उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में इन दिनों एक महिला किसान अपनी मेहनत और सूझबूझ से खेती की पूरी तस्वीर बदल रही हैं। हरीपुर गांव की रहने वाली रंजना मौर्या ने अपने खेतों में बड़े स्तर पर तुलसी उगाकर हर सीजन लाखों रुपये कमाना शुरू कर दिया है, और यह शानदार कमाई भी बेहद कम मेहनत और कम लागत में हो रही है।
पारंपरिक खेती छोड़कर नकदी फसलों की ओर किसानों का रुख
देश भर के किसान अब सिर्फ गेहूं, धान या दूसरे पारंपरिक अनाज उगाने तक सीमित नहीं रह गए हैं। कम समय और कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की ओर उनका रुझान लगातार बढ़ रहा है, इसी वजह से अब सब्जियां, फल और नकदी फसलें भी बड़े पैमाने पर उगाई जा रही हैं। आजमगढ़ जिले में भी कई प्रगतिशील किसान सब्जियों और फूलों की खेती के साथ-साथ अब व्यावसायिक स्तर पर तुलसी उगाने की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि इस फसल में मुनाफे की गुंजाइश ज्यादा है और जोखिम काफी कम रहता है।
दवा और कॉस्मेटिक कंपनियों तक सीधी पहुंच, इसलिए भारी मांग
तुलसी में मौजूद औषधीय गुणों के कारण इसका इस्तेमाल कई तरह की दवाइयां, सीरप और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स बनाने में किया जाता है, और इसी वजह से यह किसानों के लिए भरोसेमंद कमाई का जरिया बन गई है। बड़ी-बड़ी दवा कंपनियां और व्यापारी किसानों के खेत से सीधे तुलसी खरीद लेते हैं, जिससे किसानों को बिचौलियों के झंझट और अतिरिक्त खर्च से भी छुटकारा मिल जाता है। आजमगढ़ के कई किसान इसी भारी डिमांड का फायदा उठाकर तुलसी की खेती से अच्छी-खासी आमदनी जुटा रहे हैं।
तीन बीघे में हर सीजन 9 से 10 क्विंटल उपज
हरीपुर गांव की रंजना मौर्या भी इसी राह पर चलते हुए बड़े स्तर पर तुलसी की पैदावार कर रही हैं, लेकिन उनका तरीका बाकी किसानों से थोड़ा अलग और कारगर है। वे अपने लगभग तीन बीघे खेत में सिर्फ तुलसी की फसल उगाती हैं, जिससे उन्हें हर सीजन में लगभग 9 से 10 क्विंटल तक की अच्छी-खासी पैदावार मिल जाती है। रंजना बताती हैं कि गर्मी के मौसम में तुलसी के पौधों की मांग बाजार में काफी बढ़ जाती है, इसलिए वे सही समय पर बुवाई करके हर सीजन बढ़िया मुनाफा कमा लेती हैं। खास बात यह है कि उन्हें फसल बेचने के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता, वे अपनी पूरी उपज सीधे फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी यानी FPO को बेच देती हैं।
सिर्फ 90 दिन में तैयार फसल, सीजन में डेढ़ लाख तक की बचत
रंजना का कहना है कि तुलसी की खेती उनके जैसे किसान भाई-बहनों के लिए कमाई का एक बेहतरीन जरिया बन सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो पारंपरिक फसलों से हटकर कुछ नया आजमाना चाहते हैं। हर सीजन तुलसी बेचकर उन्हें करीब एक से डेढ़ लाख रुपये की बचत आसानी से हो जाती है। सबसे राहत की बात यह है कि तुलसी उगाने का तरीका बेहद सीधा-साधा है और इसमें दूसरी फसलों के मुकाबले मेहनत भी काफी कम लगती है। खेत तैयार करने के लिए पहले उसकी अच्छी तरह जुताई की जाती है, इसके बाद तुलसी के पौधों की रोपाई की जाती है। रंजना बताती हैं कि रोपाई के ठीक 90 दिन बाद ही यह फसल पूरी तरह कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिसे वे खुद काटकर सीधे कंपनी को बेच देती हैं।
बाजार में वन तुलसी की सबसे ज्यादा मांग
तुलसी की लगभग हर वैरायटी में औषधीय गुण मौजूद होते हैं, लेकिन आजमगढ़ के ज्यादातर किसान वन तुलसी उगाना ज्यादा पसंद करते हैं। बाजार और बड़ी कंपनियों में इसी वैरायटी की मांग सबसे ज्यादा रहती है, यही वजह है कि यहां के खेतों में सबसे ज्यादा वन तुलसी ही लहलहाती नजर आती है।













