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कोटा के यशराज ने मशरूम की खेती से बदली किस्मत, 10 हजार रुपये से खड़ा किया 20 लाख का कारोबारसक्सेस स्टोरी
17 जुल॰ 2026, 8:13 am (46 दिन पहले)· 2

कोटा के यशराज ने मशरूम की खेती से बदली किस्मत, 10 हजार रुपये से खड़ा किया 20 लाख का कारोबार

कोटा में बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने वाले यशराज ने नौकरी की जगह मशरूम की खेती को चुना, सिर्फ 50 बैग और 10 से 15 हजार रुपये से शुरू किया गया यह स्टार्टअप आज सालाना 20 लाख रुपये का टर्नओवर छू रहा है और 15 से 20 लोगों को रोजगार दे रहा है.

कोटा में बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई पूरी करने वाले यशराज ने वह रास्ता चुना जिस पर आमतौर पर बहुत कम युवा चलते हैं. जहां देश के लाखों ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद भारी पैकेज वाली कॉरपोरेट नौकरी की तलाश में जुट जाते हैं, वहीं यशराज ने नौकरी की लाइन में लगने के बजाय मिट्टी और तकनीक को साथ लेकर अपना खुद का एग्री-स्टार्टअप खड़ा किया. आज उनके इस फैसले का नतीजा है कि उनका सालाना कारोबार 20 लाख रुपये के आंकड़े तक पहुंच चुका है और वे कोटा सहित पूरे हाड़ौती क्षेत्र के युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं.

ट्रेनिंग के दौरान समझा मशरूम की खेती का गणित

यशराज बताते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई के आखिरी दौर में उन्हें कृषि से जुड़ी अलग-अलग ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था. इस दौरान उनके सामने मशरूम की खेती, डेयरी फार्मिंग और वर्मी कंपोस्ट जैसे कई विकल्प आए. इसी दौरान उन्होंने एक अहम बात नोट की, राजस्थान एक गर्म इलाका है, इसलिए यहां मशरूम की मांग और खपत दोनों काफी ज्यादा हैं, लेकिन इस मांग के मुकाबले स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन लगभग न के बराबर होता है. मांग और आपूर्ति के बीच के इसी बड़े फासले को यशराज ने एक शानदार बिजनेस मौके की तरह देखा और तय कर लिया कि वे कोटा से ही मशरूम की खेती शुरू करेंगे. उनका मानना था कि जिस इलाके में डिमांड इतनी ज्यादा हो, वहां लोकल उत्पादन शुरू करना सबसे समझदारी भरा कदम होगा.

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पॉकेट मनी जोड़कर सिर्फ 50 बैग से हुई शुरुआत

यशराज का शुरुआती सफर आसान नहीं था. उनके पास निवेश के लिए कोई बड़ी पूंजी नहीं थी और परिवार की तरफ से भी सिर्फ कॉलेज की फीस तक ही मदद मिल पाना संभव था. ऐसे हालात में उन्होंने कॉलेज के दिनों में ही अपने दोस्तों के साथ मिलकर महज 10 से 15 हजार रुपये इकट्ठा किए और सिर्फ 50 बैग के साथ एक छोटे से कमरे में मशरूम उगाने का काम शुरू कर दिया. जगह छोटी थी और संसाधन सीमित, लेकिन हौसला बड़ा था. पहले ही प्रयास में उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ, जिसने साबित कर दिया कि उनका आइडिया सिर्फ किताबी नहीं बल्कि व्यावहारिक तौर पर भी कामयाब हो सकता है.

फंडिंग नहीं मिलने पर टूटने लगा था हौसला

इस छोटे से प्रयोग को बड़े बिजनेस में बदलने के लिए यशराज ने कई बैंकों और प्राइवेट कंपनियों के दरवाजे खटखटाए. उन्होंने सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने के मकसद से अपने स्टार्टअप को एमएसएमई में रजिस्टर भी कराया. लेकिन शुरुआत में उन्हें कहीं से भी कोई आर्थिक मदद या लोन नहीं मिल सका. यशराज बताते हैं कि एक समय ऐसा भी आया जब वे बुरी तरह डीमोटिवेट हो चुके थे और इस काम को पूरी तरह बंद करने तक की सोच रहे थे. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय किसी तरह निजी स्तर पर पैसों का इंतजाम किया और मेहनत जारी रखी, भले ही कोई बड़ा संस्थागत सहारा उन्हें उस वक्त नहीं मिला था.

आज सालाना 20 लाख का टर्नओवर, दर्जनों को रोजगार

कड़े संघर्ष और अटूट भरोसे की बदौलत आज यशराज का यह मशरूम बिजनेस सालाना 20 लाख रुपये के टर्नओवर तक पहुंच चुका है. सबसे खास बात यह है कि इस स्टार्टअप के जरिए यशराज खुद तो आत्मनिर्भर बने ही हैं, साथ ही उन्होंने अपने साथ 15 से 20 स्थानीय लोगों को भी रोजगार दिया है. जो छोटा सा प्रयास स्टूडेंट लाइफ में महज 10 हजार रुपये से शुरू हुआ था, वह आज एक मुनाफे वाली इंडस्ट्री का रूप ले चुका है.

यशराज का कहना है कि अगर आप किसी काम को पूरी शिद्दत के साथ अपने दिमाग में बिठा लें और मुश्किलों के आगे घुटने न टेकें, तो आपका संघर्ष एक दिन जरूर बड़ी सफलता में बदल जाता है.

सवाल-जवाब

यशराज कौन हैं?
यशराज कोटा के रहने वाले हैं, जिन्होंने बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई की और नौकरी की जगह मशरूम की खेती का स्टार्टअप शुरू किया.
उन्होंने मशरूम की खेती ही क्यों चुनी?
कॉलेज की ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने देखा कि गर्म इलाका होने के कारण राजस्थान में मशरूम की मांग ज्यादा है लेकिन स्थानीय उत्पादन बहुत कम, इसी गैप को उन्होंने अवसर के तौर पर देखा.
उन्होंने शुरुआत कितने पैसों से की थी?
दोस्तों के साथ मिलकर जोड़े गए 10 से 15 हजार रुपये और सिर्फ 50 बैग से उन्होंने यह काम शुरू किया था.
पहले ही प्रयास में कितना मुनाफा हुआ?
पहले प्रयास में ही उन्हें करीब 15 से 20 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ.
क्या उन्हें बैंक या सरकार से मदद मिली?
शुरुआत में कई बैंकों और प्राइवेट कंपनियों से संपर्क करने और एमएसएमई में रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद उन्हें कोई लोन या आर्थिक मदद नहीं मिली.
आज उनका टर्नओवर कितना है?
आज यशराज के मशरूम बिजनेस का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये तक पहुंच चुका है.
उनके स्टार्टअप से कितने लोगों को रोजगार मिला है?
उन्होंने अपने साथ 15 से 20 स्थानीय लोगों को रोजगार दिया है.
यशराज का युवाओं के लिए क्या संदेश है?
उनका कहना है कि किसी काम को पूरी शिद्दत से अपने दिमाग में बिठा लें और मुश्किलों से हार न मानें, तो संघर्ष एक दिन बड़ी सफलता में बदल जाता है.
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