उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में खेती के तौर तरीकों में बदलाव देखने को मिल रहा है। यहां के तराई क्षेत्र में पारंपरिक तौर पर गन्ने की खेती पर निर्भर रहने वाले काश्तकार अब बागवानी फसलों की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। खासकर फूलबेहड़ इलाके के ग्रामीण क्षेत्रों में केले की बड़े पैमाने पर रोपाई की जा रही है। स्थानीय मंडियों और बाजारों में फलों की लगातार बनी रहने वाली मांग को देखते हुए किसान इसे अपनी आमदनी बढ़ाने का एक मजबूत और व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं।
फूलबेहड़ के किसान ने 20 बीघे में शुरू किया उत्पादन
फूलबेहड़ इलाके के किसान श्याम मिश्रा ने गन्ने के स्थान पर बड़े रकबे में बागवानी का फैसला किया। श्याम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने लगभग 20 बीघा खेत में केले के पौधे रोपे हैं। उनके अनुसार यदि फसल का समुचित विकास हो, उत्पादन बेहतर मिले और मंडियों में अनुकूल दाम उपलब्ध हों तो यह फसल बढ़िया मुनाफा देती है। इसके साथ ही उन्होंने मौसम की मार को लेकर भी सचेत किया। तेज हवाओं का चलना, बेमौसम भारी बरसात और विपरीत मौसमी परिस्थितियां पौधों को गिरा सकती हैं, जिससे किसानों को बड़े नुकसान का जोखिम भी झेलना पड़ता है।
जी9 गोल्ड किस्म की खासियत और समय चक्र
श्याम मिश्रा के अनुसार उन्होंने अपने खेतों में जी9 गोल्ड किस्म के पौधे लगाए हैं, जिसकी लोकप्रियता क्षेत्र के किसानों में लगातार बढ़ रही है। केले की रोपाई करने के बाद पूरी फसल कटाई के लिए तैयार होने में करीब 14 से 15 महीने का वक्त लेती है। वर्तमान समय में थोक मंडियों में केले की बिक्री 800 रुपये से लेकर 1000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर दर्ज की जा रही है। ऐसे भाव मिलने पर किसानों को अपनी लागत के मुकाबले काफी संतोषजनक रिटर्न हासिल होता है।
प्रति बीघा पौधों की संख्या और जरूरी सावधानियां
केले की व्यावसायिक खेती शुरू करने के लिए खेतों में पौधों की सघनता का सही प्रबंधन बेहद जरूरी है। आमतौर पर एक बीघा जमीन में लगभग 380 पौधे लगाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों और अनुभवी काश्तकारों का मानना है कि खेत तैयार करने से पहले मिट्टी की जांच, सिंचाई की नियमित व्यवस्था, अतिरिक्त पानी की निकासी का प्रबंध, कतारों और पौधों के बीच की सटीक दूरी तथा नजदीकी बाजार की पहुंच का आकलन पहले ही कर लेना चाहिए ताकि फसल कटाई के समय कोई परेशानी न आए।
उद्यान विभाग दे रहा 40 प्रतिशत तक अनुदान
बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए सरकारी स्तर पर वित्तीय मदद भी दी जा रही है। लखीमपुर के जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि जो भी किसान केले की खेती शुरू करना चाहते हैं, उन्हें विभाग की योजनाओं के तहत ऑनलाइन आवेदन जमा करना होता है। लाभार्थियों का चुनाव पहले आओ, पहले पाओ के नियम के तहत किया जाता है। योजना के अंतर्गत चयनित किसानों को 40 प्रतिशत तक का अनुदान प्रदान किया जाता है, जिससे शुरुआती पौध और प्रबंधन का आर्थिक बोझ कम हो सके और किसान बेहतर लाभ अर्जित कर सकें।



















