मुजफ्फरपुर की मनोरमा सिंह को आज लोग मशरूम क्वीन के नाम से जानते हैं, लेकिन यह पहचान उन्हें आसानी से नहीं मिली। कभी उन्हें मशरूम का बीज यानी स्पॉन खरीदने के लिए करीब 50 किलोमीटर दूर समस्तीपुर स्थित पूसा कृषि विश्वविद्यालय तक जाना पड़ता था, और वह भी महीनों पहले ऑर्डर बुक कराकर और अग्रिम भुगतान करके। आज वही मनोरमा खुद अपनी लैब में स्पॉन तैयार करती हैं और रोजाना 200 से 400 किलोग्राम बीज बिहार के अलावा कई राज्यों और नेपाल तक भेज रही हैं।
बीज की किल्लत से मिली बिजनेस की प्रेरणा
मनोरमा बताती हैं कि मशरूम की खेती शुरू करने के शुरुआती दिनों में सबसे बड़ी दिक्कत गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता ही थी। पूसा कृषि विश्वविद्यालय के अलावा भरोसेमंद जरिया कोई और था नहीं, इसलिए हर बार वहीं जाना पड़ता था, ऑर्डर पहले से बुक कराना पड़ता था और पैसे भी एडवांस में चुकाने पड़ते थे। इसी परेशानी से निकलने के लिए मनोरमा ने खुद स्पॉन बनाने का प्रशिक्षण लिया और मुजफ्फरपुर के सरैया प्रखंड स्थित अपने मायके, बखरा-अभीछपरा गांव में अपनी लैब शुरू की। यह लैब पिछले 12 वर्षों से लगातार चल रही है।
बिहार से नेपाल तक पहुंच रहा मनोरमा का बीज
आज उनकी लैब में तैयार स्पॉन मुजफ्फरपुर के अलावा बिहार के अलग-अलग जिलों, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नेपाल तक भेजा जाता है। करीब 500 किसान सीधे उनसे जुड़े हैं, जो उनके तैयार किए गए बीज से मशरूम की खेती कर रहे हैं। इससे इन किसानों को वह भागदौड़ नहीं करनी पड़ती, जो कभी मनोरमा को खुद करनी पड़ी थी। उनकी लैब में बटन मशरूम, ऑयस्टर मशरूम, किंग ऑयस्टर मशरूम और पैडी स्ट्रॉ यानी पुआल मशरूम, इन सभी किस्मों का स्पॉन तैयार किया जाता है।
पूरी तरह वैज्ञानिक विधि से बनता है स्पॉन
मनोरमा के मुताबिक स्पॉन तैयार करने की पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक तरीके से होती है। सबसे पहले गेहूं को अच्छी तरह साफ करके उबाला जाता है, फिर उसे सुखाया जाता है। इसके बाद उसमें कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम सल्फेट मिलाकर पॉलीबैग में भर दिया जाता है। इन बैगों को ऑटोक्लेव मशीन में करीब दो घंटे 15 मिनट तक स्टरलाइज किया जाता है। ठंडा होने के बाद लेमिनार एयर फ्लो मशीन की मदद से इसमें मशरूम कल्चर डाला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ऑयस्टर मशरूम का स्पॉन करीब सात दिनों में और बटन मशरूम का स्पॉन लगभग 15 दिनों में इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाता है।
हर महीने पांच लाख रुपये तक मुनाफा
मनोरमा बताती हैं कि सिर्फ स्पॉन बेचकर ही उन्हें हर महीने करीब पांच लाख रुपये तक का मुनाफा हो जाता है। उनका कहना है कि अगर किसान सही तकनीक अपनाएं और अच्छी गुणवत्ता का बीज इस्तेमाल करें तो मशरूम की खेती कम लागत में भी अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है। एक समय बीज के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली मनोरमा आज खुद सैकड़ों किसानों की जरूरत पूरी कर रही हैं, और उनकी यह कहानी बिहार के कई किसानों और महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है।













