व्यापार की दुनिया में अक्सर माना जाता है कि एक बड़ा उद्यम खड़ा करने के लिए भारी-भरकम शुरुआती पूंजी अनिवार्य होती है, लेकिन लगातार मेहनत, काम सीखने की लगन और अनुशासन से भी शून्य से विशाल कारोबारी साम्राज्य तैयार किया जा सकता है। नोएडा के उद्यमी राजीव गुप्ता का जीवन सफर इसी संकल्प की जीती-जागती मिसाल पेश करता है। स्कूल के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ एक छोटी सी दुकान पर बैठने और अपनी मामूली कमाई में से रोजाना केवल 50-50 रुपये बचाने वाले राजीव गुप्ता ने जमीनी स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स का हुनर सीखा। उन्होंने अपने हाथों से कूलर असेंबल किए, उनकी मरम्मत और सर्विसिंग की और तकनीकी बारीकियों को गहराई से समझा। दशकों की इस अनवरत साधना का नतीजा है कि आज उनकी कंपनी लगभग 300 करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के मुकाम पर पहुंच चुकी है।
बचपन का संघर्ष और 50 रुपये की दैनिक बचत
राजीव गुप्ता के कारोबारी सफर की नींव बहुत साधारण और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में पड़ी थी। उनके बेटे तनुज गुप्ता के अनुसार, जब राजीव गुप्ता केवल पांचवीं कक्षा में पढ़ते थे, तभी से उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के साथ-साथ एक परचून की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था। दुकान के कामकाज के बीच वह जो भी कमाते, उसमें से बेहद कड़े अनुशासन के साथ हर दिन 50-50 रुपये जमा करते थे। यह छोटी सी दैनिक बचत आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। उम्र बढ़ने के साथ वह शहर आए और वहां इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने इस काम को केवल बाहरी तौर पर नहीं देखा, बल्कि वर्कशॉप में खुद बैठकर कूलरों को पुर्जा-पुर्जा असेंबल किया, खराब कूलरों को ठीक किया और ग्राहकों की शिकायतों को दूर किया। इस जमीनी अनुभव ने उन्हें यह सिखाया कि उपकरण कैसे काम करते हैं और ग्राहक वास्तव में किसी उत्पाद से क्या उम्मीद रखते हैं।
25 हजार रुपये की जमापूंजी से कंपनी की नींव
वर्षों की कड़ी मेहनत और पाई-पाई जोड़कर बचाए गए पैसों के बल पर लगभग 25 साल पहले राजीव गुप्ता ने अपने स्वतंत्र उद्यम की शुरुआत की। तनुज गुप्ता ने बताया कि उनके पिता ने अपनी 25 हजार रुपये की कुल जमापूंजी लगाकर कंपनी की नींव रखी थी। शुरुआती दौर में कंपनी ने सामान्य इलेक्ट्रिकल उत्पादों के निर्माण और बिक्री पर ध्यान दिया। इसके बाद उन्होंने मेटल यानी लोहे की बॉडी वाले कूलरों का उत्पादन शुरू किया। समय बीतने के साथ जब बाजार का रुख बदलने लगा और ग्राहकों की पसंद में बदलाव आया, तब कंपनी ने भी अपने संचालन को आधुनिक बनाया और मेटल कूलर से आगे बढ़कर प्लास्टिक बॉडी वाले कूलरों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। बाजार की नब्ज को समय रहते भांपने की इसी क्षमता ने कारोबार को लगातार विस्तार दिया।
उत्पाद श्रृंखला का विस्तार और नई पीढ़ी का प्रवेश
बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढालते हुए कंपनी ने अपने पोर्टफोलियो का तेजी से दायरा बढ़ाया। आज थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड के पास 150 से 200 से अधिक एसकेयू (स्टॉक कीपिंग यूनिट्स) की विस्तृत उत्पाद श्रृंखला उपलब्ध है। कोविड महामारी के बाद के दौर में परिवार की नई पीढ़ी भी सक्रिय रूप से कारोबार की बागडोर संभालने आगे आई। अब कंपनी व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स के क्षेत्र में काम कर रही है और उसका मुख्य लक्ष्य पूरे भारत में अपनी सप्लाई चेन और वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाना है।
कूलर उद्योग में बदलाव और उपभोक्ता प्राथमिकताओं का अध्ययन
कंपनी के मार्केटिंग विशेषज्ञ तुषार गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी एक मजबूत और विश्वसनीय पहचान बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही है। कूलर उद्योग में हाल के वर्षों में आए बदलावों पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि एयर कंडीशनर (एसी) की कीमतें और उनका बिजली खर्च आज भी देश के हर परिवार के बजट के अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में भारत की एक बहुत बड़ी आबादी के लिए कूलर केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि गर्मियों में राहत देने वाला एक बुनियादी और जरूरी उत्पाद बना हुआ है। कंपनी की योजना पहले उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों में अपनी पकड़ को और अधिक पुख्ता करने की है, जिसके बाद चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य राज्यों में आपूर्ति का विस्तार किया जाएगा।
ऑनलाइन शोध और ऑफलाइन खरीदारी का हाइब्रिड मॉडल
उपभोक्ता व्यवहार में आए बदलावों का विश्लेषण करते हुए तुषार गुप्ता ने कहा कि अब ग्राहक केवल सस्ता सामान तलाशने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी विशिष्ट प्राथमिकताओं के आधार पर बेहतर गुणवत्ता और अपग्रेडेड फीचर्स वाले उत्पाद चाहता है। यही कारण है कि कंपनी लगातार नए डिजाइन और उन्नत तकनीक वाली उत्पाद श्रृंखला तैयार कर रही है। इसके अतिरिक्त, कोविड महामारी के बाद खरीदारी के तौर-तरीकों में एक हाइब्रिड मॉडल तेजी से उभरा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इंटरनेट के माध्यम से उत्पादों को देखने का चलन काफी बढ़ा है। ग्राहक सबसे पहले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाकर संबंधित उत्पाद के स्पेसिफिकेशंस, फीचर्स और कीमत की पूरी जानकारी जुटाता है। हालांकि, जब बात इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज जैसे ड्यूरेबल्स की आती है, तो अधिकांश ग्राहक अंतिम फैसला लेने से पहले स्थानीय दुकान पर जाकर उत्पाद के डिजाइन, रंग, निर्माण गुणवत्ता और मजबूती को अपनी आंखों से परखना पसंद करते हैं।


















