17 साल की मेहनत मिट्टी में मिली, फिर ऐसे हुई नए सफर की शुरुआत
रांची के संजीत के लिए जीवन का एक दौर बेहद अंधकारमय था। उन्होंने अपनी 17 वर्षों की नौकरी के दौरान पाई-पाई जोड़कर 32 लाख रुपये की बड़ी रकम इकट्ठा की थी। इस जमापूंजी को उन्होंने एक बिजनेस में लगाया, लेकिन कोरोना महामारी की मार ने उनका सब कुछ छीन लिया। पूरा पैसा डूबने के बाद संजीत पूरी तरह सड़क पर आ गए और गहरे डिप्रेशन का शिकार हो गए। उन्हें लगने लगा था कि अब जिंदगी में कुछ भी नहीं बचा है।
एक छोटी सी प्रेरणा और आसमान छूने की जिद
इस निराशा के बीच संजीत की नजर एक ऐसे व्यक्ति पर पड़ी जो एयर होस्टेस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चला रहा था। इसे देखकर संजीत के मन में एक नया विचार कौंधा। आसमान में उड़ने की चाहत तो उन्हें हमेशा से थी ही, लेकिन उससे भी बड़ी इच्छा समाज के निचले तबके के लोगों के सपनों को उड़ान देने की थी। उन्होंने सोचा कि क्यों न मध्यम और निचले वर्ग की लड़कियों को स्कॉलरशिप देकर उन्हें एयर होस्टेस और क्रू मेंबर की ट्रेनिंग दी जाए।
कर्ज लेकर शुरू की संजीत एविएशन एकेडमी
इस नए सपने को सच करने के लिए संजीत ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई। उन्होंने लोन लिया और अपने दोस्तों से भी कुछ आर्थिक मदद मांगी। इसके बाद उन्होंने 'संजीत एविएशन एकेडमी' की नींव रखी। आज उनके पास इस संस्थान को चलाने का वैध लाइसेंस है। वर्तमान में उनके इस संस्थान में 300 से अधिक लड़के और लड़कियां ट्रेनिंग हासिल कर रहे हैं। संजीत जरूरतमंद और गरीब लड़कियों को बिल्कुल मुफ्त में स्कॉलरशिप देते हैं। यहां प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं को सीधे इंडिगो और एयर इंडिया जैसी नामी विमानन कंपनियों में नौकरी मिलती है।
एकेडमी के साथ डेकोर बिजनेस और रोजगार के अवसर
संजीत का सफर सिर्फ विमानन क्षेत्र तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने एक होम डेकोर कंपनी भी शुरू की है, जो घर को सजाने वाले खूबसूरत उत्पाद बनाती है। इन प्रोडक्ट्स को संजीत खुद डिजाइन करते हैं और उनकी देखरेख में कुशल कारीगर इन्हें तैयार करते हैं। आज उनके इस डेकोर बिजनेस और एविएशन एकेडमी को मिलाकर 50 से अधिक लोगों को रोजगार मिला हुआ है। कभी एक-एक रुपये के लिए संघर्ष करने वाले संजीत आज 50 परिवारों की आजीविका का सहारा बने हुए हैं। उनका कुल सालाना टर्नओवर अब करोड़ों रुपये में पहुंच चुका है।
सफलता का मूलमंत्र: सकारात्मक सोच
संजीत अपनी इस असाधारण कामयाबी का श्रेय केवल अपनी सकारात्मक सोच को देते हैं। उनका मानना है कि चाहे आप जीवन में बिल्कुल शून्य पर ही क्यों न पहुंच जाएं, सकारात्मक बने रहना बेहद जरूरी है। संजीत कहते हैं कि वक्त हमेशा बदलता रहता है और उतार-चढ़ाव जिंदगी का हिस्सा हैं। अगर आपका खुद पर और अपनी सकारात्मकता पर भरोसा अटूट है, तो आपका समय बदलना तय है।













