नौकरी चले जाने पर ज़्यादातर लोग हालात को कोसते रह जाते हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर के कमलेश श्रीवास्तव ने उसी मोड़ को नई शुरुआत में बदल दिया। प्राइवेट नौकरी छूटी, तो उन्होंने दूसरी नौकरी की तलाश में भटकने के बजाय अपने सबसे पुराने शौक — खाना पकाने — को ही रोज़ी-रोटी का ज़रिया बना लिया। आज लेनिन चौक पर उनकी 'चंपारण मटन हांडी' की पहचान मुजफ्फरपुर शहर से निकलकर पूरे जिले तक फैल चुकी है।
शौक जो कभी अधूरा रह गया था
कमलेश बताते हैं कि बचपन से ही दो चीज़ें उन्हें सबसे ज़्यादा भाती थीं — कुकिंग और एक्टिंग। घर की आर्थिक ज़रूरतों ने उन्हें कई साल प्राइवेट नौकरी में बांधे रखा, मगर उस काम में उनका मन कभी नहीं रमा। फिर एक दिन वह नौकरी ही हाथ से निकल गई। भविष्य की चिंता ने घेरा ज़रूर, पर उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और तय किया कि अब वही करेंगे जिसमें दिल लगता है।
2016 में पड़ी नींव
साल 2016 में उन्होंने लेनिन चौक पर चंपारण मटन हांडी की दुकान खोली। शुरुआती दौर आसान नहीं था — ग्राहक जोड़ने के लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ी। मटन वह खुद अपने हाथों से तैयार करते और हर आने वाले तक अपने स्वाद की पहचान पहुंचाने की कोशिश करते। धीरे-धीरे उनके हाथ के स्वाद की चर्चा शहर भर में होने लगी और ग्राहकों का दायरा बढ़ता चला गया।
राज़ है घर में बने मसाले का
उनकी डिश की असली ताकत बाज़ार से खरीदा कोई मसाला नहीं, बल्कि घर में तैयार होने वाला मसाला है। कमलेश बाहर का कोई मसाला इस्तेमाल नहीं करते — सारे मसाले वह अपने घर पर ही बनाते हैं, और इनमें कुछ खास सीक्रेट मसाले भी शामिल हैं, जो मटन के स्वाद को और लज़ीज़ बना देते हैं।
रोज़ बिकता है करीब एक क्विंटल मटन
मेहनत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि आज उनके यहां हर दिन तकरीबन एक क्विंटल मटन बिक जाता है। मटन तैयार करने का काम सुबह 8 बजे से 10 बजे के बीच होता है और इसे पकाने में करीब दो घंटे लगते हैं। कमलेश का कहना है कि वह मटन को पूरी सावधानी और पारंपरिक तरीके से पकाते हैं, ताकि ग्राहक को घर जैसा स्वाद मिले। फिलहाल उनके यहां हांडी मटन 1100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर मिलता है।
मटन अकेला विकल्प नहीं है। यहां चिकन भी बनता है, और सर्दियों में ग्राहकों की मांग को देखते हुए मछली भी तैयार की जाती है। जो लोग दुकान तक नहीं आ पाते, उनके लिए होम डिलीवरी की सुविधा भी है, ताकि घर बैठे ही इस स्वाद का मज़ा लिया जा सके।
सफलता का मंत्र
कमलेश मानते हैं कि किसी भी कारोबार को खड़ा करने का सबसे बड़ा फॉर्मूला तीन चीज़ें हैं — स्वाद, गुणवत्ता और ग्राहक का भरोसा। परिवार के साथ और अपने आत्मविश्वास के बल पर शुरू किया गया उनका यह सफर आज एक कामयाब व्यवसाय की शक्ल ले चुका है।
दूर-दूर से आते हैं स्वाद के शौकीन
अब हाल यह है कि सिर्फ मुजफ्फरपुर शहर ही नहीं, जिले के अलग-अलग इलाकों से भी लोग खास तौर पर उनकी दुकान का रुख करते हैं। उनके हाथ का स्वाद इस कदर मशहूर हो चुका है कि इधर से गुज़रने वाला हर शख्स एक बार हांडी मटन चखने की चाह ज़रूर रखता है। अगली बार आप भी इस ओर आएं, तो कमलेश के इस खास मटन का स्वाद लेना न भूलें।













