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झाड़ू-पोछा से टीवी की 'तुलसी' बनने तक, पिता की शर्त ने बदल दी स्मृति ईरानी की किस्मतसक्सेस स्टोरी
3 घंटे पहले· 3

झाड़ू-पोछा से टीवी की 'तुलसी' बनने तक, पिता की शर्त ने बदल दी स्मृति ईरानी की किस्मत

मैकडॉनल्ड्स में महीने के 1,500 रुपये के लिए बर्तन धोने वाली स्मृति ईरानी ने पिता की एक सख्त शर्त और कड़ी मेहनत के दम पर टीवी की सबसे मशहूर 'तुलसी वीरानी' बनकर करोड़ों की मालकिन बनने तक का सफर तय किया।

रिया मेननरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता 4 मिनट पढ़ें AI के लिए
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टीवी की दुनिया में 'पार्वती', 'अक्षरा', 'सिमर' और 'गोपी बहू' जैसे किरदार दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज करते आए हैं, लेकिन इनमें से एक ऐसी 'बहू' भी है जिसने सिर्फ पर्दे पर नहीं बल्कि असल जिंदगी में भी अपने संघर्ष से लाखों लोगों को हौसला दिया है। कभी सिर्फ 1500 रुपये महीने की नौकरी के लिए मैकडॉनल्ड्स में बर्तन धोने और झाड़ू-पोछा लगाने वाली यह लड़की आज करोड़ों की मालकिन है और टीवी की सबसे यादगार बहुओं में गिनी जाती है। हम बात कर रहे हैं भारतीय टेलीविजन की सबसे लोकप्रिय 'बहू' यानी 'तुलसी' का किरदार निभाने वालीं स्मृति ईरानी का। उनकी कहानी बताती है कि सपनों को पूरा करने के लिए सिर्फ हौसला और मेहनत ही काफी होती है, चाहे शुरुआत कितनी भी छोटी क्यों न हो।

मिडिल क्लास परिवार से शुरू हुआ सफर

एक मिडिल क्लास परिवार में जन्मी स्मृति ईरानी को बचपन से ही एक्टिंग की दुनिया में नाम कमाने का सपना था। आज भले ही उनके पास करोड़ों की संपत्ति और राजनीति में शीर्ष पद है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले उन्होंने अपनी पहचान और आत्मसम्मान बचाए रखने के लिए बेहद मुश्किल दिन देखे। यही वजह थी कि उन्होंने मैकडॉनल्ड्स में झाड़ू-पोछा लगाने और बर्तन साफ करने जैसा काम करने में भी संकोच नहीं किया, जहां उन्हें महीने के सिर्फ 1,500 रुपये मिलते थे। उस दौर में पैसों की तंगी और भविष्य की अनिश्चितता के बावजूद उन्होंने कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। उस दौर में शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यही लड़की आगे चलकर टीवी और राजनीति दोनों में इतिहास रचेगी।

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ब्यूटी पेजेंट और पिता की सख्त शर्त

स्मृति ईरानी ने एक ब्यूटी पेजेंट में हिस्सा लेने का फैसला किया, लेकिन इसके लिए उन्हें 1 लाख रुपये की जरूरत थी। उनके पिता इस रकम को कर्ज के तौर पर देने को तैयार हुए, मगर उन्होंने एक सख्त शर्त रखी थी कि अगर वह तय समय में यह पैसा नहीं लौटा पाईं तो उन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करनी होगी। स्मृति को अपनी काबिलियत पर पूरा यकीन था, इसलिए उन्होंने बिना डरे यह चुनौती स्वीकार कर ली। पेजेंट के दौरान उन्हें कई उपहार मिले, जिनकी मदद से उन्होंने 60,000 रुपये तो जुटा लिए, लेकिन बाकी बची रकम चुकाने के लिए उन्हें एक नौकरी की सख्त जरूरत थी।

'फाउंडेशनल जॉब' का वो सच जिसने सब बदल दिया

निलेश मिश्रा को दिए एक पुराने इंटरव्यू में स्मृति ईरानी ने अपनी जिंदगी के इस सबसे कठिन दौर का खुलासा किया था। उन्होंने बताया था कि जब वह नौकरी की तलाश में मैकडॉनल्ड्स पहुंचीं, तब वहां सिर्फ दो पद खाली थे। उन्हें बताया गया कि यह एक 'फाउंडेशनल जॉब' है। जब स्मृति ने इसका मतलब पूछा, तो पता चला कि उन्हें वहां झाड़ू लगाने, पोछा मारने और बर्तन साफ करने का काम करना होगा। उन्होंने उस इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने बिना किसी झिझक के 1,500 रुपये प्रति माह की यह नौकरी स्वीकार कर ली। स्मृति ने करीब 6 हफ्तों तक यह काम किया और सिर्फ अपने इकलौते साप्ताहिक अवकाश के दिन ही ऑडिशन देने जाया करती थीं। इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की तरफ कदम बढ़ाती रहीं।

तुलसी वीरानी के किरदार ने बदली किस्मत

इसी मेहनत और लगन का नतीजा था कि स्मृति को टीवी पर पहला बड़ा ब्रेक मिला। निर्माता एकता कपूर ने उन्हें अपने सुपरहिट धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में 'तुलसी वीरानी' के किरदार के लिए चुना। इस शो ने उन्हें रातों-रात घर-घर में पहचान दिला दी और वह टीवी की सबसे चहेती बहुओं में शुमार हो गईं। यह धारावाहिक भारत के लगभग हर घर में देखा जाता था और तुलसी वीरानी का किरदार दर्शकों के लिए आदर्श बहू की मिसाल बन गया था।

अभिनय के बाद राजनीति में एंट्री

सालों तक टीवी पर राज करने के बाद स्मृति ईरानी ने राजनीति का रुख किया। वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री बनीं। इसके साथ ही वह देश की पहली महिला मानव संसाधन विकास यानी एचआरडी मंत्री और कपड़ा मंत्री भी रह चुकी हैं। अभिनय से राजनीति तक इतनी बड़ी छलांग लगाने वाले कलाकार बहुत कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन स्मृति ईरानी ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है।

17 साल बाद टीवी पर ऐतिहासिक वापसी

लंबे समय तक राजनीति और समाज सेवा में सक्रिय रहने के बाद स्मृति ईरानी ने जुलाई 2025 में पूरे 17 साल बाद छोटे पर्दे पर अपनी ऐतिहासिक वापसी की। उन्होंने 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के रीबूट वर्जन में एक बार फिर अपने प्रतिष्ठित किरदार 'तुलसी वीरानी' को जीवंत किया है, जिसे दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं।

करोड़ों की मालकिन, जानें कुल संपत्ति

2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक स्मृति ईरानी के पास 8 करोड़ 75 लाख 24 हजार रुपये की संपत्ति है, जबकि उनके पति जुबिन ईरानी के पास कुल 8 करोड़ 81 लाख 77 हजार रुपये की संपत्ति है। मैकडॉनल्ड्स में बर्तन धोने से लेकर देश की सबसे चर्चित हस्तियों में शुमार होने तक का उनका यह सफर आज भी लाखों लोगों को संघर्ष के दौर में हार न मानने की सीख देता है।

इसका आप पर असर

  • टीवी दर्शकों के लिए: 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' में तुलसी वीरानी की वापसी देख रहे दर्शकों के लिए इस किरदार को निभाने वाली स्मृति ईरानी के निजी संघर्ष की यह कहानी शो को और भी दिलचस्प बनाती है।
  • नौकरी और करियर बनाने वालों के लिए: कम सैलरी वाली शुरुआती नौकरी को छोटा समझने के बजाय उसे सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करने का यह उदाहरण उन लोगों के लिए सीख है जो सीमित संसाधनों के साथ करियर शुरू कर रहे हैं।

प्रेरणा और सीख

  • छोटी नौकरी को कमतर मत आंकिए: स्मृति ईरानी ने महीने के सिर्फ 1,500 रुपये वाली 'फाउंडेशनल जॉब' को भी बिना झिझक स्वीकार किया, क्योंकि उनके लिए तात्कालिक जरूरत पूरी करना पहली प्राथमिकता थी।
  • सीमित समय का सही इस्तेमाल करें: नौकरी करते हुए भी उन्होंने अपने सपने का पीछा नहीं छोड़ा और सिर्फ अपने साप्ताहिक अवकाश के दिन ऑडिशन देने जाया करती थीं।
  • खुद पर भरोसा रखें: पिता की सख्त शर्त के बावजूद उन्होंने घबराने के बजाय अपनी काबिलियत पर यकीन करते हुए चुनौती स्वीकार की।
  • एक क्षेत्र की सफलता को सीमा मत बनाइए: टीवी पर वर्षों राज करने के बाद उन्होंने राजनीति जैसे बिल्कुल अलग क्षेत्र में भी खुद को साबित किया।
  • वापसी से मत डरिए: 17 साल बाद भी उन्होंने अपने सबसे मशहूर किरदार में वापसी करने से गुरेज नहीं किया और दर्शकों ने उन्हें फिर से उतने ही प्यार से अपनाया।

सवाल-जवाब

स्मृति ईरानी ने मैकडॉनल्ड्स में क्या काम किया था और उन्हें कितनी सैलरी मिलती थी?
वह मैकडॉनल्ड्स में झाड़ू-पोछा लगाने और बर्तन साफ करने का काम करती थीं, जिसके लिए उन्हें महीने के सिर्फ 1,500 रुपये मिलते थे।
उनके पिता ने कौन सी शर्त पर उन्हें 1 लाख रुपये दिए थे?
पिता ने शर्त रखी थी कि अगर वह तय समय में यह रकम नहीं लौटा पाईं तो उन्हें अपनी मर्जी के खिलाफ शादी करनी होगी।
स्मृति ईरानी को टीवी पर पहला बड़ा ब्रेक कैसे मिला?
निर्माता एकता कपूर ने उन्हें धारावाहिक 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में 'तुलसी वीरानी' के किरदार के लिए चुना, जिसने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।
स्मृति ईरानी ने टीवी पर दोबारा वापसी कब की और किस किरदार में?
उन्होंने जुलाई 2025 में 17 साल बाद 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के रीबूट में एक बार फिर 'तुलसी वीरानी' का किरदार निभाया।
राजनीति में स्मृति ईरानी ने कौन से पद संभाले?
वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में सबसे युवा मंत्री बनीं और देश की पहली महिला मानव संसाधन विकास मंत्री तथा कपड़ा मंत्री भी रहीं।
2024 के चुनावी हलफनामे के मुताबिक स्मृति ईरानी और उनके पति की कुल संपत्ति कितनी है?
स्मृति ईरानी के पास 8 करोड़ 75 लाख 24 हजार रुपये की संपत्ति है, जबकि उनके पति जुबिन ईरानी के पास 8 करोड़ 81 लाख 77 हजार रुपये की संपत्ति है।
रिया मेनन
लेखक के बारे मेंरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता अमृतसर
विशेषज्ञताफूड लेखन, रेसिपी, पाककला रुझान, कुकिंग टिप्स, रेस्तराँ रिव्यू, वैश्विक व्यंजन, घरेलू खाना, फूड संस्कृति, लाइफस्टाइल फूड कंटेंट, पाकशास्त्र

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला के रुझानों, रेसिपी, रेस्तराँ संस्कृति, फूड रिव्यू और खाना बनाने की टिप्स को कवर करती हैं। वे फूड प्रेमियों और घरेलू रसोइयों के लिए दिलचस्प सामग्री साझा करती हैं।

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला पत्रकारिता, रेसिपी विकास, फूड संस्कृति, रेस्तराँ रुझानों और लाइफस्टाइल कुकिंग कंटेंट में विशेषज्ञता रखती हैं। वे रोज़मर्रा के घरेलू खाने के विचारों और पारंपरिक रेसिपी से लेकर आधुनिक फ़्यूज़न व्यंजनों, फूड नवाचारों और डाइनिंग अनुभवों तक — सब कुछ कवर करती हैं। सहज और दिलचस्प कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए रिया वैश्विक व्यंजनों, मौसमी रेसिपी, खाना बनाने की तकनीकों और फूड से जुड़े लाइफस्टाइल रुझानों की पड़ताल करती हैं। उनका काम पाठकों को नए व्यंजन खोजने, अपनी कुकिंग बेहतर बनाने और फूड व पाकशास्त्र की बदलती दुनिया से अपडेट रहने में मदद करता है।

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