पारंपरिक हस्तशिल्प और सुई-धागे की कला, जिसे आमतौर पर पुरानी पीढ़ी के घरेलू हुनर के रूप में देखा जाता था, अब आधुनिक दौर में युवतियों के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का सशक्त जरिया बन रही है। मशीनी सामानों के दबदबे के बीच हाथ से बनी अनूठी वस्तुओं की मांग एक बार फिर बाजार में बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की रहने वाली आयुषी धीमान ने इसी पारंपरिक हुनर को आधुनिक जीवनशैली और ट्रेंडी डिजाइनों से जोड़कर अपने दम पर स्वरोजगार की एक नई राह तैयार की है।
कॉरपोरेट जॉब से मोहभंग और स्वरोजगार का फैसला
उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद आयुषी धीमान ने पेशेवर दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने बीए और एमकॉम की डिग्री हासिल की है। शिक्षा पूरी होने के उपरांत उन्होंने लगभग दो वर्षों तक एक निजी संस्थान में नौकरी भी की। हालांकि, इस नौकरी में उन्हें अपने भविष्य के लिए अधिक संभावनाएं नजर नहीं आईं। कम वेतन, प्रतिदिन आने-जाने की लंबी यात्रा और दफ्तर के सीमित दायरे ने उनके मन में खुद का काम शुरू करने की इच्छा जगाई।
वह किसी के अधीन रहकर काम करने के बजाय स्वतंत्र रूप से अपना उद्यम खड़ा करना चाहती थीं। जब उन्होंने अपने इस विचार को आगे बढ़ाया, तो उनके माता-पिता ने पूरा समर्थन दिया। परिवार के इसी भरोसे के दम पर उन्होंने नौकरी को अलविदा कह दिया और अपनी रचनात्मक क्षमता को व्यवसाय में बदलने का संकल्प लिया।
मात्र 250 रुपये से पहली शुरुआत
आयुषी ने अपने उद्यम की शुरुआत किसी बड़े निवेश के साथ नहीं की, बल्कि उनके पास शुरुआत के लिए मात्र 250 रुपये की मामूली पूंजी थी। जब उन्हें अपने काम का पहला ऑर्डर मिला, तो उन्होंने 250 रुपये की ऊन खरीदी और क्रोशिया की मदद से एक विशेष गिफ्ट तैयार किया। पहले उत्पाद की सफलता के बाद उन्हें तुरंत दो नए ऑर्डर मिले, जिससे उनका उत्साह बढ़ा।
धीरे-धीरे यह सिलसिला बढ़ता गया। आयुषी ने अब तक लगभग साढ़े चार हजार से पांच हजार रुपये तक की बिक्री कर ली है, जिसमें उन्हें करीब 2500 से 3000 रुपये का सीधा मुनाफा हुआ है। उनके बनाए उत्पादों की कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 5,000 रुपये तक जाती है। ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक रंग, डिजाइन और आकार में कस्टमाइजेशन भी करा सकते हैं।
मां से मिली कला और प्रेरणा
हाथ की इस बारीक कारीगरी का हुनर आयुषी को अपनी मां से विरासत में मिला है। उनका मानना है कि उनकी मां कई विधाओं में निपुण हैं और वही उनके काम की सबसे बड़ी प्रेरणा स्रोत भी हैं। मां को देखकर सीखी गई कला को उन्होंने आज के दौर की मांग के अनुसार नए रूप में ढाला है।
आयुषी का मानना है कि नौकरी में तय वेतन से आने-जाने और खान-पान के खर्च ही पूरे हो पाते हैं, जबकि स्वरोजगार में कलाकारी की कद्र और आगे बढ़ने की असीम संभावनाएं होती हैं। ग्राहक जब हाथ से बनी इन चीजों को देखकर संतुष्ट होते हैं, तो वही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
उत्पाद सूची और सोशल मीडिया का सहारा
शुरुआती दिनों में आयुषी को केवल सिंगल ऑर्डर मिलते थे, जैसे कोई एक कीचेन या क्रोशिया से बना फ्लावर बुके। लेकिन अब ग्राहकों की ओर से थोक ऑर्डर भी आने लगे हैं। उनकी उत्पाद श्रृंखला में कई तरह के सजावटी और रोजमर्रा के सामान शामिल हैं
- हेयर क्लिप्स और विभिन्न प्रकार के हेयर एक्सेसरीज
- क्रोशिया से तैयार किए गए खूबसूरत फ्लावर्स और बुके
- डिजाइनर की-रिंग्स और बैग चार्म्स
- फोन कवर्स और ट्रेंडी फोन चार्म्स
- उपहार देने के लिए विशेष हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं
अपने उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने के लिए आयुषी ने डिजिटल मंचों का उपयोग किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर दो अलग-अलग प्रोफाइल बनाए हैं, जो क्रिएशंस और द गिफ्टरी के नाम से संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्हाट्सएप पर कम्युनिटी ग्रुप्स बनाए हैं, जिनके जरिए वह ग्राहकों से सीधा संवाद करती हैं और ऑर्डर हासिल करती हैं।



















