जो इंजीनियर करीब दो दशक तक टेक इंडस्ट्री में करियर बनाने में जुटा रहे, वह अमूमन उस मुकाम पर पहुंचकर उसे छोड़ने की सोचता तक नहीं, लेकिन जान्हवी अजीत राव ने ठीक यही किया. 18 साल तक टेक सेक्टर में काम करने के बाद उन्होंने अपना इंजीनियरिंग करियर पूरी तरह छोड़ दिया और 40 साल की उम्र में मेडिकल कॉलेज की क्लास में बैठना शुरू कर दिया. आज वे अमेरिका में डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस कर रही हैं और बीच उम्र में जिंदगी का बिल्कुल नया अध्याय शुरू करने का उनका यह फैसला अब सोशल मीडिया पर लोगों को गहरे तक प्रेरित कर रहा है.
टेक इंडस्ट्री में बीते 18 साल
जान्हवी अजीत राव का जन्म महाराष्ट्र के औरंगाबाद में हुआ था. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो से इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर डिग्री हासिल की, जो अमेरिका के पश्चिमी तट के जाने माने इंजीनियरिंग कैंपसों में गिना जाता है. इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सांता बारबरा से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की और अमेरिका की कई टॉप टेक कंपनियों में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर काम करना शुरू किया. साल 2002 में वे अपने इंजीनियर पति के साथ बेंगलुरु शिफ्ट हो गईं और लंबे समय बाद भारत लौटीं. यहां आकर उन्होंने कई बड़ी टेक कंपनियों में काम किया और बाद में डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में अपनी खुद की टेक्नोलॉजी कंपनी भी शुरू कर दी. देखने में उनका करियर पूरी तरह सेटल और सुरक्षित लग रहा था.
एक बीमारी ने बदल दी सोच की दिशा
करियर जब बुलंदियों पर था, तभी साल 2003 में जान्हवी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था. उन्हें रूमेटॉयड अर्थराइटिस नाम की ऑटोइम्यून बीमारी का पता चला, जो जोड़ों को प्रभावित करती है और लंबे समय तक तकलीफ देने वाली बीमारी है. अपने ही इलाज के दौरान उन्होंने बेहद करीब से देखा कि किस तरह डॉक्टर मरीजों की तकलीफ कम करके उनकी पूरी जिंदगी बदल देते हैं और उन्हें नए सिरे से जीने का मौका देते हैं. डॉक्टरों की यह सेवा भावना और इलाज की यह ताकत जान्हवी के जेहन में गहरे तक बैठ गई. यहीं से उनके मन में इंजीनियरिंग को अलविदा कहकर मेडिकल की दुनिया में कदम रखने का विचार पनपने लगा.
40 की उम्र में मेडिकल कॉलेज की दहलीज पर
साल 2013 में, 40 साल की उम्र में जान्हवी ने बेंगलुरु के एम.एस. रमैया मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन लिया. करीब दो दशक तक बिल्कुल अलग प्रोफेशन में रहने के बाद यह फैसला उनके लिए आसान नहीं रहा होगा. दोबारा क्लासरूम में लौटना, रात-रात भर जागकर मोटी-मोटी मेडिकल किताबें रटना और अपनी उम्र से लगभग आधी उम्र के साथियों के साथ मुकाबला करना, ऐसी चुनौतियां थीं, जिनसे इस उम्र में कोई मुश्किल से ही जूझना चाहेगा. लेकिन जान्हवी का फोकस पूरे रास्ते डिगा नहीं. पूरे 8 साल की लगातार मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर ली, जो एक इंजीनियर से डॉक्टर बनने के उनके नए सफर की औपचारिक शुरुआत साबित हुई.
अब अमेरिका में मरीजों का इलाज कर रही हैं जान्हवी
जान्हवी की यह कहानी ज्यादा लोगों तक तब पहुंची, जब विकास ऑलविस नाम के एक यूजर ने 3 जुलाई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसे शेयर किया. इस पोस्ट के मुताबिक, 47 साल की उम्र में जान्हवी फिलहाल एमडी की पढ़ाई कर रही हैं और साथ ही अमेरिका में प्राइमरी केयर फिजिशियन के तौर पर रोजाना मरीजों का इलाज भी कर रही हैं. यह पोस्ट सामने आने के बाद से इंटरनेट पर लोगों की तारीफों का तांता लग गया है और लोग एक कामयाब करियर के बीच खुद को फिर से गढ़ने के उनके इस साहस को सलाम कर रहे हैं. इस पोस्ट पर एक यूजर ने लिखा कि इंसान नया कुछ सीखने के लिए कभी बूढ़ा नहीं होता और शुरुआत करने के लिए कभी देर नहीं होती. जान्हवी की पूरी कहानी में डिग्रियों और नौकरियों की टाइमलाइन से ज्यादा असल मायने इसी संदेश के हैं.













