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खंडवा में लायंस क्लब की अनूठी पहल, जिला अस्पताल के बाहर दो दशक से रोज मिटा रहे सैकड़ों लोगों की भूखसक्सेस स्टोरी
21 जुल॰ 2026, 9:46 am (100 दिन पहले)· 1

खंडवा में लायंस क्लब की अनूठी पहल, जिला अस्पताल के बाहर दो दशक से रोज मिटा रहे सैकड़ों लोगों की भूख

मध्य प्रदेश के खंडवा में लायंस क्लब पिछले 24 वर्षों से जरूरतमंदों और मरीजों के परिजनों के लिए एक मुफ्त भोजनालय चला रहा है। बिना किसी सरकारी मदद के चलने वाले इस केंद्र में हर दिन सैकड़ों लोगों को कुर्सी-टेबल पर बैठाकर आदर के साथ भोजन परोसा जाता है।

जब किसी परिवार में कोई मेडिकल इमरजेंसी आती है, तो वह न केवल मानसिक तनाव लेकर आती है बल्कि आर्थिक रूप से भी लोगों को तोड़ देती है। ऐसे मुश्किल वक्त में ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए खंडवा आने वाले मरीजों के परिजनों को एक बड़ी राहत मिलती है। खंडवा जिला अस्पताल के ठीक बाहर हर दिन इंसानियत की एक बेहद खूबसूरत मिसाल देखने को मिलती है। यहां एंबुलेंस की आवाजाही और परेशान तीमारदारों की भीड़ के बीच एक मुफ्त भोजनालय उम्मीद की किरण बनकर खड़ा है। पिछले 24 सालों से यह सामुदायिक रसोई लगातार काम कर रही है, ताकि अस्पताल में अपने परिजनों का इलाज करा रहे लोगों को खाली पेट न सोना पड़े।

पूरी इज्जत के साथ परोसा जाता है खाना

इस सराहनीय भोजन केंद्र का संचालन लायंस क्लब खंडवा द्वारा किया जाता है। इतने सालों में इस साधारण सी पहल ने एक बड़े और सम्मानित अभियान का रूप ले लिया है। इस रसोई को चलाने वाले स्वयंसेवकों का स्पष्ट मानना है कि मदद कभी भी किसी का स्वाभिमान कम करने वाली नहीं होनी चाहिए। अक्सर देखा जाता है कि मुफ्त राशन या भोजन के लिए लोगों को लंबी लाइनों में घंटों खड़ा रहना पड़ता है, लेकिन यहां का नज़ारा बिल्कुल अलग है। इस केंद्र में आने वाले लोगों को बाकायदा टेबल और कुर्सियों पर सम्मान के साथ बैठाया जाता है। इसके बाद सेवादार खुद उनके पास जाकर उन्हें गरमा-गरम खाना परोसते हैं। यह आदर भाव उन परिवारों को एक बड़ा सुकून देता है जो दिन भर अस्पताल के वार्डों में भागदौड़ करके बुरी तरह थक चुके होते हैं।

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पौष्टिक और शुद्ध आहार की व्यवस्था

हर दिन सैकड़ों लोगों की भूख मिटाने के लिए एक मजबूत व्यवस्था और अटूट लगन की जरूरत होती है। लायंस क्लब के सचिव घनश्याम वाधवा ने इस अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र पर रोजाना दो वक्त का खाना खिलाया जाता है। सुबह और शाम के समय तैयार होने वाले इस भोजन में दाल, चावल, ताजी सब्जी और गर्म रोटियां शामिल होती हैं। वाधवा के अनुसार, यहां हर रोज 100 से लेकर 200 जरूरतमंद लोग अपनी भूख शांत करते हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन तीमारदारों की होती है जो महंगे होटलों में खाने का खर्च नहीं उठा सकते। महिलाओं और छोटे बच्चों को एक साथ बैठकर भरपेट खाना खाते हुए देखना स्वयंसेवकों को एक गहरी संतुष्टि देता है और यही आत्मिक सुख उन्हें इस काम को बिना रुके जारी रखने की ताकत देता है।

जनता के सहयोग से चल रही रसोई

करीब पच्चीस सालों से चल रहे इस महाभियान की सबसे खास बात इसकी आर्थिक आत्मनिर्भरता है। यह विशाल भोजनालय किसी भी तरह के सरकारी अनुदान या मदद पर निर्भर नहीं है। इसे पूरी तरह से स्थानीय समाजसेवियों, क्लब के सदस्यों और आम जनता के उदार सहयोग से चलाया जा रहा है। इतने दशकों में यह रसोई खंडवा के सामाजिक जीवन का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। शहर के लोग अपने जीवन के खास मौकों पर यहां का खर्च उठाने के लिए खुद आगे आते हैं। चाहे किसी का जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह हो या फिर किसी अपने की पुण्यतिथि, लोग इस भोजनालय में दान देकर अपनी खुशियां बांटना पसंद करते हैं। जनता की यही अटूट भागीदारी साबित करती है कि अगर समाज ठान ले, तो बिना किसी सरकारी सिस्टम के भी इंसानियत की इतनी बड़ी मिसाल कायम की जा सकती है।

सवाल-जवाब

खंडवा जिला अस्पताल के बाहर मुफ्त भोजन कौन कराता है?
यह मुफ्त भोजन सेवा लायंस क्लब खंडवा द्वारा चलाई जाती है।
यह भोजनालय कितने सालों से चल रहा है?
यह सामुदायिक भोजनालय पिछले लगभग 24 वर्षों से लगातार काम कर रहा है।
इस रसोई में रोज कितने लोगों को खाना खिलाया जाता?
यहां रोजाना सुबह और शाम के समय लगभग 100 से 200 जरूरतमंद लोगों को भोजन परोसा जाता है।
क्या लायंस क्लब को इसके लिए सरकारी मदद मिलती है?
नहीं, इस पहल के लिए कोई सरकारी अनुदान नहीं लिया जाता। यह पूरी तरह से समाजसेवियों, क्लब के सदस्यों और आम जनता के सहयोग से चलती है।
इस भोजनालय के मेन्यू में क्या शामिल होता है?
यहां लोगों को खाने में दाल, चावल, ताजी सब्जी और रोटियां परोसी जाती हैं।
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