मीन साप्ताहिक राशिफल 23-29 अगस्त: करियर, रिश्ते और वित्त के लिहाज से कैसा रहेगा यह सप्ताहएस जयशंकर ने बांग्लादेश को समझाया कूटनीति का पाठ, साझा हितों पर जोर देकर रिश्तों की दशा तय कीअमेरिका-कनाडा टैरिफ जंग में डोनाल्ड ट्रंप की फजीहत, 8 सितंबर से मार्क कार्नी दिखाएंगे तेवरऋषिकेश से खाली हाथ नहीं लौटते पर्यटक, बाजारों में खूब बिकती हैं ये खास चीजेंझारखंड में मानसून फिर सक्रिय, पलामू और चतरा समेत इन 6 जिलों में भारी बारिश का अलर्टमकर साप्ताहिक राशिफल 23 से 29 अगस्त: करियर, वित्त और रिश्तों के लिए कैसा रहेगा यह सप्ताहधनु साप्ताहिक राशिफल 23 से 29 अगस्त: जानिए करियर, प्रेम, धन और स्वास्थ्य का हालराजस्थान में मौसम का यू-टर्न: जयपुर समेत 17 जिलों में भारी आंधी और वज्रपात का अलर्ट, जानें लेटेस्ट अपडेटछपरा के किसान ने मूली की खेती से रचा इतिहास, 30 दिन में कमा रहे हैं बंपर मुनाफामानसून में घर की छत पर उगाएं ये 5 खास सब्जियां, मचान बनाने की आसान तकनीक
बालोद का छोटा सा ठेला! मात्र सात हजार से शुरू किया काम, अब रोजाना हो रही तगड़ी कमाईसक्सेस स्टोरी
23 अग॰ 2026, 5:49 am (1 घंटे पहले)· 2

बालोद का छोटा सा ठेला! मात्र सात हजार से शुरू किया काम, अब रोजाना हो रही तगड़ी कमाई

छत्तीसगढ़ के बालोद में लेशकुमार साहू का ठेला अपने स्वादिष्ट स्नैक्स के लिए मशहूर हो गया है। महज सात हजार रुपये से शुरू हुए इस कारोबार में अब हर दिन अच्छी कमाई हो रही है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित झलमला बाजार चौक का एक छोटा सा फूड स्टॉल इन दिनों स्थानीय लोगों और स्वाद के शौकीनों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस ठेले का नाम गंगा मईया भेल कॉर्नर है, जिसे लेशकुमार साहू द्वारा संचालित किया जाता है। यहां पर मिलने वाली गरमागरम मिर्ची भजिया और मुंगेड़ी का स्वाद लेने के लिए हर शाम खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ती है। इस छोटे से कारोबार ने अपनी बेहतरीन गुणवत्ता के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

पच्चीस साल पहले हुई थी शुरुआत

लेशकुमार साहू ने इस काम की नींव करीब पच्चीस साल पहले रखी थी। उस शुरुआती दौर में वह अपने ठेले पर केवल भेल और गुपचुप बेचा करते थे। जैसे-जैसे वक्त बीता और ग्राहकों की पसंद में बदलाव आया, उन्होंने अपने मेनू का दायरा भी बढ़ा लिया। ग्राहकों की मांग को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ठेले पर अन्य स्वादिष्ट व्यंजन भी शामिल करने शुरू किए। लगभग सात महीने पहले उन्होंने विशेष रूप से गरमागरम नाश्ता तैयार करके बेचना शुरू किया, जिसके लिए उन्होंने केवल सात हजार रुपये की शुरुआती पूंजी लगाई थी। आज के समय में इस छोटे से व्यवसाय से उन्हें हर दिन ढाई हजार रुपये से ज्यादा की आमदनी हो रही है।

ये भी पढ़ें

शाम के वक्त उमड़ती है खरीदारों की भीड़

कारोबार के समय और बिक्री के बारे में जानकारी देते हुए लेशकुमार ने बताया कि दोपहर एक बजे से लेकर शाम सात बजे तक उनका ठेला ग्राहकों के लिए खुला रहता है। हालांकि शाम चार बजे से छह बजे के बीच का समय सबसे व्यस्त होता है, जब ग्राहकों की सबसे अधिक भीड़ पहुंचती है। इस ठेले पर मिर्ची भजिया, मुंगेड़ी, आलू गुंडा, गुपचुप और भेल परोसी जाती है। इनमें से ग्राहकों के बीच सबसे ज्यादा मांग मिर्ची भजिया और मुंगेड़ी की ही रहती है। खाने के शौकीनों के लिए यह नाश्ता बेहद किफायती दामों पर उपलब्ध है, जहां बीस रुपये में छह पीस गरमागरम मिर्ची भजिया दी जाती है, जबकि मुंगेड़ी की एक कटोरी का दाम भी बीस रुपये ही रखा गया है।

तैयार करने की खास विधि और पारिवारिक सहयोग

इस लजीज मिर्ची भजिया को तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में लेशकुमार की पत्नी ने विस्तार से बताया कि इसके लिए कम तीखेपन वाली मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले मिर्च को बीच में से चीरा लगाकर उसके अंदर अमचूर पाउडर भरा जाता है। इसके बाद बेसन का गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है जिसमें मिर्च को अच्छी तरह लपेटा जाता है। फिर इसे खौलते हुए तेल में लगभग दस मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है, जिससे यह पूरी तरह कुरकुरी और स्वादिष्ट बनकर तैयार होती है। इस पूरे काम में पति-पत्नी दोनों मिलकर हाथ बंटाते हैं। लेशकुमार ग्राहकों के लिए भेल और गुपचुप तैयार करने का जिम्मा संभालते हैं, जबकि उनकी पत्नी नाश्ते की अन्य चीजें और कड़ाही में भजिया तलने का काम संभालती हैं। दोनों की इस संयुक्त मेहनत का ही नतीजा है कि महज सात हजार रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज एक सफल और संतोषजनक आजीविका का जरिया बन चुका है।

सवाल-जवाब

गंगा मईया भेल कॉर्नर कहां स्थित है?
यह ठेला छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के झलमला बाजार चौक पर लगता है।
इस व्यवसाय की शुरुआत कितने रुपये से हुई थी?
इस कारोबार की शुरुआत महज 7000 रुपये की लागत से की गई थी।
ठेले पर सबसे ज्यादा किसकी मांग रहती है?
यहां मिर्ची भजिया और मुंगेड़ी की सबसे अधिक मांग रहती है।
मिर्ची भजिया और मुंगेड़ी का क्या दाम है?
बीस रुपये में छह नग मिर्ची भजिया मिलती है और मुंगेड़ी की एक कटोरी भी बीस रुपये की है।
इस ठेले का संचालन कौन करता है?
इस ठेले का संचालन लेशकुमार साहू अपनी पत्नी के साथ मिलकर करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR