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रांची की उजाला देवी: गम की तिहरी मार के बाद खड़ी की अपनी कंपनी, अब 50 हजार मासिक आमदनीसक्सेस स्टोरी
3 घंटे पहले· 1

रांची की उजाला देवी: गम की तिहरी मार के बाद खड़ी की अपनी कंपनी, अब 50 हजार मासिक आमदनी

रांची के अंगढ़ा ब्लॉक की उजाला देवी ने एक ही साल में ससुर, पति और पिता तीनों को खोया, मजदूरी और राजमिस्त्री के काम से घर चलाया, फिर स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मड़वा के उत्पाद बनाने का कारोबार खड़ा किया और आज 40 से 50 हजार रुपये महीने कमाती हैं।

Rajesh KumarRajesh KumarSenior Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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रांची के अंगढ़ा ब्लॉक में रहने वाली उजाला देवी की कहानी यह साबित करती है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अगर हिम्मत न हारी जाए तो तकदीर बदल सकती है। आज वे हर महीने 40 से 50 हजार रुपये कमाती हैं, सरकार की तरफ से बेस्ट सेल्फ हेल्प ग्रुप समेत कई पुरस्कार जीत चुकी हैं और फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्य भी हैं। लेकिन यहां तक का सफर बेहद कठिन था।

एक साल में तीन गम

उजाला देवी के जीवन में एक ऐसा दौर आया जब लगा जैसे आसमान ही टूट पड़ा हो। एक ही साल के भीतर उनके ससुर, पति और पिता तीनों का निधन हो गया। यह तिहरा सदमा किसी को भी पूरी तरह तोड़ देने के लिए काफी था, लेकिन उजाला देवी ने खुद को बिखरने नहीं दिया।

मजदूरी और राजमिस्त्री से चला घर

परिवार का सहारा एकाएक छिन जाने के बाद उजाला देवी के सामने एक ही विकल्प था कि काम करो और घर चलाओ। उन्होंने मजदूरी की और राजमिस्त्री का काम भी किया। उस दौर में एक दिन में 100 से 200 रुपये की कमाई होती थी और उसी में नमक-भात खाकर रूखा-सूखा गुजारा होता था। घर में एक बेटा था और उसे अकेले पालने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।

स्वयं सहायता समूह ने पलटी किस्मत

जिंदगी ने असली करवट तब ली जब उजाला देवी एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यह कदम उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। समूह से जुड़ने के बाद सरकार की तरफ से ट्रेनिंग मिली और यह ट्रेनिंग समय-समय पर मिलती रही। उन्होंने मड़वा के लड्डू, शहद, तरह-तरह के अचार, पापड़ और तेल बनाना शुरू किया। सबसे खास बात यह कि उत्पादों की पैकेजिंग भी उन्होंने अपने हाथों से इस तरह तैयार की कि वे बिल्कुल ब्रांडेड उत्पादों जैसे नजर आते हैं।

नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी का कारोबार

उजाला देवी का समूह अब नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी के नाम से चलता है। इसके तहत मड़वा का आटा और मड़वा के लड्डू उनके सबसे प्रमुख उत्पाद हैं। इसके अलावा जामुन का सिरका, शुद्ध सरसों का तेल और ऑर्गेनिक तिल का तेल भी उनके उत्पादों की सूची में शामिल हैं। हर चीज की पैकेजिंग इतनी साफ-सुथरी और प्रोफेशनल होती है कि ग्राहक तुरंत आकर्षित हो जाते हैं।

मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिली बड़ी बाजार

मार्केटिंग के मोर्चे पर भी उजाला देवी को अच्छा समर्थन मिला है। उन्हें इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट पर उत्पाद बेचने का मौका मिलता है और सरकारी मेलों में मुफ्त में भाग लेने का अवसर भी मिलता है, जिसके जरिए मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना भी हो जाता है। उजाला देवी बताती हैं कि एक ही मेले में कई बार एक लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस पूरे कारोबार की बदौलत उनकी मासिक आमदनी आराम से 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।

बदल गई जिंदगी की तस्वीर

उजाला देवी जब अपना आज और कल देखती हैं तो खुद हैरान रह जाती हैं। जो बेटा कभी नमक-भात के सहारे बड़ा हुआ, वो आज प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। थाली में अब हर तरह के व्यंजन होते हैं। फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्यता और सरकारी सम्मान इस बात की गवाही देते हैं कि एक महिला ने अपने दम पर अपनी और अपने बेटे की जिंदगी पूरी तरह बदल दी।

इसका आप पर असर

  • भारत में: यह कहानी उन लाखों महिलाओं के लिए एक व्यावहारिक मिसाल है जो आर्थिक संकट में हैं कि स्वयं सहायता समूह और सरकारी ट्रेनिंग के जरिए 40 से 50 हजार रुपये महीने तक की कमाई हकीकत में संभव है।
  • रांची में: रांची और आसपास के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं उजाला देवी की तरह स्थानीय स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर, इंडियामार्ट और सरकारी मेलों का फायदा उठाकर घर बैठे अपनी आमदनी बड़े पैमाने पर बढ़ा सकती हैं।

प्रेरणा और सीख

उजाला देवी की कहानी से हर किसी के लिए कुछ ठोस सीख मिलती है।

  • सबसे बुरे दौर में भी काम बंद मत करो: एक साल में ससुर, पति और पिता खोने के बाद भी उन्होंने मजदूरी जारी रखी, यही उनकी असली ताकत बनी।
  • जो मिले उससे शुरुआत करो: 100 से 200 रुपये की रोज की मजदूरी से उन्होंने जीवन चलाया और कभी हार नहीं मानी।
  • सामूहिक शक्ति का फायदा उठाओ: स्वयं सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ रहा, जो अकेले हासिल करना संभव नहीं था।
  • सरकारी सुविधाओं का भरपूर उपयोग करो: सरकारी ट्रेनिंग, मुफ्त मेले और इंडियामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म का पूरा फायदा उठाकर उन्होंने एक मेले में ही लाख रुपये तक की बिक्री हासिल की।
  • प्रोडक्ट की पैकेजिंग और गुणवत्ता पर ध्यान दो: उजाला देवी ने अपने उत्पादों की पैकेजिंग ब्रांडेड स्तर पर की, जिससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा और बिक्री भी।

सवाल-जवाब

उजाला देवी कहां की रहने वाली हैं?
वे रांची के अंगढ़ा ब्लॉक की रहने वाली हैं।
उन्होंने एक साल में कौन से तीन दुख झेले?
एक ही साल में उनके ससुर, पति और पिता तीनों का निधन हो गया।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले उजाला देवी क्या काम करती थीं?
वे मजदूरी और राजमिस्त्री का काम करती थीं, जिसमें एक दिन में 100 से 200 रुपये मिलते थे।
उनके समूह का नाम क्या है?
उनके समूह का नाम नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी है।
वे कौन-कौन से उत्पाद बनाती हैं?
वे मड़वा का आटा, मड़वा के लड्डू, जामुन का सिरका, शुद्ध सरसों का तेल, ऑर्गेनिक तिल का तेल, शहद, अचार और पापड़ बनाती हैं।
एक मेले में उनकी कितनी बिक्री हो जाती है?
एक ही मेले में कई बार एक लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है।
उजाला देवी की अभी मासिक कमाई कितनी है?
वे आराम से 40 से 50 हजार रुपये प्रति माह कमाती हैं।
उन्हें मार्केटिंग के लिए कौन से प्लेटफॉर्म का उपयोग करने का मौका मिलता है?
उन्हें इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट और सरकारी मेलों में मुफ्त में भाग लेने का अवसर मिलता है, जिसकी वजह से मुंबई और दिल्ली जाना भी हो जाता है।
#सक्सेस स्टोरी#उजाला देवी#स्वयं सहायता समूह#रांची#महिला उद्यमी#मड़वा उत्पाद#झारखंड#आत्मनिर्भरता#फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन
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