रांची के अंगढ़ा ब्लॉक में रहने वाली उजाला देवी की कहानी यह साबित करती है कि सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अगर हिम्मत न हारी जाए तो तकदीर बदल सकती है। आज वे हर महीने 40 से 50 हजार रुपये कमाती हैं, सरकार की तरफ से बेस्ट सेल्फ हेल्प ग्रुप समेत कई पुरस्कार जीत चुकी हैं और फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्य भी हैं। लेकिन यहां तक का सफर बेहद कठिन था।
एक साल में तीन गम
उजाला देवी के जीवन में एक ऐसा दौर आया जब लगा जैसे आसमान ही टूट पड़ा हो। एक ही साल के भीतर उनके ससुर, पति और पिता तीनों का निधन हो गया। यह तिहरा सदमा किसी को भी पूरी तरह तोड़ देने के लिए काफी था, लेकिन उजाला देवी ने खुद को बिखरने नहीं दिया।
मजदूरी और राजमिस्त्री से चला घर
परिवार का सहारा एकाएक छिन जाने के बाद उजाला देवी के सामने एक ही विकल्प था कि काम करो और घर चलाओ। उन्होंने मजदूरी की और राजमिस्त्री का काम भी किया। उस दौर में एक दिन में 100 से 200 रुपये की कमाई होती थी और उसी में नमक-भात खाकर रूखा-सूखा गुजारा होता था। घर में एक बेटा था और उसे अकेले पालने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी।
स्वयं सहायता समूह ने पलटी किस्मत
जिंदगी ने असली करवट तब ली जब उजाला देवी एक स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। यह कदम उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। समूह से जुड़ने के बाद सरकार की तरफ से ट्रेनिंग मिली और यह ट्रेनिंग समय-समय पर मिलती रही। उन्होंने मड़वा के लड्डू, शहद, तरह-तरह के अचार, पापड़ और तेल बनाना शुरू किया। सबसे खास बात यह कि उत्पादों की पैकेजिंग भी उन्होंने अपने हाथों से इस तरह तैयार की कि वे बिल्कुल ब्रांडेड उत्पादों जैसे नजर आते हैं।
नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी का कारोबार
उजाला देवी का समूह अब नीम फूल फार्मर प्रोड्यूस कंपनी के नाम से चलता है। इसके तहत मड़वा का आटा और मड़वा के लड्डू उनके सबसे प्रमुख उत्पाद हैं। इसके अलावा जामुन का सिरका, शुद्ध सरसों का तेल और ऑर्गेनिक तिल का तेल भी उनके उत्पादों की सूची में शामिल हैं। हर चीज की पैकेजिंग इतनी साफ-सुथरी और प्रोफेशनल होती है कि ग्राहक तुरंत आकर्षित हो जाते हैं।
मेलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मिली बड़ी बाजार
मार्केटिंग के मोर्चे पर भी उजाला देवी को अच्छा समर्थन मिला है। उन्हें इंडियामार्ट जैसी वेबसाइट पर उत्पाद बेचने का मौका मिलता है और सरकारी मेलों में मुफ्त में भाग लेने का अवसर भी मिलता है, जिसके जरिए मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में जाना भी हो जाता है। उजाला देवी बताती हैं कि एक ही मेले में कई बार एक लाख रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस पूरे कारोबार की बदौलत उनकी मासिक आमदनी आराम से 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच जाती है।
बदल गई जिंदगी की तस्वीर
उजाला देवी जब अपना आज और कल देखती हैं तो खुद हैरान रह जाती हैं। जो बेटा कभी नमक-भात के सहारे बड़ा हुआ, वो आज प्राइवेट स्कूल में पढ़ता है। थाली में अब हर तरह के व्यंजन होते हैं। फार्मर प्रोड्यूस ऑर्गेनाइजेशन के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की सदस्यता और सरकारी सम्मान इस बात की गवाही देते हैं कि एक महिला ने अपने दम पर अपनी और अपने बेटे की जिंदगी पूरी तरह बदल दी।













