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हॉस्टल में कपड़े धोने की दिक्कत से जन्मा 'धोबी जी', पूर्णिया के इंजीनियर ने खड़ा किया लॉन्ड्री टेक स्टार्टअप, 500 लोगों को नौकरीसक्सेस स्टोरी
13 जून 2026, 5:07 pm (46 दिन पहले)· 1

हॉस्टल में कपड़े धोने की दिक्कत से जन्मा 'धोबी जी', पूर्णिया के इंजीनियर ने खड़ा किया लॉन्ड्री टेक स्टार्टअप, 500 लोगों को नौकरी

पूर्णिया के रवि रंजन ने बीटेक के दौरान हॉस्टल की लॉन्ड्री समस्या से प्रेरणा लेकर 2021 में 'धोबी जी' नाम का लॉन्ड्री स्टार्टअप शुरू किया, जो आज चार बड़े शहरों में फैला है और करीब 500 युवाओं को रोजगार दे रहा है।

पढ़ाई खत्म होते ही ज्यादातर युवा नौकरी की तलाश में महानगरों की ओर भागते हैं, लेकिन पूर्णिया के सर्वोदय नगर में रहने वाले रवि रंजन ने इसके ठीक विपरीत रास्ता चुना। बीटेक सॉफ्टवेयर इंजीनियर रवि का बचपन से इरादा साफ था — नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना। अपनी तकनीकी सूझबूझ और लगन के दम पर उन्होंने यह सपना सच कर दिखाया और आज खुद के सफल होने के साथ-साथ 500 से ज्यादा लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।

एक रोजमर्रा की परेशानी, जिसने रास्ता दिखाया

रवि रंजन के मुताबिक इस पूरे विचार की नींव उनके हॉस्टल के दिनों में पड़ी। बीटेक की पढ़ाई के बीच कपड़े धोने की दिक्कत उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई थी — एक तरफ पढ़ाई का दबाव और दूसरी तरफ लॉन्ड्री के लिए इधर-उधर भागना। यहीं उनके मन में एक सवाल कौंधा कि जब आज के दौर में फूड डिलीवरी ऐप से गरमागरम खाना घर तक पहुंच सकता है, तो कपड़े धुलवाने की सुविधा घर बैठे क्यों नहीं मिल सकती। इसी सवाल ने एक स्वदेशी स्टार्टअप का बीज बो दिया।

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कॉलेज की तैयारी से 2021 की शुरुआत तक

रवि ने कॉलेज के दिनों में ही छोटे-छोटे प्रोजेक्ट और वेबसाइट बनाकर अपनी तकनीकी पकड़ मजबूत कर ली थी। यही तैयारी काम आई और साल 2021 में उन्होंने धोबी जी नाम से एक ई-कॉमर्स लॉन्ड्री स्टार्टअप खड़ा कर दिया। उनकी सोच सीधी थी — ग्राहकों और मोहल्ले की लॉन्ड्री दुकानों, दोनों को एक ही डिजिटल मंच पर ले आना। उनके बनाए सॉफ्टवेयर ने कपड़ों के पिकअप, धुलाई और डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया को बेहद आसान बना दिया।

खास बात यह रही कि रवि ने इसे किसी मोटे बाहरी निवेश के बिना ही लॉन्च किया। शुरुआत में उन्होंने सीधे ग्राहकों से जुड़कर सेवा देना शुरू किया, और जैसे-जैसे लोगों का भरोसा बढ़ता गया, उनका हौसला भी ऊंचा होता गया। इस शुरुआती कामयाबी ने उन्हें यकीन दिला दिया कि वे कुछ बड़ा कर सकते हैं — और फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे और नोएडा तक फैला नेटवर्क

आज रवि का कारोबार पूर्णिया तक सीमित नहीं है। उन्होंने चेन्नई, बेंगलुरु, पुणे और नोएडा जैसे बड़े शहरों तक अपना नेटवर्क पहुंचा दिया है। धोबी जी लॉन्ड्री ओएस के जरिए वे 150 से अधिक लॉन्ड्री सेंटरों को अपनी तकनीकी सेवा दे रहे हैं। ग्राहकों की शिकायतों और इस क्षेत्र की तकनीकी अड़चनों को बारीकी से समझते हुए उन्होंने एक बेहतर पिकअप एंड डिलीवरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर तैयार किया। उनकी कंपनी अब तकनीक के सहारे एक पूरा सिस्टम चला रही है, जिसके दम पर करीब 500 युवाओं को रोजगार के मौके मिले हैं।

छोटे शहर से बड़ी मिसाल

रवि रंजन का यह सफर एक साफ संदेश देता है — अगर समस्या को सुलझाने की नजर और पक्का इरादा हो, तो अपने ही शहर में रहकर भी वैश्विक स्तर का स्टार्टअप गढ़ा जा सकता है। पूर्णिया जैसे छोटे शहर से निकलकर देश के महानगरों में पहचान बनाने वाले रवि आज युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। उनकी कहानी बताती है कि आत्मनिर्भर भारत का सपना ऐसे ही देसी नवाचारों से आकार लेता है।

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