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पंचतत्व पर आधारित अनोखा फार्म: सीकर के किसान ने मिट्टी-गोबर से बनाए ऐसे कमरे, गर्मी में भी रहते हैं 10 डिग्री ठंडेसक्सेस स्टोरी
15 जून 2026, 11:22 am (45 दिन पहले)· 7

पंचतत्व पर आधारित अनोखा फार्म: सीकर के किसान ने मिट्टी-गोबर से बनाए ऐसे कमरे, गर्मी में भी रहते हैं 10 डिग्री ठंडे

सीकर के खोरी गांव के किसान शेरसिंह शेखावत ने एक हेक्टेयर के फार्म को भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश के संतुलन पर आधारित प्रयोगशाला में बदल दिया है, जहां हर साल 2000 से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी पहुंचते हैं।

राजस्थान के सीकर जिले के खोरी गांव में रहने वाले किसान शेरसिंह शेखावत ने पर्यावरण की रक्षा को सिर्फ पेड़ लगाने तक नहीं रोका। उन्होंने प्रकृति के पांच मूल तत्वों — भूमि, जल, वायु, अग्नि और आकाश — के बीच संतुलन साधने वाला एक ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जिसे देखने और समझने के लिए लोग दूर-दूर से उमड़ रहे हैं। उनका एक हेक्टेयर का फार्म हाउस अब किसी जीवंत प्रयोगशाला जैसा दिखता है, जिसे वेदों, पुराणों, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को एक साथ जोड़कर तैयार किया गया है।

मिट्टी को जीवन देने वाला भूमि तत्व

शेखावत बताते हैं कि सबसे पहले उन्होंने जमीन की ताकत पर काम किया। गोमूत्र, गोबर और पौराणिक औषधियों को किण्वित करके उन्होंने मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई, ताकि भूमि अधिक उपजाऊ बने। जैविक खेती को अपनाकर वे लगातार इसी उर्वरता को बनाए रखने पर जोर देते हैं, जिससे रासायनिक खाद की जरूरत ही खत्म हो जाती है।

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हर साल 12 लाख लीटर पानी सहेजने की व्यवस्था

जल तत्व के लिए उन्होंने फार्म पर वर्षा जल संचयन का असरदार इंतजाम किया है। खेत में गिरने वाले बारिश के पानी को नालों के जरिए कुंड तक पहुंचाया जाता है, और इसी तरह हर साल करीब 12 लाख लीटर पानी जमा हो जाता है। यह पानी पीने और सिंचाई, दोनों कामों में इस्तेमाल होता है। पानी के मामले में उनकी सोच अपने खेत तक सीमित नहीं रही — उन्होंने हर्ष पर्वत के बरसाती पानी को आसपास के गांवों तक ले जाने का मॉडल भी तैयार किया है।

एग्रो टूरिज्म से सालाना लाखों की कमाई

शेखावत ने अपने खेत को एग्रो टूरिज्म के रूप में भी विकसित किया है। यहां वातानुकूलित झोपड़ियां बनाई गई हैं, साथ ही फल और सब्जियों की खेती भी होती है। इन सब गतिविधियों से वे हर साल लाखों रुपए की आमदनी भी कमा रहे हैं।

1750 पेड़ और प्रदूषण से लड़ता वायु तत्व

हवा को साफ और संतुलित रखने के लिए उन्होंने फार्म पर करीब 1750 पेड़-पौधे लगाए हैं। खास बात यह है कि पौधों का चुनाव भी इसी सोच के साथ किया गया कि वे वायु प्रदूषण को ज्यादा बेहतर ढंग से रोक सकें।

बिना बिजली के प्राकृतिक AC, गर्मी में 10 डिग्री ठंडक

अग्नि तत्व के तहत उन्होंने मिट्टी और गोबर से चार प्राकृतिक वातानुकूलित कमरे बनाए हैं। यही उनके फार्म का सबसे बड़ा आकर्षण भी हैं। गर्मियों में इन कमरों का तापमान बाहर के मुकाबले करीब 10 डिग्री सेल्सियस कम रहता है, और सर्दियों में भी इनके भीतर का माहौल अनुकूल बना रहता है — वह भी बिना किसी बिजली से चलने वाले एयर कंडीशनर के।

ज्योतिष पर आधारित नवग्रह वाटिका

आकाश तत्व की अहमियत को समझते हुए शेरसिंह ने ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक नवग्रह वाटिका भी तैयार की है। इसमें नौ ग्रहों और 27 नक्षत्रों से जुड़े अलग-अलग पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जो भारतीय परंपरा और प्रकृति के गहरे रिश्ते को दर्शाते हैं।

हर साल 2000 पर्यटक, 4500 लोगों को प्रशिक्षण

उनके इस अनोखे फार्म हाउस पर हर साल दो हजार से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी अध्ययन के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा शेखावत अब तक 4500 से अधिक लोगों को जैविक खेती का प्रशिक्षण देकर पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ खेती के प्रति जागरूकता फैला चुके हैं।

सवाल-जवाब

शेरसिंह शेखावत का फार्म कहां है और कितना बड़ा है?
उनका फार्म राजस्थान के सीकर जिले के खोरी गांव में है और यह एक हेक्टेयर में फैला हुआ है।
उनके मिट्टी-गोबर वाले कमरे गर्मी में कितने ठंडे रहते हैं?
मिट्टी और गोबर से बने इन चार प्राकृतिक वातानुकूलित कमरों का तापमान गर्मियों में बाहर के मुकाबले करीब 10 डिग्री सेल्सियस कम रहता है।
फार्म पर हर साल कितना पानी जमा होता है?
वर्षा जल संचयन की व्यवस्था के जरिए हर साल करीब 12 लाख लीटर पानी जमा किया जाता है, जो पीने और सिंचाई दोनों में काम आता है।
उनके फार्म पर कितने लोग आते हैं और कितनों को उन्होंने प्रशिक्षण दिया है?
हर साल दो हजार से ज्यादा पर्यटक और शोधार्थी यहां पहुंचते हैं, और वे अब तक 4500 से अधिक लोगों को जैविक खेती का प्रशिक्षण दे चुके हैं।
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