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करौंदी गांव के एक कमरे से निकला ऐसा रोबोट जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में करता है बातसक्सेस स्टोरी
2 घंटे पहले· 2

करौंदी गांव के एक कमरे से निकला ऐसा रोबोट जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों में करता है बात

मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के करौंदी गांव में रहने वाले शिवम साहू ने अपने घर के कमरे को एआई लैब में बदलकर एक ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है जो हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में बातचीत करता है।

रिया मेननरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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शहपुरा विकासखंड के करौंदी गांव में रहने वाले युवा नवप्रवर्तक शिवम साहू ने अपने घर के एक साधारण कमरे को एआई लैब में बदलकर एक ऐसा ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है जो हिंदी, अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में बातचीत कर सकता है और वॉइस कमांड समझ सकता है। मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले से जुड़ी यह कहानी अब ग्रामीण भारत की तकनीकी क्षमता की मिसाल बन गई है।

यह रोबोट उपयोगकर्ता की आवाज पहचानता है, उसके सवाल का विश्लेषण करता है और उसी के मुताबिक जवाब देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पहले से रिकॉर्ड किए गए जवाबों को नहीं दोहराता, बल्कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से हर बार नई और असली बातचीत करता है। यही वजह है कि इसे देखने और इसकी कार्यप्रणाली समझने के लिए आसपास के इलाकों से भी लोग करौंदी गांव पहुंच रहे हैं।

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एक कमरे में करीब एक लाख रुपये में खड़ी हुई पूरी लैब

शिवम बताते हैं कि इस पूरे प्रोजेक्ट पर अब तक करीब एक लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। कई उपकरण उन्होंने ऑनलाइन मंगाए, जबकि कई पुर्जे उन्होंने खुद डिजाइन करके बनाए। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने लगातार परीक्षण, सुधार और नवाचार करके इस रोबोट को इसका मौजूदा स्वरूप दिया।

नौकरी छोड़कर रोबोटिक्स और एआई की राह चुनी

शिवम ने जबलपुर के ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया है। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही उनकी रुचि रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तरफ बढ़ने लगी थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी करने के बजाय उन्होंने शोध और नवाचार का रास्ता चुना। यह उनकी पहली कोशिश भी नहीं है, इससे पहले भी वे कमांड आधारित रोबोट और ड्रोन बना चुके हैं।

आपदा प्रबंधन से लेकर रक्षा क्षेत्र तक इस्तेमाल का सपना

शिवम का सपना ऐसे स्वदेशी एआई रोबोट तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल आपदा प्रबंधन, रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सके। उनका मानना है कि अगर ग्रामीण युवाओं को सही संसाधन, तकनीकी मार्गदर्शन और आर्थिक मदद मिल जाए तो वे भी दुनिया के स्तर की तकनीक विकसित कर सकते हैं।

तकनीकी विशेषज्ञों ने बताया गर्व का विषय

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि डिंडौरी जैसे ग्रामीण इलाके से एआई आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट का बनना पूरे मध्यप्रदेश के लिए गर्व की बात है। शिवम साहू की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि संकल्प, मेहनत और नवाचार से ही बड़े काम संभव होते हैं। उनकी यह कोशिश ग्रामीण भारत में तकनीकी क्रांति की नई उम्मीद जगाती है।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि सही मेहनत, लगन और नवाचार से गांव-देहात के युवा भी एआई और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीक में बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं, जो तकनीकी शिक्षा ले रहे युवाओं के लिए प्रेरणा है।
  • डिंडौरी में: करौंदी गांव में बने इस ह्यूमनॉइड रोबोट को देखने आसपास के इलाकों से लोग पहुंच रहे हैं, जिससे इस गांव की पहचान अब तकनीकी नवाचार के एक केंद्र के रूप में बन रही है।

प्रेरणा और सीख

शिवम साहू की कहानी बताती है कि सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।

  • घर को ही लैब बना दिया: महंगी सुविधाओं का इंतजार करने की बजाय शिवम ने अपने घर के एक साधारण कमरे को ही एआई लैब में बदल डाला।
  • नौकरी नहीं, नवाचार चुना: बीटेक के बाद नौकरी की सुरक्षा छोड़कर उन्होंने शोध और नवाचार का जोखिम भरा रास्ता चुना।
  • खुद पुर्जे डिजाइन किए: जरूरी उपकरण आसानी से न मिलने पर उन्होंने खुद पुर्जे डिजाइन करके तैयार किए, यानी संसाधनों की कमी को बहाना नहीं बनने दिया।
  • लगातार सुधार पर भरोसा किया: बार-बार परीक्षण और सुधार करके ही उन्होंने रोबोट को उसका मौजूदा स्वरूप दिया।
  • बड़े मकसद से जुड़ा सपना: उनका लक्ष्य सिर्फ एक रोबोट बनाना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन, रक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में काम आने वाली स्वदेशी तकनीक विकसित करना है।

सवाल-जवाब

शिवम साहू कौन हैं?
शिवम साहू मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले के करौंदी गांव के युवा नवप्रवर्तक हैं, जिन्होंने अपने घर के कमरे को एआई लैब में बदलकर ह्यूमनॉइड रोबोट तैयार किया है।
यह रोबोट कौन-कौन सी भाषाओं में बात कर सकता है?
यह रोबोट हिंदी और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में संवाद कर सकता है और वॉइस कमांड भी समझ सकता है।
इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च हुआ है?
शिवम के मुताबिक अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब एक लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
शिवम ने कहां से पढ़ाई की है?
शिवम ने जबलपुर के ज्ञानगंगा इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया है।
क्या यह रोबोट पहले से तय जवाब देता है?
नहीं, यह रोबोट पहले से रिकॉर्ड जवाब नहीं देता बल्कि आधुनिक एआई तकनीक की मदद से हर बार नई बातचीत करता है।
शिवम का आगे का लक्ष्य क्या है?
शिवम ऐसे स्वदेशी एआई रोबोट बनाना चाहते हैं जिनका इस्तेमाल आपदा प्रबंधन, रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और औद्योगिक क्षेत्रों में हो सके।
रिया मेनन
लेखक के बारे मेंरिया मेननफूड एवं रेसिपी संवाददाता अमृतसर
विशेषज्ञताफूड लेखन, रेसिपी, पाककला रुझान, कुकिंग टिप्स, रेस्तराँ रिव्यू, वैश्विक व्यंजन, घरेलू खाना, फूड संस्कृति, लाइफस्टाइल फूड कंटेंट, पाकशास्त्र

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला के रुझानों, रेसिपी, रेस्तराँ संस्कृति, फूड रिव्यू और खाना बनाने की टिप्स को कवर करती हैं। वे फूड प्रेमियों और घरेलू रसोइयों के लिए दिलचस्प सामग्री साझा करती हैं।

रिया मेनन एक फूड एवं रेसिपी संवाददाता हैं जो पाककला पत्रकारिता, रेसिपी विकास, फूड संस्कृति, रेस्तराँ रुझानों और लाइफस्टाइल कुकिंग कंटेंट में विशेषज्ञता रखती हैं। वे रोज़मर्रा के घरेलू खाने के विचारों और पारंपरिक रेसिपी से लेकर आधुनिक फ़्यूज़न व्यंजनों, फूड नवाचारों और डाइनिंग अनुभवों तक — सब कुछ कवर करती हैं। सहज और दिलचस्प कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए रिया वैश्विक व्यंजनों, मौसमी रेसिपी, खाना बनाने की तकनीकों और फूड से जुड़े लाइफस्टाइल रुझानों की पड़ताल करती हैं। उनका काम पाठकों को नए व्यंजन खोजने, अपनी कुकिंग बेहतर बनाने और फूड व पाकशास्त्र की बदलती दुनिया से अपडेट रहने में मदद करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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