है, जो मात्र एक घंटे में चार्ज होकर 70 किलोमीटर चलती है और इसमें रिवर्स गियर भी लगा है।

रिया मेननरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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नया करने या कुछ नया सीखने के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। प्रतिभा और अनोखी सोच कभी भी किसी बड़े बदलाव को जन्म दे सकती है। बिहार के पूर्णिया जिले के एक 50 वर्षीय बिजली मिस्त्री ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। उन्होंने अपने हुनर और तकनीकी समझ का इस्तेमाल करके एक ऐसी इलेक्ट्रिक साइकिल तैयार की है, जो इन दिनों सड़कों पर लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने और परिवहन के खर्च को कम करने के लिए उन्होंने इस साइकिल का निर्माण किया है।

महंगी गाड़ियों के विकल्प के रूप में जन्मा यह विचार

पूर्णिया के रानीपतरा (लोखड़ा) इलाके के रहने वाले पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं। वे पिछले कई वर्षों से बिजली का काम करके अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। आज के समय में जब गाड़ियां बेहद महंगी हो चुकी हैं, तब अपने सीमित बजट में गाड़ी खरीदना उनके लिए काफी कठिन काम था। इसी आर्थिक आवश्यकता ने उन्हें कुछ नया करने की प्रेरणा दी। अपने काम को आसान और किफायती बनाने के लिए उन्होंने सामान्य साइकिल को इलेक्ट्रिक साइकिल में बदलने का फैसला किया। पवन कुमार साल 2017 से अब तक ऐसी तीन से चार इलेक्ट्रिक साइकिलें बना चुके हैं, जिन्हें लोगों ने अच्छे दामों पर खरीद भी लिया है।

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घर के कबाड़ और ऑनलाइन पार्ट्स से मात्र 3 दिनों में तैयार

पवन कुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने एक नई इलेक्ट्रिक साइकिल बनाने के लिए घर में पड़े कबाड़ के सामान और इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन मंगाए गए कुछ पुर्जों का इस्तेमाल किया। उन्होंने केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से इस शानदार साइकिल को असेंबल कर दिया। इस पूरी साइकिल को बनाने में उनका लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है। अब यह साइकिल जब भी सड़क पर निकलती है, तो लोग इसे कौतूहल से देखने लगते हैं।

70 किलोमीटर का सफर, डिजिटल मीटर और रिवर्स गियर

इस देसी ई-साइकिल की तकनीकी विशेषताएं किसी आधुनिक इलेक्ट्रिक बाइक से कम नहीं हैं। पवन कुमार के अनुसार, इसे पूरी तरह चार्ज होने में मात्र 1 घंटे का समय लगता है। एक बार फुल चार्ज होने के बाद यह साइकिल आसानी से 70 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है। स्थानीय बाजार से खरीदे गए पार्ट्स और देसी जुगाड़ तकनीक की मदद से बनी इस साइकिल में एक डिजिटल स्पीड मीटर भी लगाया गया है। इस साइकिल की सबसे अनोखी विशेषता इसका रिवर्स गियर है, जो आमतौर पर कारों में देखने को मिलता है। इस गियर की वजह से साइकिल को आगे चलाने के साथ-साथ पीछे भी दौड़ाया जा सकता है। पवन रोजाना इसी साइकिल पर सवार होकर रानीपतरा से पूर्णिया, खुश्कीबाग और आसपास के अन्य इलाकों में अपने बिजली के काम के लिए जाते हैं।

पैसे की बचत के साथ पर्यावरण की सुरक्षा

पवन कुमार भगत का मानना है कि इस अनोखे आविष्कार से उनके पैसे की बड़ी बचत हो रही है। इस साइकिल की वजह से अब उन्हें पेट्रोल या डीजल पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते। इसके साथ ही, यह पूरी तरह से बैटरी चालित होने के कारण पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाती है। आज के महंगाई के दौर में यह साइकिल उनके काम के लिए बेहद उपयोगी, सस्ती और पर्यावरण अनुकूल साबित हो रही है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह नवाचार दर्शाता है कि कैसे कम खर्च में स्थानीय स्तर पर पर्यावरण अनुकूल परिवहन विकल्प तैयार किए जा सकते हैं, जिससे आम लोगों को महंगे ईंधन से राहत मिल सकती है।
  • पूर्णिया (बिहार) में: स्थानीय निवासियों के लिए पवन कुमार भगत का यह प्रयास कम दूरी की यात्रा के लिए एक किफायती और प्रदूषण मुक्त मिसाल पेश करता है।

प्रेरणा और सीख

  • समस्या को अवसर में बदलना: महंगी गाड़ियों की कमी को पवन कुमार ने अपनी रचनात्मकता के लिए प्रेरणा बनाया और खुद ही अपनी गाड़ी तैयार कर ली।
  • कबाड़ का सही उपयोग: बेकार पड़े घरेलू सामानों को मिलाकर एक उपयोगी साधन बनाना दर्शाता है कि संसाधन सीमित होने पर भी बड़ा काम किया जा सकता है।
  • उम्र का कोई बंधन नहीं: 50 वर्ष की उम्र में भी नई तकनीक सीखना और ई-साइकिल बनाना साबित करता है कि हुनर के लिए उम्र मायने नहीं रखती।
  • लगातार प्रयास: साल 2017 से लगातार प्रयोग करते रहना और अब तक कई सफल मॉडल बनाना निरंतर अभ्यास की शक्ति को दिखाता है।

सवाल-जवाब

पवन कुमार भगत कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
पवन कुमार भगत पेशे से एक बिजली मिस्त्री हैं और वे बिहार के पूर्णिया जिले के रानीपतरा (लोखड़ा) के रहने वाले हैं।
इस अनोखी इलेक्ट्रिक साइकिल को बनाने में कितना खर्च और समय लगा?
इसे बनाने में लगभग 70,000 रुपये का खर्च आया है और इसे केवल 3 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार किया गया है।
इस ई-साइकिल की रेंज और चार्जिंग समय क्या है?
यह साइकिल महज 1 घंटे में पूरी तरह चार्ज हो जाती है और इसके बाद आसानी से 70 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है।
इस साइकिल में कौन से विशेष फीचर्स दिए गए हैं?
इसमें डिजिटल स्पीड मीटर लगाया गया है और साथ ही कारों की तरह रिवर्स गियर भी दिया गया है जिससे यह पीछे भी चल सकती है।
रिया मेनन
लेखक के बारे मेंरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता अमृतसर
विशेषज्ञताफूड लेखन, रेसिपी, पाककला रुझान, कुकिंग टिप्स, रेस्तराँ रिव्यू, वैश्विक व्यंजन, घरेलू खाना, फूड संस्कृति, लाइफस्टाइल फूड कंटेंट, पाकशास्त्र

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला के रुझानों, रेसिपी, रेस्तराँ संस्कृति, फूड रिव्यू और खाना बनाने की टिप्स को कवर करती हैं। वे फूड प्रेमियों और घरेलू रसोइयों के लिए दिलचस्प सामग्री साझा करती हैं।

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला पत्रकारिता, रेसिपी विकास, फूड संस्कृति, रेस्तराँ रुझानों और लाइफस्टाइल कुकिंग कंटेंट में विशेषज्ञता रखती हैं। वे रोज़मर्रा के घरेलू खाने के विचारों और पारंपरिक रेसिपी से लेकर आधुनिक फ़्यूज़न व्यंजनों, फूड नवाचारों और डाइनिंग अनुभवों तक — सब कुछ कवर करती हैं। सहज और दिलचस्प कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए रिया वैश्विक व्यंजनों, मौसमी रेसिपी, खाना बनाने की तकनीकों और फूड से जुड़े लाइफस्टाइल रुझानों की पड़ताल करती हैं। उनका काम पाठकों को नए व्यंजन खोजने, अपनी कुकिंग बेहतर बनाने और फूड व पाकशास्त्र की बदलती दुनिया से अपडेट रहने में मदद करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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