सहारनपुर जिले के हसनपुर की रहने वाली 24 वर्षीय खुशी धीमान ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ नया करने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी मुश्किलों को भी पार किया जा सकता है। खुशी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद घर चलाने के लिए एक प्राइवेट नौकरी तो शुरू की, लेकिन उनके सपने सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं थे। वह कुछ ऐसा करना चाहती थीं जो न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता की एक नई पहचान भी दिला सके। इसी सोच के साथ उन्होंने बेहद कम निवेश में कबाड़ और रिबन का उपयोग करके गुलदस्ते बनाने का अपना खुद का काम शुरू किया। आज उनका यह रचनात्मक आइडिया एक सफल उद्यम का रूप ले रहा है और उन्हें दूर-दूर से लोग इसके लिए संपर्क कर रहे हैं।
खुशी धीमान का यह सफर आसान नहीं रहा है। उनके जीवन में एक बड़ा मोड़ तब आया जब साल 2015 में उनके पिता का आकस्मिक निधन हो गया। पिता के साये के उठ जाने के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर आ गई। घर के नाजुक आर्थिक हालात के बावजूद उनकी माता ने हार नहीं मानी और काफी संघर्ष करके खुशी को पढ़ाया-लिखाया। ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद खुशी ने भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को समझा और अपनी मां का हाथ बंटाने के लिए आगे आईं। अब वह न केवल अपने घर के खर्चों में मदद कर रही हैं, बल्कि अपने छोटे भाई-बहनों की शिक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।
नौकरी के साथ शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर
खुशी धीमान वर्तमान में एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही हैं। उन्होंने लगभग छह महीने पहले ही इस नौकरी को ज्वाइन किया है, जहां से उन्हें हर महीने लगभग आठ से दस हजार रुपये का वेतन मिलता है। हालांकि, यह राशि एक बड़े परिवार की सभी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसलिए खुशी ने सोचा कि नौकरी के साथ-साथ खाली समय में कोई ऐसा घरेलू काम किया जाए जो अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन सके। उन्होंने घर के काम और अपनी शिफ्ट के बाद बचे हुए समय का सदुपयोग करने का फैसला किया। इसी दौरान उन्हें कलात्मक और रचनात्मक चीजें बनाने का विचार आया, जिसने अंततः एक छोटे व्यवसाय की नींव रखी।
इंस्टाग्राम से सीखी कला और बनाया नया जरिया
अपने नए काम को शुरू करने के लिए खुशी ने किसी महंगे संस्थान से ट्रेनिंग नहीं ली और न ही कोई कोर्स किया। आज के डिजिटल युग का सही इस्तेमाल करते हुए उन्होंने इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपनी सीखने की पाठशाला बनाया। खुशी ने इंस्टाग्राम पर उपलब्ध विभिन्न कला और शिल्प के वीडियो देखना शुरू किया। इन वीडियो को देखकर उन्होंने समझा कि कैसे वेस्ट मटेरियल और रिबन का उपयोग करके सुंदर कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। उन्होंने खुद घर पर इसका अभ्यास किया और धीरे-धीरे इस कला में महारत हासिल कर ली। जब उन्हें लगा कि उनके भीतर यह टैलेंट पूरी तरह विकसित हो चुका है, तो उन्होंने इसे लोगों के सामने लाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने इंस्टाग्राम पर 'द गिफ्टरी' नाम से एक प्रोफाइल बनाई और अपने बनाए उत्पादों की तस्वीरें साझा करने लगीं।
मात्र 250 रुपये से शुरू हुआ व्यापार
इस व्यवसाय की सबसे खास बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए खुशी को किसी बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं पड़ी। उन्होंने मात्र ढाई सौ से तीन सौ रुपये की बेहद मामूली रकम के साथ अपनी पहली सामग्री खरीदी थी। उन्होंने क्राफ्ट के लिए रंग-बिरंगे रिबन खरीदे और उनसे फूल बनाना शुरू किया। खुशी इन रिबन को काटकर, उनके कोनों को हल्के से जलाकर और फिर उन्हें बड़ी खूबसूरती से मोड़कर फूलों का आकार देती हैं। शुरुआत में उन्होंने कुछ गुलदस्ते बनाकर अपने परिचितों और रिश्तेदारों को उपहार में दिए। लोगों को उनकी यह रचनात्मकता इतनी पसंद आई कि उन्होंने खुशी को इसके ऑर्डर देना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर पहचान मिलने के बाद उनके पास ऑर्डर्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खुशी अब तक करीब ग्यारह से बारह ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे कर चुकी हैं।
लागत, कमाई और ग्राहक संतुष्टि का गणित
इस व्यवसाय के मुनाफे और आर्थिक पहलू की बात करें तो यह बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है। खुशी के अनुसार, वह पांच फूलों वाले एक आकर्षक गुलदस्ते को तीन सौ रुपये में बेचती हैं। इस तरह के एक गुलदस्ते को तैयार करने में केवल सौ से डेढ़ सौ रुपये की लागत आती है, जिसमें रिबन, सजावटी सामान और वेस्ट मटेरियल शामिल हैं। इस प्रकार उन्हें प्रति गुलदस्ते पर लगभग शत-प्रतिशत का मुनाफा मिलता है। ग्राहकों से मिलने वाली प्रतिक्रिया भी बेहद सकारात्मक है। बाजार में मिलने वाले प्राकृतिक फूलों के गुलदस्ते जहां कुछ ही दिनों में सूख जाते हैं और लोग उन्हें कचरे में फेंक देते हैं, वहीं खुशी के बनाए ये गुलदस्ते सालों-साल खराब नहीं होते। लोग इन्हें हमेशा के लिए अपने घरों में सजावट के रूप में रख सकते हैं। यही वजह है कि ग्राहक खुशी-खुशी इन गुलदस्तों को खरीदते हैं और उनके पैसे वसूल हो जाते हैं।
भविष्य की उड़ान और महिलाओं के लिए प्रेरणा
खुशी धीमान का यह छोटा सा प्रयास अब एक बड़े सपने में तब्दील हो रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से जैसे-जैसे उनके काम का दायरा बढ़ रहा है और ऑर्डर्स की संख्या में इजाफा हो रहा है, खुशी का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है। उनका कहना है कि यदि यह व्यवसाय इसी तरह बढ़ता रहा, तो वह जल्द ही अपनी प्राइवेट कंपनी की नौकरी छोड़ देंगी और पूरी तरह से इसी होम-बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करेंगी। खुशी का यह कदम न केवल उनके आत्मनिर्भर बनने की कहानी लिख रहा है, बल्कि उन तमाम युवतियों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणा है जो घर बैठे अपने हुनर के दम पर आर्थिक रूप से स्वतंत्र होना चाहती हैं।



















